'एसीबी जनहित पर विचार करने में विफल': कर्नाटक हाईकोर्ट बेंगलुरू अर्बन के पूर्व कमिश्नर से जुड़े रिश्वत मामले की निगरानी के लिए "मजबूर"
Shahadat
8 July 2022 11:44 AM IST

कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि वह भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा बेंगलुरु अर्बन (शहरी) के पूर्व कमिश्नर से जुड़े रिश्वत मामले की जांच की निगरानी करेगा, क्योंकि एसीबी उसके खिलाफ पर्याप्त सामग्री होने के बावजूद मामले में कोई कार्रवाई करने में विफल रहा है।
जस्टिस एचपी संदेश की सिंगल जज बेंच ने कहा,
"पूर्व कमिश्नर खिलाफ मामला दर्ज नहीं करने में एसीबी के आचरण पर ध्यान देने और एसीबी के समक्ष पर्याप्त सामग्री होने के बावजूद, इस अदालत ने देखा कि (एसीबी) केवल डीसी कार्यालय के क्लर्क और अधीनस्थ अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर रहा है... यदि जांच एजेंसी जनहित पर विचार करने में विफल है तो परिस्थितियों के मजबूर करने पर संवैधानिक अदालतें जांच की निगरानी कर सकती हैं।"
पीठ ने अपने गठन के बाद से दायर 'बी-रिपोर्ट' के बारे में "सच्चे तथ्य" नहीं बताने के लिए एसीबी पर भी नाराजगी व्यक्त की। पीठ ने कुछ मामलों का विवरण नोट किया, जब आरोपी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किए जाने बी-रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
पीठ ने कहा,
"ये इस बात के ज्वलंत उदाहरण हैं कि एसीबी कैसे काम कर रहा है। वह सच्ची रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर रहा है। दो बार एसीबी के वकील ने हलफनामा दिया, लेकिन एक भी रिपोर्ट साथ नहीं लाया।"
तदनुसार, कोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल (न्यायिक) को अपनी स्थापना के बाद से राज्य भर की निचली अदालतों में एसीबी द्वारा दायर बी-रिपोर्टों की संख्या का विवरण प्राप्त करने और सोमवार यानी 11 जुलाई तक अदालत में जमा करने का निर्देश दिया।
यह घटनाक्रम तब सामने आया जब मामले में आरोपी पीएस महेश द्वारा दायर जमानत आवेदन पर सुनवाई शुरू हुई। आवेदनकर्ता डिप्टी तहसीलदार को कथित तौर पर भूमि विवाद मामले में डीसी कार्यालय से अनुकूल आदेश देने के संबंध में पांच लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
इससे पहले सोमवार को जब इस मामले की सुनवाई हुई तो जस्टिस संदेश ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा कि अगर उन्होंने इस मामले में जांच की प्रगति की निगरानी जारी रखी तो उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से तबादला कर दिए जाने की धमकी दी गई है।
जस्टिस संदेश ने हार मानने से इनकार करते हुए कहा,
"मैं अपने पद की कीमत पर न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा करने जा रहा हूं।"
पीठ ने गुरुवार को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एसीबी) को रिकॉर्ड पर सामग्री के बावजूद उसकी निष्क्रियता के लिए फटकार लगाई। पीठ ने कहा कि वह जिस संस्थान का प्रतिनिधित्व करते हैं, उसके लिए उत्साहपूर्वक काम नहीं कर रहे हैं।
यह नोट किया गया कि तलाशी वारंट प्राप्त किया गया था लेकिन निष्पादित नहीं किया गया। इसके अलावा रिश्वत की राशि लेते हुए गिरफ्तार व्यक्ति के खिलाफ बी-रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
इस पृष्ठभूमि में यह देखा गया,
जब इस तरह की जांच एजेंसी और संस्था में मामले के शीर्ष व्यक्ति का मामला है तो अदालत ने कहा कि सच्चाई का पता लगाने और समाज में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए जांच की निगरानी करना उसकी मजबूरी है।
पीठ ने इस संबंध में कहा,
"बिना किसी अन्य विकल्प के यह अदालत आम जनता के हित में काम करेगी, क्योंकि आम जनता को विभागों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। नीचे के रैंक से शीर्ष रैंक के अधिकारियों को रिश्वत दिए बिना हर रोज आम लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए यह अदालत जनता के हित में काम करेगी। यह एकमात्र विचार है। अदालत जांच की निगरानी तभी कर सकती है जब परिस्थितियां ऐसा करने के लिए मजबूर करती हों।"
अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो को 2012 के कथित अवैध खनन में शामिल अधिकारियों के खिलाफ की गई जांच के संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया। इस मामले में वर्तमान एडीजीपी सीमांत कुमार सिंह, बेल्लारी जिले के पुलिस अधीक्षक के रूप में तैनात थे। अदालत ने कहा कि यदि रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की जाती है तो सीबीआई के अधीक्षक अदालत के समक्ष उपस्थित रहेंगे।
कोर्ट को सौंपी गई एसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक 99 मामलों में बी-रिपोर्ट दाखिल की गई है। वर्ष 2022 में रिपोर्ट के अनुसार, कोई बी-रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई और वर्ष 2021 में दो मामलों में बी-रिपोर्ट दर्ज की गई।
केस टाइटल: महेश पीएस बनाम कर्नाटक राज्य
केस नंबर: सीआरएल.पी 4909/2022

