2026 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत में 2.84 करोड़ मामलों का निपटारा, ₹10,920 करोड़ से अधिक की राशि का समझौता

Praveen Mishra

14 March 2026 8:47 PM IST

  • 2026 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत में 2.84 करोड़ मामलों का निपटारा, ₹10,920 करोड़ से अधिक की राशि का समझौता

    नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (NALSA) की पहल के तहत 14 मार्च 2026 को आयोजित वर्ष 2026 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत सफलतापूर्वक संपन्न हुई, जिसमें देशभर में 2,84,14,329 मामलों का निपटारा किया गया। इन मामलों में 2,57,82,254 प्री-लिटिगेशन (पूर्व मुकदमेबाजी) मामले तथा 26,32,075 लंबित मामले शामिल थे। इन समझौतों के परिणामस्वरूप कुल ₹10,920.47 करोड़ की राशि का निस्तारण हुआ।

    यह राष्ट्रीय लोक अदालत भारत के मुख्य न्यायाधीश और नालसा के संरक्षक-प्रमुख जस्टिस सूर्यकांत तथा सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश और नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस विक्रम नाथ के मार्गदर्शन में आयोजित की गई। देश के 26 राज्यों और 8 केंद्रशासित प्रदेशों में उच्च न्यायालयों, जिला न्यायालयों, ट्रिब्यूनलों, उपभोक्ता मंचों और स्थायी लोक अदालतों में गठित हजारों पीठों के माध्यम से इसका आयोजन किया गया।

    लोक अदालत में दीवानी और आपराधिक शमनीय मामलों की व्यापक श्रेणी को शामिल किया गया। इनमें बैंक वसूली, चेक अनादर, सेवा एवं पेंशन विवाद, मोटर दुर्घटना मुआवजा दावे, यातायात चालान, वैवाहिक विवाद (तलाक को छोड़कर), श्रम विवाद, उपभोक्ता विवाद, भूमि अधिग्रहण विवाद, बिजली-पानी-टेलीफोन बिल से जुड़े मामले और अन्य दीवानी विवाद शामिल थे।

    नालसा के अनुसार, लोक अदालत विवाद समाधान का एक प्रभावी वैकल्पिक मंच है, जहां पक्षकार आपसी सहमति से अपने मामलों का त्वरित और कम खर्च में समाधान प्राप्त कर सकते हैं। लोक अदालतों के फैसले अंतिम और बाध्यकारी होते हैं तथा इसमें अदालती फीस की पूरी वापसी भी शामिल होती है।

    नालसा ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य न्याय तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना और अदालतों में लंबित मामलों का बोझ कम करना है, ताकि प्रत्येक नागरिक को त्वरित और सुलभ न्याय मिल सके।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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