Top
Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य सुर्खियां

20 साल के लड़के का विवाहः पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पुलिस आयुक्त से कहा-मामले की जांच करें, पुजारी की भूमिका की जांच के निर्देश

LiveLaw News Network
14 Oct 2021 9:53 AM GMT
20 साल के लड़के का विवाहः पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पुलिस आयुक्त से कहा-मामले की जांच करें, पुजारी की भूमिका की जांच के निर्देश
x

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह पुलिस आयुक्त, पंचकुला को एक ऐसे मामले की जांच करने का निर्देश दिया, जो एक 20 साल के लड़के के विवाह से जुड़ा है, जिसने अपनी 19 साल की कथित पत्नी के साथ एक संरक्षण याचिका दायर की थी।

जस्टिस गुरविंदर सिंह गिल की खंडपीठ ने कहा कि हालांकि लड़की की उम्र 19 साल है, जो व‌िवाह की उम्र है, लेकिन लड़के की उम्र 20 साल है, जिसे 21 साल से कम होने के कारण विवाह की उम्र नहीं कहा जा सकता है।

पीठ ने पुलिस आयुक्त, पंचकूला को दिए निर्देश में कहा, " ... मामले की जांच विशेष रूप से याचिकाकर्ताओं के विवाह के संबंध में करें, इस तथ्य के बावजूद कि याचिकाकर्ता संख्या दो-विजय विवाह योग्य उम्र का नहीं था, जो वास्तव में बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के खिलाफ है और उस पुजारी की भूमिका की भी जांच करें, जिसने विवाह को करवाया है।"

कोर्ट ने पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि यह पाए जाने पर कि विवाह में किसी प्रावधान का उल्लंघन किया गया है तो आवश्यक कार्यवाई की जाए। सुनवाई के दौरान लड़के ने कोर्ट में दावा किया था कि उसने पिंजौर के कौशलिया नदी पुल के पास 'प्राचीन शिव मंदिर' में एक 19 वर्षीय लड़की के साथ विवाह किया था।

अपनी याचिका में उसने आगे दावा किया कि प्रतिवादी संख्या 4 से 6 तक उसे नुकसान पहुंचाने की धमकी दे रहे हैं। इसे देखते हुए, अदालत ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, गुरदासपुर को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ताओं के कथित खतरे की धारणा की जांच करें और यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं कि उन्हें किसी भी तरह से नुकसान न पहुंचे।

संबंधित समाचार में, हाल ही में, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक संरक्षण याचिका पर सुनवाई के दौरान एक जोड़े पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि वे विवाहित हैं क्योंकि उन्होंने एक दूसरे को मालाएं पहनाई थी और एक होटल के कमरे में बर्तन में आग लगाकर "सप्तपदी" ( सात फेरे ) की थी।

यह देखते हुए कि यह 'वैध विवाह' नहीं था और याचिकाकर्ताओं ने अदालत को गुमराह करने की कोशिश की थी, जस्टिस गुरविंदर सिंह गिल की खंडपीठ ने पुलिस आयुक्त, पंचकुला को मामले को देखने का निर्देश दिया था।

केस शीर्षक - नेहा और अन्य बनाम पंजाब राज्य और अन्य

ऑर्डर डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें

Next Story