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अवैध प्रवासियों के साथ कैसे निपटा जाएगा, यदि मूल देश उन्हें वापस लेने के लिए तैयार नहीं? पटना हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

LiveLaw News Network
21 April 2021 12:30 PM GMT
अवैध प्रवासियों के साथ कैसे निपटा जाएगा, यदि मूल देश उन्हें वापस लेने के लिए तैयार नहीं? पटना हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
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राज्य में दो महिला बांग्लादेशी प्रवासियों के मानवाधिकारों पर जताई चिंता के मुद्दे पर विचार करते हुए पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में तीन वकीलों की एक टीम का गठन किया है ताकि वह यह जान सकें कि उन्हें आफ्टर केयर होम में किन परिस्थितियों में रखा गया है। साथ ही टीम को निर्देश दिया गया है कि वह एक सप्ताह के अंदर सीलबंद कवर में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

न्यायमूर्ति शिवाजी पांडे और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी की खंडपीठ ने पाया कि इस मुद्दे पर राज्य सरकार की तरफ से कोई हलफनामा दायर नहीं किया है। इसलिए खंडपीठ ने बिहार राज्य को निर्देश दिया है कि वे राज्य में ऐसे अवैध प्रवासियों के लिए बनाए गए होल्डिंग सेंटर या डिटेंशन सेंटर के संबंध में एक हलफनामा दायर करें।

इसके साथ ही, न्यायालय ने भारत संघ को भी निर्देश दिया है कि वह इनके मूल स्थान के प्रत्यावर्तन (स्वदेश भेजना) की वर्तमान स्थिति का विवरण देते हुए एक हलफनामा दायर करें और अवैध प्रवासियों के उस मुद्दे को भी संबोधित किया जाए,जिन मामलों में मूल देश अपने संबंधित नागरिक को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।

हाईकोर्ट पिछले कई वर्षों से एक ''आफ्टर केयर होम'' में रखी गई पटना रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार दो महिला बांग्लादेशी प्रवासियों अर्थात् मरियम खातून और मौसमी खातून से संबंधित याचिका पर सुनवाई कर रही है। हालांकि, उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया था।

तीन वकीलों की टीम का गठन

यह देखते हुए कि दोनों महिलाएं अवैध प्रवासी थी,जो वैध दस्तावेजों के बिना भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कर गई थी, हाईकोर्ट ने आफ्टर केयर होम का दौरा करने के लिए तीन वकीलों की एक टीम का गठन किया है। टीम को निर्देश दिया गया है कि वह दोनों महिलाओं के साथ बातचीत करें और सील कवर में अपनी एक रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इस रिपोर्ट में यह बताया जाए कि उन्हें किस तरीके से वहां रखा गया है। इस टीम में दो महिला अधिवक्ता और एक पुरुष अधिवक्ता शामिल होगा।

एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया ने कोर्ट को सूचित किया था कि बांग्लादेशी दूतावास को उनके प्रत्यावर्तन के लिए पत्र लिखा गया था, लेकिन उनसे कोई जवाब नहीं मिला। जिसके बाद कोर्ट ने यह निर्देश जारी किए हैं।

दूसरी ओर, राज्य के लिए उपस्थित अतिरिक्त महाधिवक्ता ने बताया कि उन्हें उचित तरीके से आफ्टर केयर होम में रखा गया है और ऐसी कोई शिकायत नहीं है कि उन्हें बहुत खराब तरीके से वहां रखा जा रहा है।

कोर्ट ने निर्देश दिया है कि,

''उक्त टीम 10.04.2021 को आफ्टर केयर होम का दौरा करेगी, जिसके लिए यह कोर्ट सुपरिंटेंडेंट ऑफ आफ्टर होम को निर्देश देती है कि वह टीम के सदस्यों को सुश्री मरियम खातून / मरियम परवीन और सुश्री मौसमी खातून के साथ बातचीत करने की अनुमति दें, जिन्हें आफ्टर केयर होम में रखा गया है। हम यह स्पष्ट कर रहे हैं कि बातचीत के समय आफ्टर केयर होम को कोई अधिकारी या अन्य अधिकारी वहां मौजूद नहीं रहेगा। यदि न्यायालय को यह पता चला कि किसी ने कोई हस्तक्षेप किया था तो इसे बहुत गंभीरता से देखा जाएगा और यह न्यायालय सीधे तौर पर दोषी अधिकारियों/ व्यक्तियों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू कर सकता है।''

डिटेंशन सेंटर के निर्माण पर शपथ पत्र, राज्य और केंद्र द्वारा दायर किए जाने वाले अवैध प्रवासियों के मुद्दे

एमिकस क्यूरिया ने कोर्ट को बताया कि ऐसे व्यक्तियों को लंबे समय तक आफ्टर केयर होम में नहीं रखा जा सकता है और उन्हें केंद्र सरकार के निर्देशानुसार होल्डिंग सेंटर या डिटेंशन सेंटर में स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिए। जिसके बाद कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह निम्नलिखित पहलुओं पर उनके रुख के बारे में कोर्ट को अवगत कराएंः

- राज्य सरकार अवैध प्रवासियों के लिए होल्डिंग सेंटर या डिटेंशन सेंटर के निर्माण के संबंध में हलफनामा दायर करे।

- केंद्र सरकार दो पहलुओं पर हलफनामा दाखिल करे। सबसे पहला, दो महिला प्रवासियों का उनके मूल स्थान पर प्रत्यावर्तन करने के लिए बांग्लादेशी दूतावास के साथ उनकी बातचीत की वर्तमान स्थिति और दूसरा, उन अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर किस तरीके से संबोधित किया जा रहा है, जहां मूल देश अपने संबंधित नागरिक को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।

पिछली सुनवाई के दौरान, अदालत ने प्रतिवादी अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वह निम्नलिखित पहलुओं पर सारणीबद्ध रूप से डेटा दायर करेंः(ए) बिहार राज्य में स्थित रिमांड होम की कुल संख्या; (बी) उनमें रखे गए व्यक्तियों की कुल संख्या; (ग) उनमें रखे गए विदेशी नागरिकों की कुल संख्या और (घ) विदेशी अधिनियम; विदेशी आदेश 1948 और विदेशी (ट्रिब्यूनल) आदेश 1964 के तहत उनके प्रत्यावर्तन या कार्रवाई के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

केस का शीर्षकः मरियम खातून बनाम प्रधान सचिव गृह (पुलिस), पटना के जरिए बिहार राज्य

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