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कंगना रनौत के ट्वीट्स महाराष्ट्र सरकार के ‌खिलाफ नफरत पैदा करने के इरादे से किए गए: कंगना और रंगोली की ओर से एफआईआर रद्द करने के लिए दायर य‌ाचिका के खिलाफ जवाबी हलफनामा दायर

LiveLaw News Network
25 Jan 2021 2:01 PM GMT
कंगना रनौत के ट्वीट्स महाराष्ट्र सरकार के ‌खिलाफ नफरत पैदा करने के इरादे से किए गए: कंगना और रंगोली की ओर से एफआईआर रद्द करने के लिए दायर य‌ाचिका के खिलाफ जवाबी हलफनामा दायर
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बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत और उनकी बहन रंगोली चंदेल की ओर से राजद्रोह की एफआईआर को रद्द करने के लिए दायर याचिका के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष जवाबी हलफनामा दायर किया गया है।

जवाबी हलफनामा कास्टिंग डायरेक्टर मुनव्वर अली सैय्यद ने दायर किया है, जिन्होंने आईपीसी की धारा 153 ए, 295 ए, 124 ए, धारा 34 के साथ पढ़ें, तहत दंडनीय अपराधों के लिए एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। उन्होंने कंगना और उनकी बहन रंगोली पर कथित रूप से सोशल मीडिया के जरिए सांप्रदायिक वैमनस्य पैदा करने की कोशिश करने का आरोप लगाया था।

सैय्यद ने आरोप लगाया कि दोनों बहनों ने जानबूझकर घृणा फैलान और महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ असंतोष पैदा करने के लिए ट्वीट किए थे। सैयद ने कहा, "ट्वीट के जर‌िए दोनों बहनों ने महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ राजद्रोह, असंतोष, घृणा और शत्रुता पैदा करने का प्रयास किया था, जबकि यह सरकार भारत में कानून के जर‌िए स्थापित है।"

पृष्ठभूमि

उल्लेखनीय है कि बांद्रा पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत बांद्रा मजिस्ट्रेट कोर्ट की ओर से दिए गए निर्देश के बाद कंगना और उनकी बहन रंगोली के खिलाफ सोशल मीडिया के माध्यम से सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने की कोशिश करने के आरोप में एफआईआर दर्ज किया था।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि दोनों बहनें, हिंदू और मुस्लिमों के बीच नफरत और सांप्रदायिक तनाव पैदा करने के लिए अपने लगभग सभी ट्वीट में दुर्भावनापूर्ण ढंग से धर्म को ला रही हैं।

उन्होंने ऐसे उदाहरणों का उल्लेख किया, जिनमें कंगना और रंगोली के ट्वीट कथित रूप से सांप्रदायिक थे। जैसे, पालघर में हिंदू साधुओं की हत्या के बाद उनके ट्वीट और दफ्तर गिराने के बाद उन्होंने ट्वीट में बीएमसी को "बाबर सेना" कहा।

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने खुद को इस्लाम प्रभुत्व वाली इंडस्टी में छत्रपति शिवाजी महाराज और झांसी की रानी लक्ष्मी बाई पर फिल्म बनाने वाले पहली व्यक्ति बताया था। उन्होंने ट्व‌िटर पर कोरोनावायरस के प्रसार के लिए जम‌ात को दोषी ठहराया था। इन सभी उदाहरणों के साथ शिकायतकर्ता ने यह आरोप लगाया है कि कंगना ने हिंदुओं और मुसलमानों के बीच जानबूझकर घृणा और सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश की।

मौजूदा मामले में दोनों बहनों की दलील है कि मजिस्ट्रेट ने यह नहीं बताया है कैसे उनके किसी ट्वीट ने विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा दिया है या समूहों के बीच पूर्वाग्रह को बढ़ाया है, और प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की।

एफआईआर दर्ज करने के मजिस्ट्रेट के आदेश में कोई दुर्बलता नहीं

प्रतिवादी ने दलील दी कि धारा 156 (3) सीआरपीसी के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए, एक मजिस्ट्रेट को आदेश में किए गए दंड अनुभाग की सामग्री को सही ठहराने की आवश्यकता नहीं है।

जवाबी हलफनामे कहा गया है, "धारा 156 (3) सीआरपीसी के तहत आदेश में जांच में संज्ञेय अपराध प्रतीत होने की प्रथम दृष्टया संतुष्टि होनी चा‌हिए। धारा 156 (3) सीआरपीसी के तहत एक आदेश के बाद पूरी कवायद जांच अधिकारी के अधिकार क्षेत्र और विशेषाधिकार के भीतर है, जो धारा 156 सीआरपीसी के तहत प्रक्रिया का पालन करके जांच शुरू करेगा।"

दोनों बहनों के खिलाफ राजद्रोह के आरोप लगाने का बचाव करते हुए जवाब में कहा गया, "हालांकि, इस प्रकार के शब्दों के इस्तेमाल से कोई गड़बड़ी नहीं हुई है या असंतोष की भावना पैदा हुई है। आईपीसी की धारा 124-ए के प्रयोजनों के लिए यह पर्याप्त है कि जिन शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, उन्हें भावनाओं को उत्तेजित करने के इरादे से इस्तेमाल किया गया है...."

जवाब में कहा गया है कि एक बार मजिस्ट्रेट द्वारा धारा 156 (3) सीआरपीसी के तहत आदेशों और निर्देशों के जारी होने पर एफआईआर दर्ज की जाती है, मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद होने वाली कार्रवाई के कारण पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है। जवाब में आशीष नंदी बनाम दिल्ली राज्य, 2010 SCC ऑनलाइन दिल्ली 2989 भरोसा किया गया।

कंप्यूटर संसाधनों की जब्ती

रानौत और चंदेल ने अपनी याचिका में कहा था कि मजिस्ट्रेट ने यांत्रिक रूप से कंप्यूटर सिस्टम की जांच और जब्ती का आदेश दिया है।

इसका बचाव करते हुए हलफनामे में कहा गया है, "मामले में प्राथमिक साक्ष्य कंप्यूटर संसाधन या कंप्यूटर सिस्टम है जिनका आवेदकों ने अपराधों करने के लिए उपयोग किया है। यह कंप्यूटर संसाधन और कंप्यूटर सिस्टम है, जिनकी जांच किया जाना और जब्त किया जाना आवश्यक है।"

हलफनामा अधिवक्ता रिजवान मर्चेंट और एसोसिएट्स के माध्यम से दायर किया गया है।

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