भगवान हनुमान पर टिप्पणी को लेकर देहली सीएम रेखा गुप्ता के खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता: पुलिस ने कोर्ट में बताया
Shahadat
15 Oct 2026 6:45 PM IST

दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि सरकारी कार्यक्रम के दौरान भगवान हनुमान का जिक्र करते हुए की गई कथित टिप्पणियों को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के खिलाफ कोई संज्ञेय अपराध (cognizable offence) नहीं बनता।
पुलिस ने कहा कि अगर पूरे भाषण को देखा जाए तो इसमें सरकारी कर्मचारियों के प्रति सराहना और देवता के प्रति सम्मान झलकता है।
पुलिस ने राउज एवेन्यू कोर्ट के एडिशनल चीफ ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट अश्वनी पंवार के समक्ष 'कार्रवाई रिपोर्ट' (Action Taken Report) दाखिल करते हुए यह बात कही।
पुलिस ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 - जो धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे से किए गए जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्यों से संबंधित है - के तहत जरूरी तत्व यहां मौजूद नहीं हैं।
यह रिपोर्ट राम निवास शर्मा की शिकायत पर दाखिल की गई। उन्होंने 23 सितंबर, 2025 को ISBT कश्मीरी गेट पर आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान रेखा गुप्ता द्वारा की गई कथित टिप्पणियों को लेकर FIR दर्ज करने की मांग की थी। यह कार्यक्रम दिल्ली से उत्तर प्रदेश के बड़ौत तक DTC बस सेवा शुरू होने के अवसर पर आयोजित किया गया।
शिकायतकर्ता के अनुसार, गुप्ता ने कहा कि सरकारी अधिकारी अपनी अस्थायी शक्तियों का इस्तेमाल तभी करते हैं जब उनकी "पूंछ में आग लग जाती है"। आरोप है कि उन्होंने इसकी तुलना भगवान हनुमान से की थी।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन टिप्पणियों से भक्तों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं, और उन्होंने BNS की धारा 299 के तहत कार्रवाई की मांग की।
इन आरोपों को खारिज करते हुए पुलिस ने कहा कि उन्होंने 'सूचना एवं प्रचार निदेशालय' (Directorate of Information and Publicity) से कार्यक्रम की आधिकारिक वीडियो रिकॉर्डिंग प्राप्त की, उसका ट्रांसक्रिप्ट तैयार किया और पूरे भाषण की जांच की।
रिपोर्ट में कहा गया कि अगर इन टिप्पणियों को पूरे भाषण के संदर्भ में देखा जाए तो ऐसा कहीं नहीं लगता कि गुप्ता भगवान हनुमान का मजाक उड़ा रही थीं, देवता का अपमान कर रही थीं, या उनका इरादा भक्तों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का था।
रिपोर्ट में कहा गया,
"पूरे भाषण का लहजा सराहना करने वाला और उत्साह बढ़ाने वाला है।"
इसमें आगे कहा गया कि मुख्यमंत्री ने दिल्ली सरकार के कर्मचारियों के काम, प्रतिबद्धता और प्रदर्शन की तारीफ की थी और उनके समर्पण तथा काम करने के जज्बे की तुलना भगवान हनुमान से की थी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि शिकायतकर्ता ने भाषण के कुछ हिस्सों को जानबूझकर हटा दिया, ताकि उसका संदर्भ बदल जाए और इन टिप्पणियों को एक अलग ही रंग दिया जा सके। इसमें शिकायतकर्ता की राजनीतिक संबद्धताओं का भी जिक्र किया गया और कहा गया कि ऐसा लगता है कि यह शिकायत राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है।
यह निष्कर्ष निकालते हुए कि उपलब्ध सामग्री से भगवान हनुमान, धर्म या धार्मिक मान्यताओं का अपमान करने या अपमान करने की कोशिश का पता नहीं चलता, पुलिस ने कहा कि कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता है और FIR दर्ज करने का कोई आधार नहीं है।
यह मामला ACJM के समक्ष रखा गया, जिन्होंने पुलिस की रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर ले लिया। चूंकि शिकायतकर्ता के वकील ने रिपोर्ट पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, इसलिए अदालत ने मामले की सुनवाई 29 अक्टूबर तक के लिए स्थगित की।

