Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य सुर्खियां

मुस्लिम पुरुष तलाक दिए बिना एक बार में एक से ज्यादा शादी कर सकता है, लेकिन एक मुस्लिम महिला पर यह लागू नहीं होता: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट

LiveLaw News Network
10 Feb 2021 5:25 AM GMT
मुस्लिम पुरुष तलाक दिए बिना एक बार में एक से ज्यादा शादी कर सकता है, लेकिन एक मुस्लिम महिला पर यह लागू नहीं होता: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
x

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक मुस्लिम दंपति द्वारा दायर एक संरक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए हाल ही में देखा कि "एक मुस्लिम पुरुष अपनी पूर्व पत्नी को तलाक दिए बिना एक से अधिक शादी कर सकत है, लेकिन एक मुस्लिम महिला पर यह लागू नहीं होती है।"

न्यायमूर्ति अलका सरीन की खंडपीठ ने उल्लेख किया कि याचिकाकर्ता नंबर 1, मुस्लिम महिला (जो पहले शादी कर चुकी है) ने याचिकाकर्ता नंबर 2, मुस्लिम पुरुष से शादी करने से पहले अपने पहले पति से कानूनी रूप से वैध तलाक नहीं लिया था।

दूसरे शब्दों में इस मामले में याचिकाकर्ता नंबर 1 (मुस्लिम महिला) और याचिकाकर्ता नंबर 2 (मुस्लिम पुरुष) ने याचिकाकर्ता नंबर 1 (मुस्लिम महिला) के कानूनी रूप से वैध तलाक के बिना एक दूसरे से शादी कर ली।

युगल ने अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया कि वे कई सालों से एक-दूसरे के साथ प्यार में हैं और 19 जनवरी 2021 को उन्होंने निकाहनामा के अनुसार निकाह किया, हालांकि, महिला के रिश्तेदार इस रिश्ते के खिलाफ हैं।

याचिकाकर्ताओं की वैवाहिक स्थिति के अनुसार, सवाल यह रखा गया कि क्या मुस्लिम होने के नाते याचिकाकर्ता दोनों एक-दूसरे विवाह का अनुबंध कर सकते हैं?

[नोट: मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत या मुस्लिम मैरिज एक्ट, 1939 के प्रावधानों के तहत किसी मुस्लिम महिला को दूसरी शादी करने से पहले अपने पहले पति से तलाक लेना आवश्यक है।]

इसके अलावा, यह स्पष्ट नहीं है कि इस महिला ने अपने पहले पति से मुस्लिम पर्सनल लॉ के प्रावधानों के तहत या मुस्लिम मैरिज एक्ट 1939 के प्रावधान के तहत तलाक लिया है या नही।

कोर्ट ने विशेष तौर पर कहा,

"यह भी स्पष्ट नहीं है कि कानून की नजर में उसकी पहली शादी ख़त्म हो गयी है। इस प्रकार, महिला की पहली शादी कानून की निगाह में अब भी कायम है।"

इस पृष्ठभूमि में, न्यायालय ने देखा,

"वास्तव में, याचिकाकर्ता नंबर 1 और याचिकाकर्ता नंबर 2 के बीच कथित विवाह अवैध रूप से गलत होगा, क्योंकि इस शादी को याचिकाकर्ता नंबर 1 के बिना कानूनी रूप से तलाक दिए हुए अनुबंधित किया गया है।"

अंत में, यह कहते हुए कि याचिकाकर्ता नंबर 1 के पहले विवाह में तालक हुए बिना वर्तमान याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।

अदालत ने कहा,

"याचिकाकर्ताओं ने अपने जीवन की सुरक्षा और एक दंपति के रूप में जीवन जीने की स्वतंत्रता के लिए इस न्यायालय से संपर्क किया है, जिसे वर्तमान मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में नहीं माना जा सकता है।"

हालांकि, याचिकाकर्ताओं को व्यक्तियों के रूप में उनके जीवन और स्वतंत्रता के लिए खतरों के बारे में उनकी आशंकाओं के निवारण के लिए संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से संपर्क करने की स्वतंत्रता दी गई है।

केस का शीर्षक - नहिदा और अन्य बनाम हरियाणा राज्य और अन्य। [2021 का CRWP No.764 (O & M)]

ऑर्डर डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें




Next Story