फार्मेसी संस्थानों को अंतरिम राहत देने के छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
LiveLaw News Network
25 Dec 2021 6:30 AM IST

सुप्रीम कोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा फार्मेसी कॉलेजों को अंतरिम राहत देने फैसले के एक सप्ताह के भीतर फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की है।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते कॉलेजों के बैच को अंतरिम राहत दी थी, जिन्होंने भारत सरकार और फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) द्वारा अगले 5 वर्षों के लिए देश में नए फार्मेसी कॉलेज खोलने पर लगाए गए 5 साल की रोक/ प्रतिबंध को चुनौती दी थी।
पीसीआई की ओर से दायर याचिका में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के के अंतरिम आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें पीसीआई को नए फार्मेसी संस्थानों खोलने के आवेदनों को स्वीकार करने, संसाधित करने और पूरा करने का निर्देश दिया गया था। (परिणाम को अंतिम आदेशों के अधीन रखते हुए)।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की एकल पीठ ने देश में नए फार्मेसी संस्थान खोलने पर पीसीआई और भारत सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को चुनौती देने वाली रिट याचिकाओं में अंतरिम आदेश पारित किया था।
हाईकोर्ट ने माना था कि प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ताओं की दलीलें सारगर्भित हैं और अंतरिम राहत की प्रार्थना पीसीआई के मामले को वास्तव में नुकसान नहीं पहुंचाती है क्योंकि उन्हें न्यायालय के अंतिम निर्णय तक अंतिम अनुमोदन पत्र जारी करने की आवश्यकता नहीं है।
कॉलेजों ने पीसीआई द्वारा लगाए गए स्थगन आदेश को फार्मेसी अधिनियम, 1948 के मूल अधिनियमन के प्रतिकूल होने के आधार पर चुनौती दी थी।
उल्लेखनीय है कि कर्नाटक हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने भी पीसीआई के प्रतिबंध आदेश को पीसीआई अधिनियम के मूल अधिनियम और कई अन्य आधारों पर असंवैधानिक करार दिया था। उक्त फैसले के खिलाफ, पीसीआई ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसले पर रोक लगाए बिना जनवरी 2022 में मामले को अंतिम बहस के लिए तय कर दिया है।
एओआर जोहेब हुसैन के माध्यम से दायर एसएलपी में दलील दी गई है कि अंतरिम आदेश पारित करते समय, हाईकोर्ट ने वस्तुतः अंतिम राहत प्रदान की है, जो अंतरिम चरण में तब तक नहीं दी जा सकती थी जब तक कि पक्षों को अंतिम रूप से नहीं सुना गया हो।
पीसीआई ने एसएलपी में यह भी उल्लेख किया है कि उसने भारत सरकार (स्वास्थ्य विभाग) के परामर्श से एक सूचित निर्णय लेने से पहले आंकड़ों और क्षेत्र के अध्ययन पर भरोसा किया था, और इसलिए, सर्वेक्षण और आंकड़ों पर आधारित उक्त निर्णय में हाईकोर्ट द्वारा हल्के ढंग से हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है।
छुट्टियों के बाद सुप्रीम कोर्ट के फिर से खुलने पर एसएलपी को सूचीबद्ध और सुने जाने की संभावना है।

