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प्रथम दृष्टया अस्थायी रजिस्ट्रेशन वाले नए वाहन सड़कों पर चल सकते हैं: केरल हाईकोर्ट

Shahadat
25 Nov 2022 8:57 AM GMT
प्रथम दृष्टया अस्थायी रजिस्ट्रेशन वाले नए वाहन सड़कों पर चल सकते हैं: केरल हाईकोर्ट
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केरल हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि प्रथम दृष्टया कार डीलर मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 43 के तहत जारी किए गए रजिस्ट्रेशन के अस्थायी सर्टिफिकेट के आधार पर अस्थायी रजिस्ट्रेशन चिह्न निर्दिष्ट करने के बाद मालिक को केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 53C के तहत नया मोटर वाहन वितरित कर सकता है।

जस्टिस पी.वी. कुन्हीकृष्णन ने कहा कि स्थायी रजिस्ट्रेशन नंबर प्राप्त करने वाले और 'फैंसी' स्थायी रजिस्ट्रेशन नंबर का इंतजार करने वालों के बीच अंतर करना, खासकर जब दोनों ने संपूर्ण प्रतिफल, टैक्स और बीमा राशि का भुगतान किया हो, प्रथम दृष्टया भेदभावपूर्ण है।

न्यायालय उस महिला द्वारा दायर रिट याचिका पर विचार कर रहा था, जिसने नई कार खरीदी, लेकिन उसे अपनी पसंद का नंबर लेने के लिए तीन महीने तक इंतजार करना पड़ा। उसी के कारण क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (पंजीकरण प्राधिकरण, एर्नाकुलम) के निर्देशानुसार उसे वाहन नहीं दिया जा रहा था।

इस आलोक में न्यायालय ने कहा,

"याचिकाकर्ता को नियम, 1989 के नियम 95 के अनुसार अपनी पसंद का नंबर लेने के लिए बोली में भाग लेने का अधिकार है। उसकी पसंद का नंबर तीन महीने बाद ही उपलब्ध होता है। दूसरे शब्दों में, जिन्होंने वाहन खरीदा है और स्थायी रजिस्ट्रेशन नंबर प्राप्त कर तुरंत अपना वाहन चला सकते हैं और जिन्होंने वाहन खरीदा है और नियम 1989 के नियम 95 के अनुसार, फैंसी नंबर चाहते हैं, उन्हें अनिश्चित काल तक इंतजार करना होगा। मेरी राय में यह प्रथम दृष्टया भेदभाव है। याचिकाकर्त नियम 95 के अनुसार बोली में भाग लेने का हकदार है, लेकिन वह संपूर्ण प्रतिफल, टैक्स और बीमा पॉलिसी प्राप्त करने के बाद भी वाहन नहीं चला सकता है। मुझे लगता है कि याचिकाकर्ता ने प्रथम दृष्टया मामला बनाया है।"

याचिकाकर्ता अपनी नई Kia Carens के लिए '5252' नंबर चाहती थी। उसने प्रस्तुत किया कि नंबर उसके और उसके परिवार के लिए भावनात्मक मूल्य रखता है। उसने उसी के लिए आवेदन जमा किया और केरल मोटर वाहन नियम 1989 (नियम, 1989) के नियम 95 के आलोक में बोली तीन महीने बाद ही लगेगी।

उत्तरदाताओं ने दावा किया कि जब स्थायी रजिस्ट्रेशन प्राप्त नहीं हो जाता, तब तक वाहन को अधिनियम, 1988 की धारा 41(6) के दूसरे प्रावधान के आलोक में वितरित नहीं किया जा सकता, जो यह निर्धारित करता है कि "नए मोटर वाहन के मामले में रजिस्ट्रेशन के लिए अधिनियम की धारा 41 की उप-धारा (1) के दूसरे प्रावधान के तहत किए गए आवेदन से ऐसे मोटर वाहन को तब तक मालिक को नहीं दिया जाएगा जब तक कि मोटर वाहन पर इस तरह के रजिस्ट्रेशन चिह्न को ऐसे रूप और तरीके से प्रदर्शित नहीं किया जा सकता है, जैसा कि केंद्रीय सरकार द्वारा निर्धारित किया जा सकता है।"

कोर्ट ने इस मौके पर मोटर वाहन अधिनियम 1988 (अधिनियम, 1988) की धारा 43 का अवलोकन किया, जो अस्थायी रजिस्ट्रेशन के लिए प्रदान करता है और केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 53सी के तहत निर्धारित रजिस्ट्रेशन चिह्न रखता है।

कोर्ट ने कहा,

"दूसरे शब्दों में, ऊपर उद्धृत दो प्रावधानों में नियोजित 'रजिस्ट्रेशन' शब्द स्पष्ट रूप से रजिस्ट्रेशन के अस्थायी सर्टिफिकेट के दायरे में आता है। इसके अलावा, केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 47 के अनुसार रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन, यानी मोटर वाहन का स्थायी रजिस्ट्रेशन फॉर्म 20 में होगा और अस्थायी रजिस्ट्रेशन के साथ होगा। इसलिए ऊपर उल्लिखित प्रावधानों को साथ पढ़ने से प्रथम दृष्टया पता चलता है कि डीलर क्षमता के आधार पर मालिक को केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 53C के तहत अस्थायी रजिस्ट्रेशन चिह्न निर्दिष्ट करने के बाद अधिनियम 1988 की धारा 43 के तहत जारी किए गए रजिस्ट्रेशन के अस्थायी सर्टिफिकेट पर नया मोटर वाहन वितरित कर सकता है।

इस प्रकार न्यायालय ने आरटीओ को कार डीलर को उचित निर्देश जारी करने का आदेश दिया कि याचिकाकर्ता को रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के अस्थायी परमिट के आधार पर वाहन दिया जा सकता ह, और वह अस्थायी परमिट पर वाहन चला सकती है।

याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व एडवोकेट पी. दीपक और नाज़रीन बानू ने किया, जबकि पहले प्रतिवादी की ओर से सरकारी वकील पेश हुए।

केस टाइटल: प्रेसी जोसेफ बनाम क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (रजिस्ट्रेशन प्राधिकरण), एर्नाकुलम और अन्य।

साइटेशन: लाइवलॉ (केरल) 617/2022

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