मानहानि मामले में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को राहत, हाईकोर्ट ने आपराधिक कार्यवाही पर लगाई रोक
Shahadat
6 Aug 2026 8:40 PM IST

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने संगरूर के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) के सामने इंडियन नेशनल कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ चल रही आपराधिक मानहानि की शिकायत पर कार्यवाही रोक दी।
यह मामला संगरूर के रहने वाले हितेश भारद्वाज की शिकायत से जुड़ा है, जिन्होंने कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा बजरंग दल के बारे में की गई टिप्पणियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। भारद्वाज ने कथित तौर पर 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस के चुनावी घोषणापत्र और उस समय दिए गए बयानों के आधार पर संगरूर कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई।
जस्टिस अमन चौधरी ने नोटिस जारी किया और निर्देश दिया,
"सुनवाई की अगली तारीख तक ट्रायल कोर्ट के सामने कार्यवाही रुकी रहेगी।"
मामले को 26.11.2026 के लिए सूचीबद्ध किया गया।
यह याचिका भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 528 और CrPC की धारा 482 के तहत दायर की गई, जिसमें 'हितेश भारद्वाज बनाम मल्लिकार्जुन खड़गे, अध्यक्ष, ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी, इंडियन नेशनल कांग्रेस' शीर्षक वाली शिकायत, समन जारी करने के आदेश और उससे जुड़ी सभी कार्यवाहियों को रद्द करने की मांग की गई।
याचिकाकर्ता के सीनियर वकील ने तर्क दिया कि समन जारी करने का आदेश प्री-समनिंग स्टेज (समन जारी होने से पहले के चरण) पर सुनवाई का कोई मौका दिए बिना पारित किया गया, जिससे यह BNSS की धारा 223(1) के प्रावधान का पालन नहीं करता और शुरू से ही अमान्य (void ab initio) है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के 'परविंदर सिंह बनाम डायरेक्टरेट ऑफ एनफोर्समेंट, 2026 SCC OnLine SC 903' के फैसले का हवाला दिया गया।
आगे यह भी कहा गया कि विवादित आदेश पारित करते समय BNSS की धारा 225 (पहले CrPC की धारा 202) के तहत अपेक्षित रिपोर्ट पर विचार नहीं किया गया। चूंकि याचिकाकर्ता ACJM, संगरूर के अधिकार क्षेत्र से बाहर रहता है, इसलिए ट्रायल कोर्ट के लिए उसे समन करने से पहले कथित अपराध की जांच या पड़ताल करना जरूरी था। इस मामले में वकील ने 'महमूद उल रहमान बनाम खाज़िर मोहम्मद टुंडा, (2015) 12 SCC 420' का हवाला दिया।
याचिका में यह भी कहा गया कि समन जारी करने का आदेश बिना किसी ठोस कारण के दिया गया; याचिकाकर्ता को समन करने के लिए कोई वजह नहीं बताई गई; ACJM ने बिना सोचे-समझे यांत्रिक तरीके से समन जारी किया था और शिकायत बिना किसी कानूनी अधिकार (locus standi) के दायर की गई।
इसके अलावा, यह भी कहा गया कि जिस संगठन ने अपराध होने का आरोप लगाया, उससे कोई लिखित अनुमति लिए बिना मूल शिकायतकर्ता का बेटा शिकायत को आगे नहीं बढ़ा सकता।
यह तर्क दिया गया कि शिकायत तुच्छ और बेबुनियाद है और यह कानून की प्रक्रिया का पूरी तरह से दुरुपयोग है; यह राजनीतिक और दुर्भावनापूर्ण कारणों से प्रेरित है और प्रचार पाने के मकसद से की गई मुकदमेबाजी (Publicity Litigation) जैसी है।
Title: Mallikarjun Kharge v. Hitesh Bhardwaj


