'बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है, हमें न्याय नहीं मिल रहा' : SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी की दलीलें
Praveen Mishra
4 Feb 2026 3:14 PM IST

आज सुप्रीम कोर्ट में नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला, जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision–SIR) को चुनौती देने वाली अपनी रिट याचिका में स्वयं अदालत के समक्ष मौखिक दलीलें रखीं। यह पहली बार है जब किसी कार्यरत मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुतियाँ दीं।
हालाँकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री की ओर से सीनियर एडवोकेट श्याम दिवान ने मुख्य रूप से कानूनी दलीलें रखीं और चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ को संबोधित किया, लेकिन ममता बनर्जी ने भी संक्षेप में अपनी बात रखी।
ममता बनर्जी ने कहा कि SIR की प्रक्रिया “शामिल करने के लिए नहीं, बल्कि नाम हटाने के लिए” की जा रही है। उन्होंने कहा कि शादी के बाद पति का उपनाम अपनाने वाली महिलाएँ, जो ससुराल चली जाती हैं, नामों में असंगति बताकर मतदाता सूची से हटाई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि उन्हें न्याय मिलने में देरी हो रही है।
“समस्या यह है कि हमारे वकील तो केस लड़ते हैं और हम शुरू से संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन जब सब कुछ खत्म हो जाता है, जब हमें न्याय नहीं मिलता, जब न्याय दरवाज़े के पीछे रो रहा होता है—तब हमने सोचा कि कहीं भी न्याय नहीं मिल रहा। मैंने चुनाव आयोग को सभी विवरणों के साथ पत्र लिखे, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। मैं एक बंधुआ मज़दूर जैसी स्थिति में हूँ। मैं कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति नहीं हूँ, एक सामान्य परिवार से आती हूँ, और मैं अपनी पार्टी के लिए नहीं लड़ रही हूँ,” उन्होंने कहा।
इस पर चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि पश्चिम बंगाल में SIR से संबंधित कई याचिकाएँ दायर की गई हैं, जिनमें अदालत ने कई वरिष्ठ वकीलों की दलीलें विस्तार से सुनी हैं। उन्होंने बताया कि 19 जनवरी को वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल द्वारा मुद्दे उठाए जाने के बाद अदालत ने लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी (LD) सूची के पारदर्शी सत्यापन के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट के आधार कार्ड स्वीकार करने के निर्देशों का पालन नहीं कर रहा है, जबकि अन्य राज्यों में आधार स्वीकार किया जा रहा है। इस पर CJI ने कहा कि आधार कार्ड की अपनी सीमाएँ हैं और चूँकि SIR की वैधता पर निर्णय सुरक्षित है, इसलिए वे इस मुद्दे पर अधिक टिप्पणी नहीं कर सकते।
इसके बाद ममता बनर्जी ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया राज्य चुनावों से पहले केवल पश्चिम बंगाल को निशाना बनाने के लिए की जा रही है।
“सिर्फ बंगाल को चुनाव से ठीक पहले निशाना बनाया गया है। 24 साल बाद अचानक दो महीने में ऐसा काम करने की क्या जल्दी थी, जो दो साल लेता? त्योहारों और फसल के मौसम में लोगों को नोटिस देकर परेशान किया जा रहा है। 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। BLO पत्र लिखते-लिखते मर गए, कई अस्पताल में भर्ती हैं। बंगाल को टार्गेट किया जा रहा है। फिर असम क्यों नहीं? नॉर्थ ईस्ट क्यों नहीं?” उन्होंने कहा।
उन्होंने आरोप लगाया कि BJP से जुड़े 8,000 'माइक्रो ऑब्ज़र्वर' नियुक्त किए गए हैं, जो BLO के अधिकारों को दरकिनार कर नाम हटवा रहे हैं।
“58 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं। जीवित लोगों को मृत घोषित किया जा रहा है। केवल बंगाल में माइक्रो ऑब्ज़र्वर नियुक्त किए गए हैं। वे बंगाल के लोगों को कुचलना चाहते हैं,” उन्होंने कहा।
उन्होंने चुनाव आयोग पर अनौपचारिक निर्देश व्हाट्सएप के जरिए देने का आरोप लगाते हुए उसे “व्हाट्सएप आयोग” कहा। इस पर CJI ने कहा कि अदालत यह निर्देश देगी कि सभी आदेश केवल BLO द्वारा अधिकृत हों।
चुनाव आयोग की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पर्याप्त ग्रुप-बी अधिकारी उपलब्ध न कराए जाने के कारण माइक्रो ऑब्ज़र्वर नियुक्त करने पड़े। उन्होंने कहा कि ये नियुक्तियाँ RP एक्ट के तहत वैध हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता दमा शेषाद्री नायडू ने भी राज्य सरकार के असहयोग का आरोप दोहराया।
सुनवाई के अंत में, खंडपीठ ने ममता बनर्जी की याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया और अगले सोमवार तक जवाब माँगा। माइक्रो ऑब्ज़र्वरों के मुद्दे पर अदालत ने कहा कि यदि राज्य सरकार SIR कार्य के लिए ग्रुप-बी अधिकारियों की सूची उपलब्ध कराती है, तो माइक्रो ऑब्ज़र्वरों को हटाया जा सकता है।
CJI ने ECI के वकील को निर्देश दिया कि नाम की वर्तनी में मामूली अंतर के मामलों में सुनवाई नोटिस जारी न किए जाएँ।
“अधिकारियों को संवेदनशील होना चाहिए,” CJI ने कहा।
इस बीच सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्य में चुनाव आयोग के अधिकारियों के खिलाफ “शत्रुतापूर्ण माहौल” है और उन्होंने Sanatan Sangsad द्वारा दायर एक PIL को भी इस मामले के साथ सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया, जिसे पीठ ने स्वीकार कर लिया।
ममता बनर्जी की याचिका में मांगी गई प्रमुख राहतें
ममता बनर्जी ने अपनी याचिका में, अन्य बातों के साथ, निम्नलिखित राहतें मांगी हैं:
24 जून 2025 और 27 अक्टूबर 2025 की SIR अधिसूचनाओं को रद्द किया जाए।
2026 के विधानसभा चुनाव 2025 की मौजूदा मतदाता सूची के आधार पर कराए जाएँ।
केवल नाम/वर्तनी के अंतर वाले मामलों को LD श्रेणी में सुनवाई से बाहर रखा जाए।
'अनमैप्ड' और LD मामलों की सूची ऑनलाइन प्रकाशित की जाए।
ऐसे मामलों में जारी सभी नोटिस वापस लिए जाएँ।
LD श्रेणी के किसी भी वैध मतदाता का नाम न हटाया जाए।
LD मामलों में आधार कार्ड को पहचान के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाए।
सभी Form-7 आवेदनों को ऑनलाइन प्रदर्शित किया जाए और सामूहिक Form-7 पर रोक लगे।
अंतर-राज्य दस्तावेज़ों के लंबित सत्यापन को स्थानीय स्तर पर निपटाने की अनुमति दी जाए।
पश्चिम बंगाल से सभी माइक्रो ऑब्ज़र्वर हटाए जाएँ, या वैकल्पिक रूप से उनके अधिकार सीमित किए जाएँ।
मामले की आगे की सुनवाई अगली तिथि पर होगी।

