'नागज़िला' फ़िल्म निर्माण के दौरान 3.92 करोड़ रुपये का गबन: कोर्ट ने 3 आरोपियों की अग्रिम ज़मानत याचिका की खारिज

  • नागज़िला फ़िल्म निर्माण के दौरान 3.92 करोड़ रुपये का गबन: कोर्ट ने 3 आरोपियों की अग्रिम ज़मानत याचिका की खारिज

    मुंबई सेशंस कोर्ट ने बुधवार (28 अक्टूबर) को उन तीन लोगों की अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज की, जिन पर आने वाली बॉलीवुड फिल्म 'नागज़िला' के निर्माण के दौरान 3.92 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता करने का आरोप है।

    एडिशनल सेशंस जज एम. मोहिउद्दीन एम.ए. ने शिवकुमार तिवारी, कुलदीप सिंह चंपावत और महिपाल करण राठौड़ की अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज की। इन्हें करण जौहर के 'धर्मा प्रोडक्शंस' और महावीर व नीतू जैन के 'महावीर जैन फिल्म्स' द्वारा क्रमशः लाइन प्रोड्यूसर, कंसल्टेंट और एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर के तौर पर काम पर रखा गया।

    पश्चिमी उपनगर के डी.एन. नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR के अनुसार, महिपाल, कुलदीप और शिवकुमार ने एक अन्य आरोपी सोमित गोपे (जिसे शिकायतकर्ता 'महावीर जैन फिल्म्स' ने अकाउंटेंट नियुक्त किया) के साथ मिलकर साजिश रची और बिना कोई बिल या वाउचर दिए 3.92 करोड़ रुपये से ज़्यादा की रकम खर्च की।

    FIR में बताया गया कि एक्टर कार्तिक आर्यन अभिनीत यह फिल्म, जो अगले साल फरवरी में रिलीज़ होने वाली है, 82.50 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई।

    शिकायतकर्ता जैन दंपति ने इन सभी आरोपियों को वाहनों और जूनियर कलाकारों की व्यवस्था करने तथा वित्तीय प्रबंधन देखने के लिए काम पर रखा था। इनमें से आरोपी चंपावत को 'साइनिंग अथॉरिटी' (हस्ताक्षर करने का अधिकार) के तौर पर नियुक्त किया गया था, जिसकी ज़िम्मेदारी अन्य लोगों के काम को नियंत्रित और प्रबंधित करना था।

    अदालत ने कहा,

    "मौजूदा आवेदकों के खिलाफ आरोप यह है कि सभी आरोपियों ने अपने साझा इरादे के तहत बिना कोई बिल या वाउचर जमा किए 3,92,76,308 रुपये की राशि का इस्तेमाल किया। आरोप है कि 3,92,76,308 रुपये के इस लेन-देन का कोई हिसाब-किताब नहीं है। यह भी आरोप है कि आरोपियों ने वेंडरों को काम देने और उनके बिल पास करने के बदले कमीशन या मोबाइल हैंडसेट की मांग की थी। साथ ही यह आरोप भी है कि आरोपियों ने अपने साझा इरादे को पूरा करने के लिए फर्जी बिल तैयार किए।"

    FIR में लगाए गए सभी आरोपों पर विचार करते हुए जजों ने माना कि इस अपराध में बहुत बड़ी रकम शामिल है, इसलिए इसकी विस्तृत और उचित जांच की जानी चाहिए।

    जज ने कहा,

    "प्रथम दृष्टया ऐसे सबूत मौजूद हैं, जो बताते हैं कि मौजूदा आवेदक इस अपराध में शामिल थे। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि वे अभियोजन पक्ष के सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं। इसलिए मौजूदा आवेदक जमानत पाने के हकदार नहीं हैं।"

    इन टिप्पणियों के साथ अदालत ने अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की अर्जियों को खारिज किया।

    Case Title : Kuldeep Singh Champawat vs State of Maharashtra

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