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आपत्तिजनक रीट्वीट: मद्रास हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट के समक्ष भाजपा पदाधिकारी के जब्त मोबाइल को पेश करने में छह दिन की देरी के लिए जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया

Avanish Pathak
23 Sep 2022 8:58 AM GMT
आपत्तिजनक रीट्वीट: मद्रास हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट के समक्ष भाजपा पदाधिकारी के जब्त मोबाइल को पेश करने में छह दिन की देरी के लिए जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया
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मद्रास हाईकोर्ट ने आपत्तिजनक रीट्वीट के बाद जांच के सिलसिले में जब्त किए गए अपने फोन को वापस करने की मांग वाली भाजपा पदाधिकारी सौधा मणि की याचिका पर विचार करते हुए, कहा कि न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष भौतिक वस्तुओं को पेश करने में देरी से पूरा अभियोजन प्रभावित होगा।

वर्तमान मामले में, सामग्री (फोन) को जब्ती के छह दिन बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया था।

यह देखते हुए कि छह दिनों की इस अस्पष्टीकृत देरी को खारिज नहीं किया जा सकता है, जस्टिस पी वेलमुरुगन ने पुलिस महानिदेशक को जांच अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आदेश दिया।

कोर्ट ने कहा,

"वर्तमान मामले के जांच अधिकारी ने जब्ती के तुरंत बाद विषय संपत्ति को पेश नहीं किया, और उसे 6 दिनों की देरी से पेश किया, जो अभियोजन पक्ष के मामले के लिए हानिकारक होगा।

बरामदगी के तुरंत बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट को विषय संपत्ति नहीं भेजने के लिए उनकी ओर से कोई स्पष्टीकरण भी नहीं दिया गया है। इस‌लिए यह न्यायालय पुलिस महानिदेशक को निर्देश देता है कि वह मामले के जांच अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। साथ ही सभी जांच अधिकारियों को निर्देश दें कि तुरंत संबंधित अदालत में भौतिक वस्तुओं को पेश करें और इस संबंध में रिपोर्ट दाखिल करें।"

मणि को केंद्रीय अपराध शाखा की साइबर अपराध शाखा ने एक वीडियो को रीट्वीट करने के आरोप में गिरफ्तार किया था, जिसमें कथित तौर पर धार्मिक सद्भाव को ठेस पहुंचाई गई थी। वीडियो में दावा किया गया है कि अतिक्रमण हटाने के अदालती आदेशों के बाद केवल हिंदू मंदिरों को तोड़ा जा रहा है और अन्य धार्मिक संस्थानों को छोड़ दिया गया है।

उन्होंने अपने मोबाइल फोन को वापस करने के लिए निचली अदालत का रुख किया था, जिसे जांच के दौरान जब्त कर लिया गया था। इस याचिका को अदालत ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि जांच अभी शुरुआती चरण में है। उसी से व्यथित उन्होंने आपराधिक पुनरीक्षण याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

राज्य ने प्रस्तुत किया कि विषय संपत्ति (फोन) को फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला को भेज दिया गया था और रिपोर्ट की प्रतीक्षा की जा रही थी।

चूंकि विषय संपत्ति एक भौतिक वस्तु थी जो जांच के लिए आवश्यक थी, और यह देखते हुए कि फोरेंसिक प्रयोगशाला से रिपोर्ट प्राप्त होना बाकी था, अदालत ने निचली अदालत के आदेश में हस्तक्षेप नहीं करना उचित समझा।

केस टाइटल: सौधा मणि बनाम राज्य

केस नंबर: Crl RC No 1299 of 2022

साइटेशन: 2022 लाइवलॉ (Mad) 410


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