बुराड़ी में खराब सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर वकील की अर्ज़ी पर NGT ने दिल्ली सरकार से जवाब मांगा

  • बुराड़ी में खराब सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर वकील की अर्ज़ी पर NGT ने दिल्ली सरकार से जवाब मांगा

    नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की प्रिंसिपल बेंच ने दिल्ली के बुराड़ी में रहने वाले वकील की अर्ज़ी पर नोटिस जारी किया। इस अर्ज़ी में इलाके के सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर में "लगातार और गंभीर पर्यावरणीय नुकसान" को ठीक करने के लिए तुरंत निर्देश देने की मांग की गई।

    चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर डॉ. अफ़रोज़ अहमद की बेंच ने निर्देश दिया:

    "प्रतिवादियों (Respondents) को नोटिस जारी करें। आवेदक को निर्देश दिया जाता है कि वह प्रतिवादियों को नोटिस पहुंचाए और अगली सुनवाई की तारीख से कम-से-कम एक हफ़्ते पहले सर्विस का हलफनामा (Affidavit of Service) दाखिल करे। मामले को 25.11.2026 को सूचीबद्ध (list) करें।"

    अर्ज़ी में कहा गया कि यह इंफ्रास्ट्रक्चर लगभग दो लाख लोगों की आबादी के काम आता है और "बहुत बुरी हालत" में है। इसमें कहा गया कि कई सड़कें सिर्फ़ ढीली बजरी और खुली लाल मिट्टी से ढकी हुई हैं, जबकि दूसरी सड़कों पर खुले गड्ढे, अधूरे खुदाई के काम और मरम्मत न की गई सतहें हैं।

    अर्ज़ी के अनुसार, नथुपुरा को आउटर रिंग रोड से जोड़ने वाला एक मुख्य रास्ता - जिसमें नालंदा स्कूल और बुराड़ी सरकारी अस्पताल के पास का हिस्सा भी शामिल है - सीवर और पाइपलाइन के काम के लिए बार-बार खोदा गया। यह खुदाई 2022 में शुरू हुई, लेकिन उसके बाद सड़कों को ठीक से ठीक नहीं किया गया। इसमें दावा किया गया कि सड़कों के बड़े हिस्से "टूटे हुए असुरक्षित और नियमित इस्तेमाल के लायक नहीं" हैं।

    अर्ज़ी में यह भी कहा गया कि दिल्ली जल बोर्ड की सिफारिश के बाद इलाके में फिर से खुदाई की गई, लेकिन काम "बहुत धीमी, टुकड़ों में और बिना किसी तालमेल के" चल रहा है।

    अर्ज़ी में यह भी दावा किया गया कि सड़कों की हालत के कारण हवा की गुणवत्ता खराब हो रही है। इसमें दावा किया गया कि गाड़ियों की आवाजाही के कारण ढीली मिट्टी, गाद (silt) और निर्माण का मलबा बार-बार हवा में उड़ता है, जिससे "धूल के गुबार दिखते हैं और स्थानीय स्तर पर पार्टिकुलेट कंसंट्रेशन (PM₁₀ और PM₂.₅) काफी बढ़ जाता है"।

    इसमें आगे आरोप लगाया गया कि हालांकि नगर निगम अधिकारी धूल को नियंत्रित करने के उपाय जैसे पानी का छिड़काव करते हैं, लेकिन ये उपाय अनियमित और बेअसर हैं। इसमें दावा किया गया कि गर्मियों में तेज़ी से पानी के सूखने के कारण पानी का छिड़काव बहुत कम समय के लिए असरदार रहता है। इसके अलावा, सड़कों की सफाई के तरीकों से धूल हटती नहीं है, बल्कि एक जगह से दूसरी जगह फैल जाती है।

    इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च की रिपोर्ट के आधार पर अर्ज़ी में कहा गया कि वायु प्रदूषण मौत और बीमारी का एक बड़ा कारण है; हर 8 में से 1 मौत वायु प्रदूषण की वजह से होती है। इसके अलावा, नेशनल एटमॉस्फेरिक रिसर्च लैबोरेटरी की 2019 की गाड़ियों से होने वाले हाई-रिज़ॉल्यूशन PM10 उत्सर्जन पर एक स्टडी के अनुसार, नॉन-एग्जॉस्ट सोर्स (यानी गाड़ी के साइलेंसर से निकलने वाले धुएं के अलावा अन्य स्रोत), खासकर सड़क की धूल का दोबारा हवा में उड़ना, सड़क पर होने वाले PM उत्सर्जन का 86% हिस्सा है।

    अर्ज़ी में यह भी आरोप लगाया गया कि लागू नियमों के बावजूद, इलाके में मशीनीकृत सड़क-सफाई और धूल के वैज्ञानिक निपटान की कोई व्यवस्था नहीं है।

    अर्ज़ी में कहा गया:

    "वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 07.01.2025 के अपने कानूनी सर्कुलर में स्पष्ट रूप से माना कि सड़क की धूल दिल्ली-एनसीआर में पार्टिकुलेट प्रदूषण (कणों से होने वाले प्रदूषण) का एक बड़ा कारण है। सोर्स अपोर्शनमेंट स्टडीज़ से पता चलता है कि PM₁₀ की मात्रा में इसका योगदान 58% तक है। आयोग ने मशीनीकृत सफाई, बिना पक्की सड़कों को पक्का करना, पानी का छिड़काव, गड्ढों की मरम्मत और सड़क के किनारों पर हरियाली लगाने जैसे व्यापक उपायों को अनिवार्य किया।"

    अर्ज़ी में खराब जल निकासी और सीवेज ओवरफ्लो की समस्या पर भी चिंता जताई गई, जिसमें कहा गया कि मॉनसून के दौरान इससे निवासियों के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य का अतिरिक्त खतरा पैदा होता है। इसलिए अर्ज़ी में सड़क के किनारे की जल निकासी व्यवस्था के उचित रखरखाव और सीवेज को सड़कों और रिहायशी गलियों में बहने से रोकने के लिए तत्काल सुधारात्मक उपाय करने के निर्देश देने की मांग की गई।

    अर्ज़ी में प्रभावित इलाकों में सप्लाई किए जाने वाले पीने के पानी की जांच और सुधारात्मक उपाय करने की भी मांग की गई। साथ ही PWD और MCD को सड़क की मरम्मत और बहाली (Road Reinstatement) के लिए एक व्यापक और समय-सीमा वाली योजना तैयार करने और उसे लागू करने का निर्देश देने की भी मांग की गई।

    इस मामले की सुनवाई 25 नवंबर को होनी है।

    Case Title: Nandana Harikrishnan v Government of NCT of Delhi

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