पंजाब नगर निगम चुनावों में धांधली का आरोप: हाईकोर्ट ने खारिज की प्रताप सिंह बाजवा की याचिका, जुर्माना भी लगाया

Shahadat

25 May 2026 7:27 PM IST

  • पंजाब नगर निगम चुनावों में धांधली का आरोप: हाईकोर्ट ने खारिज की प्रताप सिंह बाजवा की याचिका, जुर्माना भी लगाया

    पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कांग्रेस MLA और पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने से इनकार किया। इस याचिका में बाजवा ने पंजाब में चल रहे नगर निगम चुनावों के संचालन को लेकर चिंता जताई थी।

    चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की डिवीजन बेंच ने बाजवा को ₹25,000 का जुर्माना (कॉस्ट) भरने की शर्त पर अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दी।

    पंजाब के एडवोकेट जनरल मनिंदरजीत सिंह बेदी ने कोर्ट को बताया कि बाजवा "साफ हाथों" (पूरी ईमानदारी) के साथ कोर्ट नहीं आए, क्योंकि उन्होंने अपने खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353(2) और 197(1)(d) के तहत दर्ज FIR की जानकारी कोर्ट को नहीं दी थी।

    बेंच ने स्पष्ट किया कि लागू नियमों के अनुसार, विशेष रूप से PIL की कार्यवाही में याचिकाकर्ता को अपने "क्रेडेंशियल्स (पहचान/योग्यता) और इसमें शामिल प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष व्यक्तिगत मकसद" का खुलासा करना अनिवार्य होता है।

    बाजवा के वकील ने दलील दी कि यह चूक "अनजाने में" (bona fide) हुई थी। उन्होंने FIR से जुड़े मामले को इस याचिका से "असंबद्ध" (अलग) कार्यवाही के तौर पर पेश करने की कोशिश की।

    चीफ जस्टिस ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा,

    "आप अपने ही मामले में खुद ही जज बन रहे हैं।"

    उन्होंने आगे कहा कि लागू नियमों के तहत, विशेष रूप से PIL मामलों में याचिकाकर्ता को अपने "क्रेडेंशियल्स और इसमें शामिल प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष व्यक्तिगत मकसद" का खुलासा करना ज़रूरी होता है।

    बाजवा ने कोर्ट में आरोप लगाया कि शुतराना (पटियाला) से MLA कुलवंत सिंह द्वारा दिया गया बयान स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करता है। आरोप है कि उस MLA ने एक जनसभा के दौरान कहा था कि यदि वोटों में कोई कमी आती है तो "वे दरवाज़े बंद करके मामला निपटा लेंगे।" साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया था कि सत्ताधारी पक्ष भारी अंतर से "17-0" की जीत हासिल करेगा।

    याचिका में यह तर्क दिया गया कि इस तरह की टिप्पणियां बूथ कैप्चरिंग और चुनावी धांधली की ओर एक "अप्रत्यक्ष धमकी" के समान हैं, जो मतदाताओं के विश्वास और चुनावी प्रक्रिया की शुचिता (Integrity) को कमज़ोर करती हैं। आगे यह तर्क दिया गया कि मतदाताओं को डराना-धमकाना अदालतों द्वारा लगातार गंभीर संवैधानिक चिंता के रूप में माना गया है। साथ ही बूथ कैप्चरिंग 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' की धारा 135A के तहत एक अपराध है।

    पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी के दुरुपयोग की आशंकाओं को उजागर करते हुए याचिकाकर्ता ने मतदान के दिन से पहले अदालत से निवारक निर्देश मांगे; उनका दावा था कि मतदाताओं को बिना किसी डर दबाव या धमकी के स्वतंत्र रूप से अपना वोट डालने का संवैधानिक अधिकार है। याचिका में इस संबंध में राज्य चुनाव आयोग को दिए गए अभ्यावेदन का भी उल्लेख किया गया।

    इस याचिका का विरोध करते हुए पंजाब के एडवोकेट जनरल मनिंदरजीत सिंह बेदी ने इसकी स्वीकार्यता पर भी सवाल उठाया; उनका तर्क था कि यह याचिका विपक्ष के नेता द्वारा दायर की गई एक "राजनीतिक हित याचिका" (political interest litigation) के समान है।

    अदालत ने आगे यह भी टिप्पणी की कि FIR दर्ज होने से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य का "खुलासा किया जाना चाहिए था"।

    तथ्यों को छिपाने और याचिका की स्वीकार्यता पर अदालत की टिप्पणियों का सामना करते हुए बाजवा ने जनहित याचिका (PIL) वापस लेने की अनुमति मांगी। अदालत ने इसकी अनुमति तो दी लेकिन याचिका को जुर्माने के साथ खारिज किया।

    Title: Partap Singh Baiwa v. State of Punjab and others

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