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"न्याय केवल अभियुक्त के लिए नहीं बल्कि पीड़ित के साथ भी न्याय होना चाहिए": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सामूहिक बलात्कार मामले के आरोपियों की स्थानांतरण याचिका खारिज की

LiveLaw News Network
30 April 2022 10:51 AM GMT
न्याय केवल अभियुक्त के लिए नहीं बल्कि पीड़ित के साथ भी न्याय होना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सामूहिक बलात्कार मामले के आरोपियों की स्थानांतरण याचिका खारिज की
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि "न्याय केवल आरोपियों के लिए नहीं है, पीड़िता के साथ भी न्याय होना चाहिए।"

हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी सामूहिक बलात्कार के आरोपियों की ओर से दायर तीन याचिकाओं को खारिज करते हुए की। याचिकाओं में उन पर दायर मुकदमे को झांसी जिले से किसी अन्य जिले में स्थानांतरित करने की मांग की गई थी।

जस्टिस अनिल कुमार ओझा की खंडपीठ ने कहा कि यदि किसी मामले को स्थानांतरित किया जाता है तो यह सामूहिक बलात्कार पीड़िता का अपमान होगा।

पीठ ने कहा, "यदि मामला जिला झांसी से किसी अन्य जिले में स्थानांतरित किया जाता है तो यह पीड़िता, गवाहों, अभियोजन पक्ष और पूरे समाज के लिए असुविधाजनक होगा क्योंकि मामला सामूहिक बलात्कार से संबंधित है।"

आवेदक विपिन तिवारी और रोहित पर आरोप है कि उन्होंने पीड़िता के साथ दुष्कर्म के दौरान मोबाइल पर वीडियो बना लिया। आवेदक शैलेंद्र नाथ पाठक पर आरोप है कि उसने पीड़ित से 1000 और 2000 रुपये लिये।

आरोपियों ने मौजूदा स्थानांतरण याचिका दायर करते हुए कहा कि पीड़िता के पिता झांसी में पेशे से वकील हैं और इसलिए कोई भी एडवोकेट जिला न्यायालय झांसी में आवेदकों की ओर से पेश होने के लिए तैयार नहीं है।

उन्होंने यह तर्क दिया गया कि आवेदकों को मुकदमा लड़ने के लिए अपनी पसंद के वकील को नियुक्त करने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन पीड़ित के पिता के प्रभाव के कारण आवेदकों को उस अवसर से वंचित किया जा रहा है।

वहीं, विपक्ष वकील ने स्थानान्तरण आवेदनों का विरोध करते हुए जिला न्यायालय झांसी में विभिन्न एडवोकेटों द्वारा आवेदक विपिन तिवारी और शैलेन्द्र नाथ पाठक की ओर से दायर वकालतनामे की ओर न्यायालय का ध्यान आकर्षित किया।

हालांकि, यह एक स्वीकृत तथ्य था कि आवेदक रोहित कुमार की ओर से कोई वकालतनामा दायर नहीं किया गया था। एजीए ने प्रस्तुत किया कि चूंकि मामले में स्थानांतरित करने की मांग की गई है, जबकि मामला जघन्य है और सामूहिक बलात्कार से संबंधित है, इसलिए इसे खारिज कर दिया जाना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि

यदि मामला झांसी से दूसरे जिलों में स्थानांतरित किया जाता है, तो सामूहिक बलात्कार पीड़िता को दूसरे जिले की यात्रा करनी होगी, जिसके चलते अंततः पीड़िता को कठिनाई और मानसिक पीड़ा हो सकती है।

कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा, इतना ही नहीं औपचारिक गवाहों को छोड़कर अन्य सभी गवाह जो झांसी के निवासी हैं, उन्हें दूसरे जिले की यात्रा करनी होगी, जहां मामले को स्थानांतरित किया जाएगा। न्याय केवल आरोपी के लिए नहीं है, पीड़ित के साथ भी न्याय होना चाहिए और वर्तमान मामले में पीड़िता के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया है।"

इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी कहा कि आवेदकों को अपनी पसंद के वकील के माध्यम से केस लड़ने का पूरा अधिकार है। हालांकि, कोर्ट ने कहा जहां तक ​​पीड़िता के पिता, जो झांसी में एक वकील हैं, के प्रभाव का संबंध है, रिकॉर्ड पर इसका कोई सबूत नहीं।

यह देखते हुए कि दो आवेदकों विपिन तिवारी और शैलेंद्र नाथ पाठक की ओर से वकालतनामा दायर किया गया था, आवेदक रोहित कुमार की ओर से कोई वकालतनामा दायर नहीं किया गया था, अदालत ने जिला मजिस्ट्रेट, झांसी को मामले की प्रगति की निगरानी करने का निर्देश दिया।

केस शीर्षक - विपिन तिवारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य और जुड़े मामले

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