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अभिनेत्री कंगना रनौत के पासपोर्ट के नवीनीकरण का मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने जावेद अख्तर के हस्तक्षेप आवेदन पर सुनवाई से इनकार किया

LiveLaw News Network
26 July 2021 1:15 PM GMT
अभिनेत्री कंगना रनौत के पासपोर्ट के नवीनीकरण का मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने जावेद अख्तर के हस्तक्षेप आवेदन पर सुनवाई से इनकार किया
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को कंगना रनौत की दिद्दा कॉपीराइट मामले पर दायर गीतकार जावेद अख्तर के हस्तक्षेप आवेदन पर सुनवाई करने से इनकार किया।

इस मामले में उन्हें शिकायतकर्ता या लोक अभियोजक से संपर्क करने के लिए कहा गया था, क्योंकि वह वर्तमान कार्यवाही में एक पक्षकार नहीं है।

अख्तर ने आरोप लगाया कि रनौत ने अदालत को गुमराह करने के लिए अपने खिलाफ लंबित मानहानि के मामले को जानबूझकर छुपाया और अपनी खिलाफ दायर याचिका को रद्द कराने के लिए एक अंतरिम आवेदन दायर करके अपना पासपोर्ट नवीनीकृत करने के लिए एक अनुकूल आदेश प्राप्त किया।

अख्तर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने कहा कि पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए अदालत में धोखाधड़ी की गई है। अदालत ने तब ग्रोवर से यह कहते हुए अपने अधिकार का औचित्य साबित करने के लिए कहा कि अदालत के समक्ष मामला एक एफआईआर को रद्द करने का है और इसमें अख्तर एक पक्षकार नहीं है।

हालांकि, ग्रोवर ने अदालत को बताया कि कंगना द्वारा उसी कार्यवाही में दायर एक आवेदन के आधार पर पासपोर्ट का नवीनीकरण हुआ।

पीठ ने टिप्पणी की,

"अदालतों में इस तरह से मामलों की बाढ़ आ जाएगी।"

इसके साथ ही अदालत ने अख्तर को शिकायतकर्ता या अभियोजक से संपर्क करने के लिए कहा।

इसके बाद पीठ ने मामले पर सुनवाई को को 11 अगस्त, 2021 के लिए पोस्ट कर दिया।

संबंधित मामले में लेखक आशीष कौल ने बॉम्बे हाईकोर्ट में एक आवेदन दायर किया था। इस आवदेन में अभिनेत्री कंगना रनौत पर गीतकार जावेद अख्तर के मानहानि के मामले को उनके खिलाफ एक अनुकूल आदेश प्राप्त करने, अपना पासपोर्ट नवीनीकृत करने और विदेश यात्रा करने के लिए "शपथ के तहत झूठ बोलने" का आरोप लगाया गया था।

अपनी याचिका में कौल ने "झूठे प्रतिनिधित्व" के लिए पासपोर्ट अधिकारियों द्वारा रनौत के खिलाफ जांच और अदालत की अवमानना ​​अधिनियम की धारा 10 के तहत कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने कंगना से अपना पासपोर्ट सरेंडर करने या पुलिस द्वारा इसे जब्त करने के लिए कहा जाने की भी मांग की थी।

लेखक ने दिद्दा कॉपीराइट मामले में एफआईआर को रद्द करने के लिए रनौत की याचिका के जवाब में आवेदन दायर किया था, जो कौल की निजी शिकायत पर आधारित है।

28 जून को बॉम्बे हाईकोर्ट ने रनौत के दो आवेदनों का निपटारा किया था। इसमें से एक में पासपोर्ट प्राधिकरण ने कहा था कि वे कंगना के वकील के आश्वासन के आधार पर उनके आवेदन पर शीघ्रता से विचार करेंगे कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है और केवल दो एफआईआर प्राथमिकी दर्ज की गई है।

रनौत और उनकी बहन रंगोली चंदेल के खिलाफ बांद्रा पुलिस स्टेशन में कास्टिंग डायरेक्टर मुनव्वर अली द्वारा दर्ज पहली एफआईआर में लोगों के बीच दुश्मनी, देशद्रोह को बढ़ावा देने और अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने की कोशिश पर आधारित है।

दूसरी एफआईआर कौल द्वारा दायर कराई गई है। इस एफआईआर में कौल ने कहा कि वह कश्मीर की योद्धा रानी दिद्दा पर एक किताब के लेखक हैं। वहीं कंगना ने घोषणा की थी कि वह 2019 की फिल्म, मणिकर्णिका: द लीजेंड ऑफ दिद्दा का सीक्वल बना रही हैं।

कंगना के वकील ने अदालत के सामने एक बयान दिया कि कंगना के खिलाफ केवल यही मामले लंबित हैं, जिसके बाद अदालत ने पासपोर्ट अधिकारियों को पासपोर्ट के नवीनीकरण की याचिका पर विचार करने का निर्देश दिया और उनका पासपोर्ट नवीनीकृत कर दिया गया।

हालांकि, कौल ने अपनी ताजा याचिका में कहा है कि कंगना ने जानबूझकर गीतकार जावेद अख्तर द्वारा दायर मानहानि के मामले की जानकारी छिपाई, जिसका खुलासा खुद अख्तर ने एक हस्तक्षेप आवेदन में किया था।

कौल द्वारा दायर अवमानना याचिका में कहा गया है,

"जावेद अख्तर द्वारा रिकॉर्ड में लाए जाने के बाद यह पूरी तरह से झूठ निकला कि याचिकाकर्ता कंगना रनौत अंधेरी में मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की 10वीं अदालत में केस नंबर 2575/एसएस/2020 में एक अंडर ट्रायल है, जहां उसे सशर्त जमानत पर रिहा किया गया है। इसके अलावा, किसी भी अदालत ने आज तक कंगना रनौत को कोई राहत नहीं दी है। इसके अलावा, यह याचिकाकर्ता द्वारा एक स्पष्ट झूठ है। इसमें किसी भी तरह का विरोधाभास नहीं है।"

याचिका में आगे कहा गया,

"यह झूठ एक सामान्य झूठ नहीं है, क्योंकि इस झूठ के साथ मुंबई में माननीय हाईकोर्ट में शपथ के तहत दायर दस्तावेज है। इसके अलावा, शपथ के तहत झूठ बोलने के बाद याचिकाकर्ता कंगना द्वारा पासपोर्ट कार्यालय में और झूठ बोला गया। रनौत, जिसके कारण उन्हें बिना किसी प्रतिबंध के पासपोर्ट जारी किया गया, क्योंकि यह अन्य परीक्षणाधीन मामलों के साथ हो सकता है, जिन्हें संभवतः सख्त प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है। लेकिन विशेष रूप से इस तरह 12 महीने की सीमित अवधि के लिए पासपोर्ट नहीं दिया जाता है, जैसा कि उन्हें दिया गया है। झूठ का इरादा भी बहुत स्पष्ट था, क्योंकि यह क्षण भर के बयान की प्रेरणा नहीं थी बल्कि आवेदन भरने की एक उचित प्रक्रिया थी।"

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