Top
Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य सुर्खियां

उड़ीसा हाईकोर्ट ने राज्य में कुष्ठ रोगियों के लिए रहने की उपलब्ध जगह की स्थिति, चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए समिति का गठन किया

LiveLaw News Network
22 July 2021 7:00 AM GMT
उड़ीसा हाईकोर्ट ने राज्य में कुष्ठ रोगियों के लिए रहने की उपलब्ध जगह की स्थिति, चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए समिति का गठन किया
x

उड़ीसा हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह राज्य में कुष्ठ कालोनियों में रहने वाले कुष्ठ रोगियों के रहने की स्थिति और चिकित्सा सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए तीन सदस्यीय अधिवक्ता समिति नियुक्त की थी।

मुख्य न्यायाधीश एस मुरलीधर और न्यायमूर्ति एस.के. पाणिग्रही एक जनहित याचिका पर विचार कर रहे थे। इसमें राज्य के अधिकारियों को राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम (एनएलईपी) के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए निर्देश देने और एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति नियुक्त करने की मांग की गई थी, जिससे न्यायालय को समग्र पोस्ट प्रबंधन उपचार पर निर्देश जारी करने में सक्षम बनाया जा सके।

यह देखते हुए कि पंकज सिन्हा बनाम भारत संघ (2014) 16 एससीसी 390 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के निर्देशों के अनुपालन के संबंध में राज्य द्वारा दिए गए जवाबों में कोई संकेत नहीं है, कोर्ट ने आदेश दिया:

"ओडिशा राज्य में कुष्ठ प्रभावित व्यक्तियों की सही संख्या पर अभी तक कोई स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है। इसके अलावा, कुष्ठ प्रभावित व्यक्तियों के लिए हर जिले में उपलब्ध सुविधाओं और विभिन्न हस्तक्षेपों पर कोई स्पष्टता नहीं है। राज्य और केंद्र द्वारा चलाई गई योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इसके परिणामस्वरूप कुष्ठ रोग की घटनाओं में कमी आई है।"

इसलिए कोर्ट ने तीन सदस्यीय समिति नियुक्त की। इस समिति में वरिष्ठ अधिवक्ता गौतम मिश्रा, अधिवक्ता बी.पी. त्रिपाठी और पामी रथ शामिल हैं। इन्हें कुष्ठ कॉलोनियों और कुष्ठ गृह का दौरा करने और कैदियों के साथ बातचीत करने और उनके सामने आने वाली समस्याओं का पता लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई।

समिति को यह पता लगाने का भी काम सौंपा गया है कि क्या एनएलईपी और राज्य के कार्यक्रमों के माध्यम से हस्तक्षेप का उन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

अदालत ने समिति के सदस्यों को प्रशिक्षित कुष्ठ श्रमिकों या पैरामेडिकल कर्मचारियों के साथ बातचीत करने का भी निर्देश दिया, जो उक्त कॉलोनियों में कैदियों की जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। साथ ही उनकी तत्काल और दीर्घकालिक जरूरतों को समझने के लिए ऐसे रोगियों के परिवारों के साथ भी बातचीत करने के लिए कहा गया।

कोर्ट ने निर्देश दिया,

"समिति स्वतंत्र स्वास्थ्य पेशेवरों के साथ उनके दृष्टिकोण, इनपुट और सुझावों के लिए बातचीत करने की कोशिश करेगी। इसे बाद में रिपोर्ट में शामिल किया जा सकता है।"

इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने निदेशक, स्वास्थ्य सेवा, ओडिशा को निम्नलिखित पहलुओं पर सटीक आंकड़ों पर प्रकाश डालते हुए एक हलफनामा दायर करने का भी निर्देश दिया:

- दोनों किस्म के कुष्ठ रोग की व्यापकता।

- जहां तक ​​ओडिशा का संबंध है, पंकज सिन्हा मामले में जारी दिशा-निर्देश के अनुपालन की स्थिति।

- शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विभिन्न अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, स्वास्थ्य केन्द्रों पर उपचार, बिस्तरों, दवाओं (एमडीटी सहित) की उपलब्धता की स्थिति।

- चिकित्सा अधिकारियों एवं कर्मचारियों के रिक्त पदों को भरने की स्थिति।

कोर्ट ने शुरुआत में अवलोकन किया,

"ज़मीनी हालात में हालांकि थोड़ा बदलाव आया है। वर्तमान याचिका पंकज सिन्हा द्वारा 2014 में संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत भारत के सर्वोच्च न्यायालय में दायर एक याचिका में व्यक्त की गई चिंताओं को प्रतिबिंबित करती है।"

अब इस मामले की सुनवाई दो सितंबर को होगी।

शीर्षक: बिपिन बिहारी प्रधान बनाम ओडिशा राज्य और अन्य

ऑर्डर डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें




Next Story