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टीआरपी घोटाले में कोई भी कठोर कार्रवाई करने से पहले अर्नब गोस्वामी को तीन दिन पहले नोटिस दें: बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस से कहा

LiveLaw News Network
24 March 2021 7:48 AM GMT
टीआरपी घोटाले में कोई भी कठोर कार्रवाई करने से पहले अर्नब गोस्वामी को तीन दिन पहले नोटिस दें: बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस से कहा
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को रिपब्लिक टीवी के एंकर अर्नब गोस्वामी की याचिका को स्वीकार करते हुए उन्हें गिरफ्तारी से राहत प्रदान की है। अपनी इस याचिका में अर्नब गोस्वामी ने टेलीविजन रेटिंग पॉइंट्स घोटाले में मुंबई पुलिस की जांच को चुनौती दी गई है।

जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस मनीष पितले की खंडपीठ ने पुलिस को निर्देश दिया कि यदि जांच के दौरान गोस्वामी के खिलाफ कोई भी कठोर कार्रवाई करने का फैसला किया जाता है, तो उन्हें गोस्वामी को तीन दिन पहले नोटिस देना होगा।

हालांकि गोस्वामी इस तरह के नोटिस के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए स्वतंत्र होंगे।

पीठ ने कहा,

"याचिकाकर्ता (अर्नब गोस्वामी) द्वारा गंभीर गलतफहमी का आरोप लगाया गया है।"

सुनवाई के दौरान मुंबई पुलिस के लिए मुख्य लोक अभियोजक दीपक ठाकरे ने अदालत को सूचित किया कि वे जांच पूरी करेंगे। इसके साथ ही याचिकाकर्ताओं को 12 सप्ताह के भीतर जांच पूरी करेंगे।

अदालत ने मुंबई पुलिस को अन्य चैनलों की जांच के लिए समय दिया है।

पीठ ने कहा कि भजनलाल के मामले के संदर्भ में जांच जारी रह सकती है।

पीठ ने कहा,

"जांच एजेंसी की जांच में इस स्तर पर अदालत द्वारा कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।"

अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए निम्नलिखित प्रश्नों का उल्लेख कियाः

1. क्या एफआईआर को रद्द करने के लिए की गई प्रार्थनाओं को अभियुक्त के रूप में पेश किए जाने वाले याचिकाकर्ताओं की अनुपस्थिति में निपटाया जा सकता है।

2. याचिकाकर्ता, जिसे एफआईआर में आरोपी बनाया गया है, उसकी गैरमौजूदगी में सीबीआई को जांच ट्रांसफर करने की सुनवाई की जा सकती है और याचिकाकर्ता, उनके एजेंट और कर्मचारियों के खिलाफ कोई भी कठोर कार्रवाई नहीं करने के निर्देश दिए गए।

3. क्या उत्तरदाताओं (मुंबई पुलिस) को याचिकाकर्ता को सिर पर अनिश्चित काल के लिए जांच की तलवार रखने की अनुमति दी जा सकती है।

4. "संदिग्ध" शब्द की विस्तारपूर्व व्याख्या करते हुए जांच अधिकारी जांच जारी रख सकता है।

5. क्या रिट याचिका में प्रार्थना को केवल याचिकाकर्ताओं के खिलाफ गंभीर दुर्भावना के आधार पर निपटाया जा सकता है, जब तक कि उन्हें एफआईआर में आरोपी नहीं माना गया।

मामले की अगली सुनवाई 28 जून को होगी।

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