अतिक्रमण विवाद में अवमानना क्षेत्राधिकार का दुरुपयोग करने पर Congress MLA सुखपाल सिंह खैरा पर लगा ₹6 लाख का जुर्माना
Shahadat
21 May 2026 7:26 PM IST

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा की अवमानना याचिका खारिज की। इस याचिका में उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध रूप से तोड़फोड़ की गई। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सार्वजनिक ज़मीन पर कथित अतिक्रमण से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए अवमानना क्षेत्राधिकार का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करने के लिए उन पर ₹6 लाख का भारी जुर्माना लगाया।
जस्टिस सुदीप्ति शर्मा खैरा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थीं। खैरा ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 'स्ट्रक्चर्स के विध्वंस के मामले में निर्देश (2024)' के संबंध में जारी निर्देशों की जानबूझकर अवहेलना की गई। उन्होंने दावा किया कि उनकी पुश्तैनी संपत्ति का एक हिस्सा बिना किसी उचित प्रक्रिया का पालन किए ही तोड़ दिया गया।
खैरा ने दलील दी कि प्रतिवादियों ने उनकी रिहायशी संपत्ति का हिस्सा रही एक दीवार/गेट को बिना किसी पूर्व सूचना के या सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनिवार्य किए गए प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों का पालन किए बिना ही तोड़ दिया। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि यह कार्रवाई मनमानी और राजनीति से प्रेरित थी।
इस याचिका का विरोध करते हुए राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि जिस स्ट्रक्चर (ढांचे) की बात हो रही है, वह एक सार्वजनिक सड़क पर किया गया अवैध अतिक्रमण था, जो ग्राम पंचायत के अधिकार क्षेत्र में आती है। सरकार ने तर्क दिया कि ऐसे मामले सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए अपवादों की श्रेणी में आते हैं, जहाँ तोड़फोड़ से जुड़े सुरक्षा उपाय सार्वजनिक सड़कों और सार्वजनिक उपयोग वाले क्षेत्रों पर बने अनाधिकृत स्ट्रक्चर्स पर लागू नहीं होते।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पैराग्राफ 91 स्पष्ट रूप से सार्वजनिक सड़कों, रास्तों और इसी तरह के सार्वजनिक उपयोग वाले क्षेत्रों पर बने अनाधिकृत स्ट्रक्चर्स को पूर्व सूचना और अन्य प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों की आवश्यकता से बाहर रखता है।
रिकॉर्ड की जांच करने पर कोर्ट को प्रथम दृष्टया ऐसे सबूत मिले जिनसे यह साबित होता था कि विवादित ज़मीन वास्तव में एक सार्वजनिक रास्ते का ही हिस्सा थी। उक्त रिपोर्ट में जूनियर इंजीनियर की रिपोर्ट, माप पुस्तिका (Measurement Book) में दर्ज विवरण, SVAMITVA रिकॉर्ड और सैटेलाइट तस्वीरें शामिल थीं।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह याचिका "बड़ी ही चालाकी और होशियारी से तैयार की गई," ताकि इसे अवमानना का मामला दिखाया जा सके; जबकि असल में यह विवाद सार्वजनिक संपत्ति से अतिक्रमण हटाने से जुड़ा हुआ था।
कोर्ट ने आगे चेतावनी दी कि सामान्य दीवानी या प्रशासनिक विवादों को अवमानना की कार्यवाही का रूप देने की कोशिशें नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि ऐसी हरकतों से न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता और गरिमा को ठेस पहुँचती है।
इसमें आगे कहा गया,
"दस्तावेज़ों से पता चलता है कि सामान्य नागरिक और प्रशासनिक विवाद को अवमानना कार्यवाही का रूप देने की जान-बूझकर कोशिश की गई। इसके लिए माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों को चुनिंदा तरीके से इस्तेमाल किया गया, जबकि उसी फ़ैसले के पैराग्राफ़ 91 में सार्वजनिक सड़कों और सार्वजनिक उपयोग वाले क्षेत्रों पर मौजूद अनाधिकृत ढांचों के संबंध में दी गई स्पष्ट छूट को जान-बूझकर नज़रअंदाज़ कर दिया गया।"
Title: SUKHPAL SINGH v. AMIT PANCHAL, IAS AND ORS.

