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मद्रास हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों को चेताया, अगर आगामी शैक्षणिक वर्ष के लिए पूरी फीस लेने पर जोर दिया तो अवमानना के लिए तैयार रहें

LiveLaw News Network
1 Aug 2020 3:45 AM GMT
मद्रास हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों को चेताया, अगर आगामी शैक्षणिक वर्ष के लिए पूरी फीस लेने पर जोर दिया तो अवमानना के लिए तैयार रहें

मद्रास हाईकोर्ट ने अपने 17 जुलाई, 2020 के आदेश के उल्लंघन को ''गंभीरता'' से लेते हुए निजी स्कूलों को चेताया है कि अगर उनके आदेश का पालन नहीं किया गया तो वह अवमानना की कार्रवाई के लिए तैयार रहें। कोर्ट ने यह आदेश गैर सहायता प्राप्त स्कूलों द्वारा ट्यूशन फीस लेने के संबंध में दिया था।

न्यायमूर्ति एन आनंद वेंकटेश की पीठ ने कहा है कि

''यदि इस कोर्ट को पता चला कि आदेश का उल्लंघन किया जा रहा है तो यह कोर्ट स्कूल के प्रभारी व्यक्तियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने में कोई संकोच नहीं करेगी।''

इसी के साथ पीठ ने कहा है कि उनके पिछले आदेश को सख्ती से लागू किया जाए। जिसके तहत स्कूलों को आगामी शैक्षणिक वर्ष के लिए केवल 40 प्रतिशत ट्यूशन फीस 'अग्रिम शुल्क' के रूप में लेने की अनुमति दी थी।

सभी हितधारकों के हितों को संतुलित करने के लिए इस साल की शुरुआत में न्यायमूर्ति वेंकटेश ने आदेश दिया था कि

''गैर सहायता प्राप्त निजी संस्थान शैक्षणिक वर्ष 2019-2020 के दौरान एकत्र की गई ट्यूशन फीस के आधार पर 40 प्रतिशत ट्यूशन फीस अग्रिम शुल्क के तौर पर ले सकते हैं। इस अग्रिम शुल्क का भुगतान छात्रों द्वारा 31 अगस्त 2020 को या उससे पहले कर दिया जाएगा।''

हालांकि, टीएन नर्सरी प्राइमरी मैट्रिकुलेशन हायर सेकेंडरी स्कूल एसोसिएशन ने एक याचिका दायर कर इस आदेश से राहत दिए जाने की मांग की थी। इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान पीठ को सूचित किया गया था कि शैक्षिक संस्थान पूरी फीस के भुगतान पर जोर दे रहे हैं और माता-पिता डर के मारे कोई भी लिखित शिकायत देने से कतरा रहे हैं।

आदेश के उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने शिक्षा विभाग से एक रिपोर्ट मांगी है। शिक्षा विभाग से उन स्कूलों का विवरण मांगा गया है,जो हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं।

आदेश में कहा गया है कि ''मौखिक शिकायत के आधार पर शिक्षा विभाग तत्काल जांच करें और यदि यह पाया जाता है कि कोई संस्थान इस न्यायालय द्वारा पारित अंतरिम आदेशों का उल्लंघन करते हुए फीस जमा कर रहा है तो उस स्कूल के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। ऐसे स्कूलों के विवरण भी प्रदान किए जाएं।''

जहां तक याचिकाकर्ता-एसोसिएशन द्वारा मांगी गई राहत का संबंध है तो पीठ ने स्पष्ट किया है कि 17 जुलाई को उनके द्वारा दिया गया आदेश वर्तमान याचिकाकर्ता पर भी लागू होता है। इसलिए इस मांग के संबंध में कोई आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है।

इस मामले में अब 17 अगस्त 2020 को अगली सुनवाई होगी।

मामले का विवरण-

केस का शीर्षक- तमिलनाडु नर्सरी प्राइमरी मैट्रिकुलेशन हायर सेकेंडरी स्कूल एसोसिएशन बनाम राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग व अन्य।

केस नंबर-डब्ल्यूपी नंबर 9987/2020

कोरम-जस्टिस एन आनंद वेंकटेश

प्रतिनिधित्व-अधिवक्ता डी बासकर (याचिकाकर्ता के लिए), अतिरिक्त सरकारी वकील वी अन्नालक्ष्मी (प्रतिवादियों के लिए)

आदेश की प्रति डाउनलोड करें



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