जजों को जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए विनम्रता और जिम्मेदारी से शक्ति का प्रयोग करना चाहिए: CJI बी.आर. गवई

Praveen Mishra

20 Sept 2025 3:50 PM IST

  • जजों को जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए विनम्रता और जिम्मेदारी से शक्ति का प्रयोग करना चाहिए: CJI बी.आर. गवई

    चीफ़ जस्टिस ऑफ इंडिया ने शनिवार को सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) के 10वें अखिल भारतीय सम्मेलन 2025 को संबोधित करते हुए कहा कि जजों को अपनी शक्ति का प्रयोग हमेशा विनम्रता और जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए।

    उन्होंने कहा,“न्यायिक अधिकारी, जज और ट्रिब्यूनल के सदस्य होने के नाते हमारे पास अपार शक्ति होती है, लेकिन हमें इस शक्ति को अत्यधिक विनम्रता और जिम्मेदारी के साथ निभाना चाहिए। हमारे समक्ष आने वाले प्रत्येक वादकारी को यह विश्वास होता है कि उन्हें न्याय मिलेगा, इसलिए हमारे निर्णय निष्पक्ष होने चाहिए। यह जिम्मेदारी केवल आधिकारिक स्थानों तक सीमित नहीं है, बल्कि बाहर भी बनी रहनी चाहिए। जज कई हज़ार नागरिकों के जीवन को प्रभावित करते हैं और न्यायपालिका में जनता के विश्वास को आकार देते हैं।”

    अपने भाषण में चीफ़ जस्टिस ने न्यायिक और अर्ध-न्यायिक अधिकारियों के आचरण पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) परीक्षा में अब 3 साल की प्रैक्टिस अनिवार्य की गई है, क्योंकि आँकड़े दिखाते हैं कि अनुभवहीन नए स्नातक न्यायिक पद पर पहुँचते ही “कुर्सी के नशे में” आकर 40–50 साल पुराने वकीलों को भी दबाने लगते हैं। यह नियम इसलिए बहाल किया गया ताकि उम्मीदवार अदालत की कार्यप्रणाली और प्रक्रिया का अनुभव हासिल कर सकें।

    उन्होंने एक हालिया समाचार का हवाला दिया जिसमें हाईकोर्ट में एक युवा वकील, जज के कठोर रवैये से बेहोश हो गया। चीफ़ जस्टिस गवई ने कहा कि यह उदाहरण बताता है कि वकीलों में कुछ जजों के व्यवहार को लेकर असंतोष है।

    उन्होंने कहा,“न्याय की स्वर्ण रथ के दो पहिए वकील और जज हैं। न कोई श्रेष्ठ, न कोई हीन। जब तक दोनों मिलकर कार्य नहीं करेंगे, तब तक न्याय व्यवस्था, जो देश के अंतिम नागरिक के लिए है, सही से काम नहीं कर सकती।”

    चीफ़ जस्टिस गवई ने मार्टिन लूथर किंग के भाषण 'द बर्थ ऑफ ए न्यू एज' का उल्लेख करते हुए कहा,“हमें ऐसे नेता चाहिए जो पैसे से नहीं, बल्कि न्याय से प्रेम करें; जो प्रचार से नहीं, बल्कि मानवता से प्रेम करें; ऐसे नेता जो अपने अहंकार को स्वतंत्रता जैसे महान उद्देश्य के लिए त्याग सकें।”

    अंत में उन्होंने कहा कि उनके विचारों को आलोचना के रूप में न लेकर, न्यायाधिकरण प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए सामूहिक चिंतन और नवाचार का अवसर समझा जाना चाहिए।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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