वकीलों के सामूहिक संगठन 'LAFC' का गठन, संवैधानिक जवाबदेही और न्यायिक पारदर्शिता पर जोर

Praveen Mishra

15 Aug 2026 10:06 PM IST

  • वकीलों के सामूहिक संगठन LAFC का गठन, संवैधानिक जवाबदेही और न्यायिक पारदर्शिता पर जोर

    स्वतंत्रता दिवस को संगठन के प्रतीकात्मक स्थापना दिवस के रूप में चुनते हुए दिल्ली में कानूनी पेशेवरों के एक नए सामूहिक संगठन 'Lawyers Association for Constitution (LAFC)' का औपचारिक शुभारंभ किया गया। दिल्ली के केरल हाउस में आयोजित उद्घाटन बैठक में देशभर से करीब 170 अधिवक्ताओं, कानूनविदों और विधि शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया।

    LAFC का उद्देश्य संवैधानिक मूल्यों की रक्षा, कानूनी पेशे की स्वतंत्रता, न्यायिक पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही को बढ़ावा देना बताया गया है। संगठन ने स्पष्ट किया कि यह किसी राजनीतिक दल से संबद्ध नहीं होगा। इसकी सदस्यता प्रैक्टिसिंग वकीलों, कानून छात्रों और लॉ स्कूल शिक्षकों के लिए खुली रहेगी, जबकि पदाधिकारी बनने का अधिकार योग्य कानूनी पेशेवरों तक सीमित रखा गया है।

    वरिष्ठ अधिवक्ताओं और पूर्व न्यायाधीशों ने रखे विचार

    कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ताओं और पूर्व न्यायाधीशों ने संगठन के उद्देश्यों तथा भविष्य की भूमिका पर चर्चा की। वक्ताओं में वरिष्ठ अधिवक्ता सी.यू. सिंह, पटना हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अंजना प्रकाश, इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अमर शरण, वरिष्ठ अधिवक्ता नंदिता राव, वरिष्ठ अधिवक्ता अमित आनंद तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता सादान फरासत, अधिवक्ता मधु सरन तथा सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) के अध्यक्ष देवव्रत शामिल रहे।

    वरिष्ठ अधिवक्ता पी.वी. दिनेश ने LAFC की वेबसाइट LAFC.in के बारे में जानकारी दी और संगठन की डिजिटल पहलों, विशेष रूप से 'Know Your Candidate' (KYC) और कानूनी सहायता से जुड़ी योजनाओं की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। वेबसाइट का औपचारिक शुभारंभ जस्टिस अमर शरण द्वारा किया गया।

    SCBA चुनाव में KYC व्यवस्था पर जोर

    LAFC ने बताया कि आगामी Supreme Court Bar Association (SCBA) Elections में चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों को KYC फॉर्म उपलब्ध कराए गए हैं। संगठन के अनुसार, करीब 20 उम्मीदवारों के प्रोफाइल वेबसाइट पर अपलोड किए जा चुके हैं। इसका उद्देश्य बार चुनावों में उम्मीदवारों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराकर मतदाताओं को अधिक सूचित निर्णय लेने में मदद करना है।

    LAFC ने देशभर के बार एसोसिएशन चुनावों में KYC व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाई।

    NALSAR छात्रों के नामांकन विवाद पर BCI की आलोचना

    बैठक में LAFC ने कई प्रस्ताव पारित किए। इनमें NALSAR के 2026 बैच के छात्रों के नामांकन पर रोक लगाने के लिए BCI चेयरमैन द्वारा जारी निर्देश की कड़ी आलोचना की गई। संगठन ने इसे शांतिपूर्ण असहमति व्यक्त करने वाले छात्रों को डराने और नियामक अधिकार के कथित दुरुपयोग का प्रयास बताया।

    LAFC ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत शांतिपूर्ण असहमति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संरक्षित है। संगठन ने इस कार्रवाई की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए BCI चेयरमैन से इस्तीफे की मांग भी की।

    न्यायिक रिक्तियों और विविधता पर चिंता

    एक अन्य प्रस्ताव में LAFC ने न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों, विशेषकर जिला और अधीनस्थ अदालतों में न्यायाधीशों तथा आवश्यक न्यायिक कर्मचारियों के रिक्त पदों को समयबद्ध तरीके से भरने की मांग की।

    संगठन ने न्यायपालिका में सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की कमी पर भी चिंता जताई। बैठक में मुस्लिम, दलित, सिख, जैन और ईसाई समुदायों सहित विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक समूहों, साथ ही दिव्यांग व्यक्तियों और क्षेत्रीय पृष्ठभूमि के पर्याप्त प्रतिनिधित्व की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

    LAFC ने विशेष रूप से दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायिक प्रतिनिधित्व से जुड़े आंकड़ों का हवाला देते हुए न्यायपालिका में विविधता पर व्यापक चर्चा की। संगठन ने कहा कि न्यायिक संस्थानों में विविध प्रतिनिधित्व न्याय तक समान पहुंच और संस्थागत विश्वास के लिए महत्वपूर्ण है।

    पुलिसिंग और वकीलों की पेशेवर सुरक्षा पर भी उठे सवाल

    खुले सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने जाति और धर्म के आधार पर कथित भेदभावपूर्ण पुलिसिंग तथा संवेदनशील मामलों की पैरवी करने वाले वकीलों की पेशेवर असुरक्षा को लेकर चिंता जताई।

    चर्चा के दौरान ऐसे उदाहरणों का भी उल्लेख किया गया, जहां कथित तौर पर मुस्लिम पक्षकारों ने सामुदायिक पूर्वाग्रह की आशंका से हिंदू वकीलों को नियुक्त करने की इच्छा व्यक्त की। प्रतिभागियों ने इसे कानूनी पेशे की स्वतंत्रता और निष्पक्ष न्याय तक पहुंच से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।

    नवंबर 2026 में राष्ट्रीय सम्मेलन का प्रस्ताव

    उद्घाटन बैठक के अंत में LAFC ने अपने संगठनात्मक दायरे को देशभर में विस्तारित करने की दिशा में नवंबर 2026 में राष्ट्रीय स्तर का सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया। संगठन का कहना है कि वह संवैधानिक मूल्यों, न्यायिक जवाबदेही, बार की स्वतंत्रता, पारदर्शिता और कानूनी पेशे से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय मंच पर उठाने के लिए काम करेगा।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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