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मंदिरों के पास गोमांस की बिक्री नहीं: असम सरकार ने राज्य विधानसभा में 'असम मवेशी संरक्षण विधेयक, 2021' पेश किया

LiveLaw News Network
13 July 2021 3:27 PM GMT
मंदिरों के पास गोमांस की बिक्री नहीं: असम सरकार ने राज्य विधानसभा में असम मवेशी संरक्षण विधेयक, 2021 पेश किया
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असम सरकार ने कल राज्य विधानसभा में असम मवेशी संरक्षण विधेयक, 2021 पेश किया, जिसमें "मवेशियों के वध, उपभोग और परिवहन को विनियमित करने" का प्रस्ताव किया गया है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा विधानसभा में बिल पेश में असम मवेशी संरक्षण अधिनियम, 1950 को निरस्त करने का प्रस्ताव किया गया है और संविधान के अनुच्छेद 48 को संदर्भित किया गया है।

प्रस्तावित कानून में वैध दस्तावेजों के बिना असम में, साथ ही राज्य से होकर मवेशियों के अंतरराज्यीय परिवहन पर भी प्रतिबंध लगाता है।

मवेशियों की परिभाषा में "सांड़, बैल, गाय, बछिया, बछड़ा, नर और मादा भैंस और भैंस के बछड़े शामिल हैं।"

विधेयक के कथन और उद्देश्य के अनुसार "... यह वर्षों से देखा गया है कि (असम मवेशी संरक्षण अधिनियम, 1950) में मवेशियों के वध, उपभोग और परिवहन संबंध‌ित मुद्दों के निस्तारण के लिए पर्याप्त कानूनी प्रावधानों का अभाव है।"

विधेयक की प्रमुख विशेषताएं

मवेशियों के परिवहन पर प्रतिबंध [धारा 7]

इस विशेष प्रावधान में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति वैध परमिट के बिना किसी भी मवेशी का परिवहन या परिवहन के लिए प्रस्ताव नहीं करेगा या परिवहन नहीं करवाएगा-

-असम से होकर अन्य राज्यों के किसी भी स्थान से असम राज्य के बाहर किसी भी स्थान तक;

-असम राज्य के भीतर किसी भी स्थान पर असम राज्य के बाहर किसी भी स्थान तक मवेशियों का वध कानून द्वारा विनियमित नहीं है।

मंदिरों के पास बीफ और बीफ उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध [धारा 8]

इसमें कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति गोमांस या गोमांस उत्पादों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष बिक्री या बिक्री का प्रस्ताव या बिक्री के लिए एक्सपोज़ नहीं करेगा या खरीदेगा नहीं, मुख्य रूप से हिंदू, जैन, सिख और अन्य गैर-गोमांसहारी समुदायों के इलाके में या इलाके से या किसी मंदिर, सत्र, या हिंदू धर्म से संबंधित अन्य धार्मिक संस्थानों के 5 किमी के दायरे से।

किसी हिरासत के प्रवेश करने, निरीक्षण करने, तलाशी लेने, जब्त करने की शक्ति [धारा 11]

यह प्रावधान किसी भी पुलिस अधिकारी या राज्य सरकार द्वारा अधिकृत किसी अन्य व्यक्ति को अपने अधिकार क्षेत्र में "किसी भी परिसर में प्रवेश करने और निरीक्षण करने" की शक्ति प्रदान करता है यदि उनके पास "यह मानने का कारण है कि उक्त अधिनियम / विधेयक के तहत अपराध किया गया है या होने की संभावना है।"

दंड [धारा 13]

विधेयक के प्रावधान का उल्लंघन करने ‌‌का दोषी पाए जाने पर किसी भी व्यक्ति को न्यूनतम तीन साल (जिसे आठ साल तक बढ़ाया जा सकता है) और 3 लाख रुपये का जुर्माना (ऊपरी सीमा 5 लाख रुपये के साथ) की सजा या दोनों का प्रस्ताव है। बार-बार अपराध करने वालों के लिए सजा दोगुनी हो जाएगी।

विधेयक सभी अपरधों को संज्ञेय और गैर-जमानती बनाता है [धारा 14]

फरार अपराधियों के फोटो आदि का प्रकाशन [धारा 15]

इस धारा में प्रावधान है कि यदि कोई अधिकारी, जो एसपी के पद से नीचे का न हो, के पास यह मानने का कारण है कि इस विधेयक के तहत किसी व्यक्ति द्वारा अपराध किया गया है और जिसके खिलाफ वारंट जारी किया गया है, वह ऐसी गिरफ्तारी से फरार है, तब ऐसे व्यक्ति की तस्वीरों को इलाके के प्रमुख स्थानों पर प्रकाशित किया जाएगा।

विधेयक की धारा 20 राज्य सरकार को किसी स्थानीय प्राधिकरण या सोसायटी मान्यता अधिनियम, 1960, या किसी केंद्रीय अधिनियम या किसी संघ या संगठन के तहत पंजीकृत सोसायटी को ऐसे स्थानों पर गौशालाओं सहित एक संस्था स्थापित करने के लिए निर्देशित करने की स्वतंत्रता देती है।

बिल डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें

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