Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य सुर्खियां

"अधिकार के रूप में वित्तीय सहायता का दावा नहीं कर सकते": गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य आत्म-निर्भर योजना के तहत सहायता के लिए ऑटो रिक्शा चालक संघ की याचिका को खारिज किया

LiveLaw News Network
28 July 2021 6:15 AM GMT
अधिकार के रूप में वित्तीय सहायता का दावा नहीं कर सकते: गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य आत्म-निर्भर योजना के तहत सहायता के लिए ऑटो रिक्शा चालक संघ की याचिका को खारिज किया
x

गुजरात हाईकोर्ट ने दो रेलवे स्टेशनों ऑटो रिक्शा चालक संघों द्वारा राज्य सरकार से आत्म निर्भर गुजरात योजना के तहत वित्तीय सहायता की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने यह देखते हुए याचिका को खारिज कर दिया कि याचिकाकर्ता अधिकार के रूप में वित्तीय सहायता का दावा नहीं कर सकते हैं।

न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी और न्यायमूर्ति भार्गव डी. करिया की खंडपीठ ने यह देखते हुए कि सभी व्यवसाय और पेशे COVID-19 महामारी से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, कहा:

"यह नहीं कहा जा सकता है कि COVID-19 महामारी की कठोरता ने दुनिया भर के लोगों के जीवन और आजीविका को प्रभावित किया है और समाज के हर क्षेत्र को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाया है।"

इसके अलावा कोर्ट ने कहा:

"ऐसी परिस्थितियों में याचिकाकर्ता ऑटो रिक्शा चालकों के लिए वित्तीय सहायता या मौद्रिक लाभ प्राप्त करने के अधिकार के रूप में दावा नहीं कर सकते हैं। खासकर जब सभी व्यवसाय और पेशे COVID-19 महामारी के कारण बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।"

याचिकाकर्ताओं ने 12 मार्च, 2021 को राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। राज्य सरकार ने अपने आदेश में कहा था कि आत्म-निर्भार गुजरात सहाय योजना के मद्देनजर ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए एक अलग राहत पैकेज नहीं दिया जाएगा।

इसे देखते हुए कि याचिकाकर्ता यूनियनों के सदस्यों को लॉकडाउन की अवधि के लिए और उसके बाद आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 12 के मद्देनजर उनके परिवारों के अस्तित्व के लिए उचित वित्तीय सहायता की मांग की गई।

सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता केआर कोष्टी ने प्रस्तुत किया कि यूनियनों के सदस्यों को भारी वित्तीय नुकसान हुआ था और राज्य ने उन व्यक्तियों को कोई विशेष राहत या सुविधाएं नहीं दी थीं, जो असंगठित या स्व-नियोजित श्रमिकों के रूप में काम कर रहे हैं।

अत: यह निवेदन किया गया कि ऑटो रिक्शा चालकों को स्वावलंबी व्यक्ति के रूप में माना जाना चाहिए और आपदा प्रबंधन अधिनियम में निहित प्रावधानों के तहत वित्तीय सहायता प्रदान करके विशेष राहत पैकेज दिया जाना चाहिए।

कोर्ट ने शुरुआत में कहा,

"इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर लोगों की दुर्दशा को देखते हुए समय-समय पर मुफ्त भोजन, चिकित्सा सुविधाएं और आश्रय आदि के रूप में राहत प्रदान की है और आजीविका के नुकसान को पूरा करने के लिए अनुग्रह सहायता भी प्रदान की है।"

कोर्ट ने उक्त याचिका को खारिज करते हुए कहा:

"अन्यथा भी तय कानूनी स्थिति के अनुसार, नीतियों की समझदारी और सलाह आमतौर पर न्यायिक समीक्षा के लिए उत्तरदायी नहीं होती है, जब तक कि नीतियां वैधानिक या संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत न हों या मनमानी न हों।"

शीर्षक: जाग्रत ऑटो रिक्शा चालक संघ बनाम गुजरात राज्य

ऑर्डर डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें




Next Story