ज्यूडिशियल भर्तियों की पहले से जारी प्रक्रियाओं पर न्यूनतम प्रैक्टिस शर्त लागू नहीं होगी: सुप्रीम कोर्ट

  • ज्यूडिशियल भर्तियों की पहले से जारी प्रक्रियाओं पर न्यूनतम प्रैक्टिस शर्त लागू नहीं होगी: सुप्रीम कोर्ट

    ज्यूडिशियल सेवा में प्रवेश के लिए 3 साल की न्यूनतम प्रैक्टिस शर्त को बहाल करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (20 मई) को स्पष्ट किया कि यह शर्त आज के फैसले से पहले राज्यों/उच्च न्यायालयों द्वारा पहले से अधिसूचित भर्ती प्रक्रिया पर लागू नहीं होगी। दूसरे शब्दों में, न्यूनतम अभ्यास शर्त केवल भविष्य की भर्ती प्रक्रिया पर लागू होगी।

    चीफ़ जस्टिस बीआर गवई ने कहा, "न्यूनतम अभ्यास की आवश्यकता लागू नहीं होगी जहां उच्च न्यायालयों ने इस फैसले की तारीख से पहले ही सिविल जज जूनियर डिवीजन की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी है, और यह केवल अगली नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने पर ही लागू होगी,"

    न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी भर्ती प्रक्रियाएं, जिन्हें इस मामले के लंबित होने के कारण स्थगित रखा गया था, अब आगे बढ़ सकती हैं।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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