हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ की 'पशु क्रूरता निवारण सोसायटी' में कुत्तों के खराब पोषण पर चिंता जताई, लोकल कमिश्नर को निगरानी का आदेश दिया
Shahadat
13 March 2026 10:16 AM IST

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में चंडीगढ़ की 'पशु क्रूरता निवारण सोसायटी' (SPCA) के कामकाज पर गंभीर चिंता जताई। यह तब हुआ जब कोर्ट द्वारा नियुक्त एक लोकल कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट में कई समस्याओं का ज़िक्र किया, जिनमें कर्मचारियों के वेतन का भुगतान न होना, जानवरों को पर्याप्त पोषण न मिलना और उनके रखरखाव को लेकर चिंताएं शामिल थीं।
इस रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने SPCA को एक हलफनामा (affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया। इस हलफनामे में SPCA को उन कदमों का ब्योरा देना होगा, जो वह शेल्टर में रखे गए जानवरों की पोषण संबंधी ज़रूरतों को ठीक से पूरा करने के लिए उठाएगी।
यह आदेश जस्टिस अलका सरीन ने तब पारित किया, जब वह शौर्य मदन और 'सहजीवी फाउंडेशन चैरिटेबल ट्रस्ट' द्वारा दायर दो अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थीं।
कोर्ट ने 10 मार्च, 2026 को एक लोकल कमिश्नर, एडवोकेट श्रुति शर्मा को नियुक्त किया था। उन्हें शेल्टर का निरीक्षण करने और जानवरों की स्थिति व शेल्टर के कामकाज के संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का काम सौंपा गया।
सुनवाई के दौरान, लोकल कमिश्नर ने कोर्ट को बताया कि SPCA के कुछ कर्मचारियों को उनके वेतन का भुगतान नहीं किया गया था। यह शेल्टर में जानवरों की कथित उपेक्षा के कारणों में से एक था।
चंडीगढ़ प्रशासन के वकील ने कोर्ट के सामने दो सरकारी आदेश पेश किए। इन आदेशों से पता चला कि मई, 2025 में SPCA के लिए 50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता मंज़ूर की गई और नवंबर 2025 में 70 लाख रुपये की एक और राशि जारी की गई।
हालांकि, SPCA के वकील ने कहा कि प्रशासनिक मुद्दों के कारण वेतन वितरण में देरी हुई। उन्होंने आगे बताया कि जनवरी 2026 का वेतन अब जारी कर दिया गया और फरवरी का वेतन एक या दो दिन के भीतर दे दिया जाएगा।
स्वयंसेवकों को सीमित पहुंच के साथ अनुमति
सुनवाई के दौरान, कोर्ट को बताया गया कि पहले स्वयंसेवकों के लिए विस्तृत पंजीकरण फॉर्म जारी किया गया, जिसमें स्वयंसेवकों से कई तरह की घोषणाएं (Declarations) मांगी गईं।
SPCA के वकील ने स्पष्ट किया कि अब स्वयंसेवकों को केवल अपना नाम, दो तस्वीरें और पहचान पत्र जमा करना होगा। इसके साथ ही उन्हें 'मानक संचालन प्रक्रियाओं' (SOPs) का पालन करने का एक वचनपत्र (Undertaking) भी देना होगा।
दोनों पक्षकारों के बीच इस बात पर सहमति बनी कि SPCA में एक समय में पांच से ज़्यादा स्वयंसेवकों को आने की अनुमति नहीं होगी। स्वयंसेवकों द्वारा फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करने की अनुमति केवल दोपहर 2 बजे से 3 बजे के बीच होगी।
दोनों पक्षकारों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि यदि कोई स्वयंसेवक अभद्र या अनुशासनहीन व्यवहार करता है तो उसे परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया जाएगा।
CCTV मॉनिटरिंग का आदेश
याचिकाकर्ताओं ने जानवरों के साथ होने वाले बर्ताव को लेकर चिंता जताते हुए शेल्टर के CCTV फुटेज तक पहुंच की भी मांग की थी। हालांकि, SPCA ने इस अनुरोध का विरोध किया, लेकिन कोर्ट ने निर्देश दिया कि लोकल कमिश्नर को CCTV फुटेज तक पूरी पहुंच दी जाएगी ताकि हाईकोर्ट की एक डिवीज़न बेंच द्वारा एक जनहित याचिका में दिए गए पिछले आदेश का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
पिछले आदेश में चंडीगढ़ प्रशासन को निर्देश दिया गया कि वह इस सुविधा केंद्र में जानवरों के लिए उचित आहार, मेडिकल देखभाल, साफ़ पीने का पानी और हवादार रहने की जगह सुनिश्चित करे।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोकल कमिश्नर द्वारा प्राप्त कोई भी CCTV फुटेज याचिकाकर्ताओं के साथ साझा नहीं किया जाएगा, न ही उसे सार्वजनिक किया जाएगा और न ही सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जाएगा।
कोर्ट ने कुत्तों को दिए जा रहे पोषण पर सवाल उठाए
कोर्ट ने SPCA द्वारा जमा की गई ऑडिट की हुई बैलेंस शीट की भी जांच की, जिससे पता चला कि 31 मार्च, 2024 को समाप्त हुए वर्ष के लिए, संगठन ने कुल ₹1.22 करोड़ का खर्च किया था।
इस राशि में से ₹1.09 करोड़ वेतन पर खर्च किए गए, जबकि जानवरों के भोजन पर केवल ₹3.53 लाख और चिकित्सा खर्चों पर ₹57,565 खर्च किए गए।
लोकल कमिश्नर ने जानवरों को दिए जा रहे भोजन की तस्वीरें भी जमा की थीं, जिसमें चावल, अंडे और दलिया शामिल थे।
सुनवाई के दौरान, कोर्ट में मौजूद पशु चिकित्सकों ने जज को बताया कि लगभग 20 किलोग्राम वज़न वाले कुत्ते को प्रतिदिन लगभग 150 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है, जिसका मोटा-मोटा मतलब है कि उसे प्रतिदिन चार से पांच अंडे चाहिए।
हालांकि, यह सामने आया कि सुबह के पूरे भोजन में लगभग 45–47 अंडे मिलाए जा रहे थे और शाम के भोजन में भी उतनी ही मात्रा मिलाई जा रही थी, जबकि शेल्टर में इस समय लगभग 47 कुत्ते रखे गए।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि डॉक्टरों के अपने बयानों के अनुसार भी, जानवरों की पोषण संबंधी आवश्यकताएं पूरी नहीं हो रही थीं।
इन चिंताओं के मद्देनज़र, हाईकोर्ट ने SPCA को एक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया, जिसमें यह बताया जाए कि जानवरों के लिए उचित पोषण सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
कोर्ट ने लोकल कमिश्नर को इस सुविधा केंद्र की निगरानी जारी रखने की भी अनुमति दी। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने स्वेच्छा से लोकल कमिश्नर को SPCA के दौरे के लिए प्रति माह ₹10,000 का भुगतान करने की पेशकश की।
इस मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल, 2026 को होगी।
Titles: Shaurya Madan v. Nishant Kumar Yadav & Anr. and Sehjeevi Foundation Charitable Trust v. Nishant Kumar Yadav & Ors.

