पंजाब-हरियाणा में वकीलों की हड़ताल के बाद NALSA का फ़ैसला: मौजूदा कार्यकाल के बाद LADC कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू नहीं होंगे
Shahadat
5 Aug 2026 9:42 AM IST

नेशनल लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी (NALSA) ने निर्देश दिया है कि पंजाब, हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में 'लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम' (LADCS) स्कीम के तहत नियुक्त 'लीगल एड डिफेंस काउंसिल्स' (LADCs) के कॉन्ट्रैक्ट सितंबर 2026 से आगे रिन्यू नहीं किए जाएंगे।
4 अगस्त 2026 को सभी राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों (State Legal Services Authorities) के सदस्य सचिवों को भेजे गए एक पत्र में NALSA के सदस्य सचिव संजीव पांडे ने बताया कि यह फ़ैसला 3 अगस्त 2026 को पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ के बार एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक के बाद लिया गया। इन प्रतिनिधियों ने LADCS स्कीम को लागू करने के तरीके पर चिंता जताई थी।
पत्र के अनुसार, सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) ने बार प्रतिनिधियों से स्कीम के कामकाज में मौजूद कमियों पर ठोस और रचनात्मक सुझाव देने का आग्रह किया। साथ ही यह भी बताया गया कि LADCS स्कीम की समीक्षा के लिए पहले से ही एक समिति गठित की जा चुकी है।
इस समीक्षा के लंबित रहने के दौरान, सक्षम प्राधिकारी ने निर्देश दिया:
1. पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में LADC कॉन्ट्रैक्ट सितंबर 2026 से रिन्यू नहीं किए जाएंगे।
2. बाकी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में LADC कॉन्ट्रैक्ट उनके मौजूदा कार्यकाल के पूरा होने पर रिन्यू नहीं किए जाएंगे।
3. संबंधित जिलों के जिला न्यायाधीशों को निर्देश दिया गया कि वे कानूनी सहायता के मामले LADC के बजाय बार के सदस्यों (खासकर युवा वकीलों) को सौंपें।
पत्र में राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के कानूनी सेवा प्राधिकरणों से कहा गया कि वे इस मामले को अपने-अपने कार्यकारी अध्यक्षों (Executive Chairpersons) के समक्ष रखें।
LADCS स्कीम उन आरोपियों को समर्पित, वेतनभोगी डिफेंस काउंसिल (बचाव पक्ष के वकील) उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई थी जो कानूनी प्रतिनिधित्व का खर्च नहीं उठा सकते। इसे 'पब्लिक डिफेंडर सिस्टम' की तर्ज पर और पहले की 'लीगल एड पैनल-लॉयर सिस्टम' के विकल्प के तौर पर तैयार किया गया था।
वकील, खासकर पंजाब में LADCS का विरोध करते हुए एक महीने से अधिक समय से हड़ताल पर हैं। उनका तर्क है कि यह एक समानांतर, राज्य-वित्तपोषित आपराधिक बचाव तंत्र बनाता है, जो स्वतंत्र वकीलों की प्रैक्टिस पर बुरा असर डालता है।
यह विरोध धीरे-धीरे हरियाणा और चंडीगढ़ के कई जिलों में फैल गया। गतिरोध को सुलझाने के प्रयास में बार निकायों और पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के जजों के बीच कई दौर की बातचीत हुई। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन भी पिछले हफ़्ते इस आंदोलन में शामिल हो गई और हाईकोर्ट में कामकाज रोक दिया। वकीलों ने एकजुटता दिखाने के लिए हाईकोर्ट परिसर के अंदर प्रदर्शन भी किए।


