कोर्ट ने मालदा में SIR से जुड़ी शिकायतों को लेकर न्यायिक अधिकारियों पर हमला करने के आरोपियों को 2 हफ़्ते की NIA हिरासत में भेजा

Shahadat

26 May 2026 7:40 PM IST

  • कोर्ट ने मालदा में SIR से जुड़ी शिकायतों को लेकर न्यायिक अधिकारियों पर हमला करने के आरोपियों को 2 हफ़्ते की NIA हिरासत में भेजा

    पश्चिम बंगाल के मालदा ज़िले में स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (SIR) प्रक्रिया के दौरान न्यायिक अधिकारियों पर कथित हमले और उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखने के मामले में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) द्वारा गिरफ़्तार किए गए पंद्रह लोगों को एक विशेष NIA कोर्ट ने दो हफ़्ते की हिरासत में भेज दिया।

    ये गिरफ़्तारियां NIA द्वारा मालदा में चलाए गए बड़े अभियान के दौरान की गईं। यह अभियान दो अलग-अलग घटनाओं से जुड़ा था, जिनमें सड़क जाम करना और विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची संशोधन के काम में लगे न्यायिक अधिकारियों को कथित तौर पर बंधक बनाना शामिल था।

    स्पेशल कोर्ट ने NIA की उस अर्ज़ी को मंज़ूर किया, जिसमें सभी 15 आरोपियों से दो हफ़्ते तक हिरासत में पूछताछ करने की अनुमति मांगी गई। एजेंसी इन सुनियोजित नाकाबंदियों और न्यायिक अधिकारियों पर हुए हमलों के पीछे की कथित बड़ी साज़िश की जांच कर रही है। इन घटनाओं में कथित तौर पर शामिल अन्य लोगों की पहचान करने के लिए भी जांच जारी है।

    यह मामला 1 अप्रैल को मालदा के मोथाबाड़ी ब्लॉक कार्यालय में SIR प्रक्रिया से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़की हिंसा से जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, इस काम के लिए तैनात सात न्यायिक अधिकारियों को एक भीड़ ने घेर लिया था और कथित तौर पर उन्हें कई घंटों तक ब्लॉक कार्यालय के अंदर बंधक बनाकर रखा था। जब वे उस इलाके से निकल रहे थे, तो कथित तौर पर उनके काफ़िले पर फिर से हमला किया गया।

    इस घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे न्याय प्रशासन पर एक गंभीर हमला बताया और निर्देश दिया कि जांच CBI या NIA में से किसी एक को सौंप दी जाए। इसके बाद चुनाव आयोग ने जांच NIA को सौंप दी।

    इससे पहले, पश्चिम बंगाल पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ़्तार किया था, जिनमें वकील मोफ़क्करुल इस्लाम, तृणमूल कांग्रेस के कालियाचक ब्लॉक अध्यक्ष मोहम्मद सरियुल शेख, ISF ग्राम पंचायत सदस्य गुलाम रब्बानी और ISF उम्मीदवार शाहजहां अली कादरी शामिल थे। पुलिस ने इस हिंसा को एक "पूर्व-नियोजित हमला" बताया था, न कि कोई अचानक हुआ विरोध प्रदर्शन।

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