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जहांगीरपुरी हिंसा | "स्थानीय पुलिस बिना अनुमति के निकाले गए जुलूस को रोकने में विफल": दिल्ली कोर्ट ने आठ लोगों को जमानत देने से इनकार किया

Shahadat
9 May 2022 5:09 AM GMT
जहांगीरपुरी हिंसा | स्थानीय पुलिस बिना अनुमति के निकाले गए जुलूस को रोकने में विफल: दिल्ली कोर्ट ने आठ लोगों को जमानत देने से इनकार किया
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दिल्ली की एक अदालत ने पिछले महीने शहर के जहांगीरपुरी इलाके में हनुमान जयंती जुलूस के दौरान हुई झड़पों के सिलसिले में आठ आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया।

रोहिणी कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गगनदीप सिंह ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला यह दर्शाता है कि बिना अनुमति के निकाले गए उक्त जुलूस को रोकने में स्थानीय पुलिस की ओर से पूरी तरह से विफलता थी।

न्यायाधीश ने कहा,

"ऐसा लगता है कि इस मुद्दे को वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा आसानी से दरकिनार कर दिया गया। संबंधित अधिकारियों की ओर से दायित्व तय करने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी कोई घटना न हो और पुलिस अवैध गतिविधियों को रोकने में आत्मसंतुष्ट न हो। मामले में पुलिस की यदि कोई मिलीभगत हो तो उसकी भी जांच की जानी चाहिए।"

कोर्ट ने इम्तियाज, नूर आलम, शेख हामिद, अहमद अली, शेख हामिद, एस.के. सहहदा, शेख जाकिर और अहीर को जमानत देने से इनकार कर दिया।

अदालत ने कहा कि आरोपी व्यक्तियों की पहचान घटना के दिन रिकॉर्ड किए गए सीसीटीवी फुटेज के आधार पर की गई है और प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा भी पहचान की गई है।

अदालत ने कहा,

"चश्मदीद गवाहों के बयान सीआरपीसी की धारा 161 के तहत दर्ज किए गए हैं। वर्तमान मामले में फिजिकल जांच अभी भी चल रही है और उक्त दंगों में शामिल कई अपराधियों को पकड़ा जाना बाकी है। अभियोजन पक्ष द्वारा आशंका व्यक्त की गई है कि सार्वजनिक गवाह सामने नहीं आएंगे, क्योंकि दंगाइयों को क्षेत्र का जाना-माना अपराधी माना जाता है। इसलिए, गवाहों को धमकाने/प्रभावित करने की आशंका को इस स्तर पर खारिज नहीं किया जा सकता है। चार्जशीट दायर किया जाना बाकी है।"

हालांकि, अदालत ने संबंधित तारीख को हुई घटनाओं के क्रम और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने और कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने में स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी ध्यान दिया।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा,

"राज्य की ओर से यह स्पष्ट रूप से स्वीकार किया जाता है कि जिस अंतिम जुलूस के दौरान दंगे हुए थे, वह पुलिस की पूर्व अनुमति के बिना निकाला गया था। अगर ऐसी स्थिति थी तो एफआईआर की सामग्री ही दिखाती है। अदालत ने कहा कि थाना जहांगीर पुरी के स्थानीय कर्मचारी इंस्पेक्टर राजीव रंजन के साथ-साथ डीसीपी रिजर्व के अन्य अधिकारियों के नेतृत्व में उक्त अवैध जुलूस को रोकने के बजाय उसके रास्ते में थे।

कोर्ट ने आगे कहा,

"ऐसा प्रतीत होता है कि स्थानीय पुलिस ने शुरुआत में ही उक्त अवैध जुलूस को रोकने और भीड़ को तितर-बितर करने के बजाय पूरे रास्ते में उनका साथ दिया, जिसके कारण बाद में दोनों समुदायों के बीच दंगे हुए।"

तद्नुसार, आदेश को सूचना एवं उपचारात्मक अनुपालन के लिए योग्य पुलिस आयुक्त के पास भेजने का निर्देश दिया गया।

दिल्ली पुलिस ने जाहिद, अंसार, शाहजाद, मुक्तयार अली, मो. अली, आमिर, अक्षर, नूर आलम, मो. असलम, जाकिर, अकरम, इम्तियाज, मोहम्मद अली और अहीर को गिरफ्तार किया गया है।

एफआईआर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की 147, 148, 149, 186, 353, 332, 323, 427, 436, 307, 120B और आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत दर्ज की गई है।

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