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"यह अनुच्छेद 20 के तहत प्राप्त संवैधानिक सुरक्षा में असंगति पैदा कर सकता है": त्रिपुरा हाईकोर्ट ने केंद्र को बिना किसी देरी के एनडीपीएस एक्ट की धारा 27A में संशोधन करने का निर्देश दिया

LiveLaw News Network
10 Jun 2021 10:57 AM GMT
यह अनुच्छेद 20 के तहत प्राप्त संवैधानिक सुरक्षा में असंगति पैदा कर सकता है: त्रिपुरा हाईकोर्ट ने केंद्र को बिना किसी देरी के एनडीपीएस एक्ट की धारा 27A में संशोधन करने का निर्देश दिया
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त्रिपुरा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय को बिना किसी देरी के नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (NDPS Act), 1985 की धारा 27A में संशोधन के लिए उचित कदम उठाने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने देखा कि एनडीपीएस एक्ट की धारा 27A के तहत धारा 2(viiiib)(i-v) को प्रतिस्थापित करने के लिए कोई संशोधन नहीं किया गया है।

न्यायमूर्ति एस तालापात्रा और न्यायमूर्ति एसजी चट्टोपाध्याय की खंडपीठ ने कहा कि,

"हम मानते हैं कि जब तक एनडीपीएस एक्ट की धारा 27 A में उचित रूप से संशोधन करके उचित विधायी परिवर्तन नहीं किया जाता है, तब तक एनडीपीएस एक्ट की धारा 2 के उप-खंड (i) से (v) को हटाने का प्रभाव पड़ेगा और एनडीपीएस एक्ट की धारा 2 के खंड viii-b के उप-खंड iv को उस स्थान पर लाना होगा। हमें चिंता है कि यह प्रभाव भारतीय संविधान के अनुच्छेद -20 के तहत प्रदान किए गए संवैधानिक सुरक्षा में असंगति पैदा कर सकता है।

पीठ विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस अधिनियम), पश्चिम त्रिपुरा, अगरतला द्वारा इस सवाल पर दिए गए एक संदर्भ का जवाब दे रही थी कि क्या एनडीपीएस एक्ट की धारा 2 के खंड (viiia) के प्रावधान को एक्ट की धारा 27-A के रूप में पढ़ने की आवश्यकता है या क्या धारा 2 के वर्तमान खंड (viiiib) को खंड (viiia) के स्थान पर धारा 27-A में पढ़ने की आवश्यकता है?"

एनडीपीएस एक्ट की धारा 27A में ड्रग्स की तस्करी करनेवालों और अपराधियों को शरण देने वालों के लिए दंड का प्रावधान है।

कोर्ट ने प्रावधान पढ़ते हुए कहा कि,

"जो कोई भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से एनडीपीएस एक्ट की धारा 2 के खंड (viiia) के उप-खंड (i) से (v) में निर्दिष्ट किसी भी वित्तीय गतिविधि में शामिल है। इसमें अपराधी को कम से कम 10 साल और अधिक से अधिक 20 साल तक की सजा हो सकती है। वहीं एक लाख से दो लाख तक जुर्माना भी लगाया जा सकता है। बशर्ते कि अदालत निर्णय में दर्ज किए जाने वाले कारणों के लिए दो लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाएं।"

एनडीपीएस एक्ट की धारा 2(viiia) को संशोधित किया गया और खंड (viiiib) में स्थानांतरित किया गया जो 1 मार्च 2014 से प्रभावी हुआ। पुन: लिखे गए प्रावधान के अनुसार नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस के संबंध में अवैध गतिवधि का अर्थ परिभाषित किया गया, जिसमें अवैध गतिविधियों की एक सूची प्रदान की गई।

कोर्ट ने कहा कि अधिनियम की धारा 27 A में कोई संशोधन नहीं किया गया है, जिसमें गतिविधियां धारा 2(viiia) (i-v) के अधीन हैं। नतीजतन, धारा 27A अपनी स्पष्टता खोकर निष्क्रिय प्रावधान बन गया।

कोर्ट ने इस विषय पर पक्षकारों द्वारा किए गए प्रस्तुतीकरण और प्रासंगिक निर्णयों का विश्लेषण करते हुए कहा कि,

"हमने पूरे क़ानून को पढ़ने के बाद इस दृष्टिकोण को अपनाया है। हमने केवल हटाने और संयोजन का प्रभाव दिया है। साथ ही हम यह देखने के लिए विवश हैं कि केंद्र सरकार एनडीपीएस एक्ट के गलती को हटाने और एनडीपीएस अधिनियम की धारा -2 के खंड (viiib) के उप-खंड i से v द्वारा प्रतिस्थापन के उद्देश्य से किए गए संशोधन अधिनियम को पेश करने में विफल रही है। इस परिस्थिति में केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय को बिना किसी देरी के नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (NDPS Act), 1985 की धारा 27A में संशोधन के लिए उचित कदम उठाने का निर्देश दिया जाता है।"

कोर्ट ने आगे कहा कि,

"केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों इस आदेश की चीजों के बारे में संक्षेप में सार्वजनिक सूचना के लिए एक अधिसूचना प्रकाशित करेंगे ताकि लोगों को यह पता चले कि भारत के संविधान के अनुच्छेद -20 का महत्व कम नहीं हुआ है। ऐसी अधिसूचना आज से एक महीने के भीतर की जारी की जाएं।"

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि पूर्वोक्त आदेश की एक प्रति विशेष न्यायाधीश पश्चिम त्रिपुरा, अगरतला की अदालत (एनडीपीएस अधिनियम के तहत) को भेजी जाए और त्रिपुरा राज्य में सभी विशेष अदालतों (एनडीपीएस अधिनियम के तहत) को सर्कुलेट की जाए।

शीर्षक: त्रिपुरा उच्च न्यायालय, अगरतला (स्वत: प्रस्ताव) बनाम गृह मंत्रालय, भारत संघ

आदेश की कॉपी यहां पढ़ें:



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