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जज, कोर्ट स्टाफ और वकीलों को भी COVID-19 का खतरा: दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यायिक बिरादरी को वैक्सीनेशन दिए जाने के मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लिया

LiveLaw News Network
4 March 2021 7:43 AM GMT
जज, कोर्ट स्टाफ और वकीलों को भी COVID-19 का खतरा: दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यायिक बिरादरी को वैक्सीनेशन दिए जाने के मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लिया
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दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को जज, कोर्ट स्टाफ और वकीलों सहित न्यायिक कामकाज से जुड़े सभी लोगों को वैक्सीनेशन दिए जाने की मांग पर स्वतः संज्ञान लेकर एक जनहित याचिका दायर करने का निर्देश दिया है। इस याचिका में याचिकाकर्ता ने न्यायिक बिरादरी से संबंधित लोगों को उनकी आयु सीमा या शारीरिक स्थिति पर विचार किए बिना प्राथमिकता के आधार पर "अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ता" के रूप में मानकर वैक्सीन दिए जाने की मांग की है।

दिल्ली बार काउंसिल के अध्यक्ष श्री रमेश गुप्ता द्वारा भेजे गए एक संचार के बाद न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की खंडपीठ ने 1 मार्च 2021 को जनहित याचिका के रूप में सुनवाई के लिए पंजीकृत किया था।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा,

"प्रथम दृष्टय यह प्रतीत होता है कि न्यायिक कामकाज से जुड़े सभी व्यक्तियों को अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ता के रूप में घोषित करने के बार काउंसिल ऑफ दिल्ली द्वारा किए गए अनुरोध में वजन है, क्योंकि इसमें न्यायाधीश, कोर्ट स्टाफ और वकील सभी शामिल हैं। ताकि वे आयु या शारीरिक स्थिति की सीमाओं के बिना प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीन प्राप्त कर सकें। हम यह देख सकते हैं कि सरकार द्वारा 45 से 60 वर्ष के आयु वर्ग में आने वाले व्यक्तियों को शामिल करने के लिए इस समानता को लिया गया है। कोमोर्बेटिव (संक्रमण) ऐसी गंभीर स्थितियां हैं, जिनसे न्यायाधीश, न्यायालय कर्मचारी और अधिवक्ता पीड़ित हो सकते हैं। भले ही, वे सह-रुग्णताओं में से एक से पीड़ित न हों। उनके संक्रमित होने का जोखिम और गंभीर और घातक स्वास्थ्य पर खतरे के मुद्दों को नज़र अंदाज नहीं किया जा सकता है।"

दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को दिनांक 1 मार्च 2021 को किए गए दिल्ली बार काउंसिल के संचार के अनुसार, चिकित्सा निदेशालय को आवश्यक निर्देश उपलब्ध कराने के लिए उचित दिशा-निर्देश जारी करने के लिए अनुरोध किया गया था, जो न्यायालय के परिसर में चिकित्सा औषधालयों सहित आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने के लिए न्यायाधीशों, अदालत के कर्मचारियों और वकीलों का टीकाकरण उन्हें फ्रंटलाइन कार्यकर्ता के रूप में मानकर किया जाए।

इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए और उक्त संचार में खूबियां ढूंढते हुए डिवीजन बेंच ने इस प्रकार कहा:

"समय की जरूरत है कि प्रचंड महामारी को देखते हुए जनता को टीकाकरण किया जाए, ताकि युद्ध स्तर पर अभियान चलाकर उन सभी लोगों के जीवन और स्वास्थ्य को सुरक्षित किया जा सके, जो अपने घरों से बाहर निकलकर अपने चैंबर्स और व्यवसायों में भाग लेते हैं। उनके स्वभाव से ऐसी जगहें हैं, जिनकी दैनिक आधार पर लोगों की संख्या का घनत्व बहुत अधिक है। सैकड़ों और हजारों मामले हर दिन किसी भी अदालत परिसर में सूचीबद्ध किए जाते हैं। न्यायाधीशों के अलावा, न्यायालय के कर्मचारी - जो पर्याप्त है और अधिवक्ता हैं - जिन्हें अपने-अपने मामलों में शामिल होना होता है। इसके साथ ही बड़ी संख्या में मुकदमे अदालतों में आते हैं, जिनमें उनके मामलों को दैनिक आधार पर सूचीबद्ध किया जाता है।"

इस मामले में भारत में दो टीकों की उपलब्धता कोविशिल्ड और कोवाक्सिन के मद्देनजर न्यायालय ने निर्माता कंपनियों सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक को नोटिस जारी किया।

इसके अलावा, न्यायालय ने भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के प्रमुख सचिव और दिल्ली के जीएनसीटी सचिव को भी नोटिस जारी किया।

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