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क्या लॉकडाउन के नए दिशानिर्देश के साथ ही पूरा वेतन देने के बारे में एमएचए का आदेश अब लागू नहीं रहा?

LiveLaw News Network
20 May 2020 3:38 AM GMT
क्या लॉकडाउन के नए दिशानिर्देश के साथ ही पूरा वेतन देने के बारे में एमएचए का आदेश अब लागू नहीं रहा?
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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने लॉकडाउन के चौथे चरण (18 से 31 मई ) की घोषणा करते हुए नए दिशानिर्देश जारी किए, जिसने 29 मार्च को जारी मंत्रालाय के पूर्व दिशानिर्देशों को समाप्त कर दिया है जिसमें कंपनियों से अपने कर्मचारियों को लॉकडाउन के दौरान पूरा वेतन देने को कहा गया था।

मई 17 को जारी आदेश में कहा गया है,

"उनको छोड़कर जिनके बारे में इसमें अलग से बताया गया है, एनईसी ने आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 10(2)(i) के तहत जितने भी आदेश जारी हुए हैं वे सब 18 मई 2020 से लागू नहीं होंगे।"

यह ग़ौर करना ज़रूरी कि 29 मार्च का आदेश गृह सचिव ने आपदा प्रबंधन अधिनियम की राष्ट्रीय कार्यपालक समिति के अध्यक्ष होने के नाते जारी किया था।

29 मार्च के आदेश में कहा गया था :

"सभी कर्मचारी चाहे वे उद्योग में हैं या दुकानों में और वाणिज्यिक संस्थानों में उनको समय पर बिना किसी कटौती के लॉकडाउन की पूरी अवधि के लिए वेतन का भुगतान देय तिथि पर किया जाएगा।"

"अगर कोई मकान मालिक किसी श्रमिक या छात्र को अपना घर ख़ाली करने को कहता है तो उनके ख़िलाफ़ आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी।"

नवीनतम दिशानिर्देश में सिर्फ़ छह दिशा निर्देश ही हैं जो कि लॉकडाउन में फंसे लोगों के एसओपी के बारे में है। मार्च 29 के आदेश को इनमें शामिल नहीं किया गया है।

प्रभावी रूप से इसका मतलब यह हुआ कि मार्च 29 के दिशा निर्देश जो कि लॉकडाउन के दौरान कर्मचारियों को पूरा वेतन देने के बारे में है, अब 18 मई प्रभावी नहीं रहा।

सुप्रीम कोर्ट में मार्च 29 के दिशानिर्देशों की क़ानूनी वैधता के बारे में सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई हैं।

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि मार्च 29 के दिशानिर्देशों को लागू करने के लिए अथॉरिटीज़ किसी नियोक्ता के ख़िलाफ़ एक सप्ताह तक कोई कार्रवाई नहीं करेंगे।

गृह मंत्रालय के आदेश को असंगत और मनमाना क़रार देकर और नियोक्त के व्यापार और व्यवसाय करने के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करनेवाला बताते हुए इसे चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि चूंकि लॉकडाउन के कारण व्यवसाय पूरी तरह ठप है, नियोक्ताओं के लिए कर्मचारियों को पूरा वेतन देने का भार वहन करना मुश्किल है।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि यह निर्देश आपदा प्रबंधन अधिनियम के अधिकार क्षेत्र के बाहर है।

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