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गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 'असम आंदोलन' को लेकर फेसबुक पोस्ट के माध्यम से 'सांप्रदायिक द्वैष' फैलाने के आरोपी-व्यक्ति को जमानत दी

LiveLaw News Network
21 Oct 2021 4:17 AM GMT
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम आंदोलन को लेकर फेसबुक पोस्ट के माध्यम से सांप्रदायिक द्वैष फैलाने के आरोपी-व्यक्ति को जमानत दी
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गुवाहाटी हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फेसबुक पोस्ट के माध्यम से सांप्रदायिक द्वैष फैलाने के एक आरोपी व्यक्ति अबू बक्कर सिद्दीकी को जमानत दी।

आरोपी ने कथित तौर पर फेसबुक पोस्ट के माध्यम से यह कहने की कोशिश की थी कि 1979 के असम आंदोलन के नेता हजारों लोगों की हत्या के बाद राज्य की सत्ता में आए थे।

न्यायमूर्ति हितेश कुमार सरमा की खंडपीठ ने हिरासत की अवधि (47 दिन) को ध्यान में रखते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को और हिरासत में रखना आवश्यक नहीं है और इसलिए उसे जमानत दी गई।

प्राथमिकी के अनुसार उसके खिलाफ आरोप यह है कि उन्होंने संदेश भेजने के लिए फर्जी फेसबुक अकाउंट का इस्तेमाल किया, जिसमें असम राज्य में 1979 के तत्कालीन असम आंदोलन का परोक्ष संदर्भ में सांप्रदायिक माहौल बनाने की कोशिश की थी।

कथित तौर पर उक्त फेसबुक पोस्ट ने संकेत दिया कि असम आंदोलन के नेता हजारों लोगों की हत्या के बाद राज्य की सत्ता में आए।

उपरोक्त संदेश भेजने के उक्त अपराध के लिए आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120(बी)/153ए(1)(ए)/153बी(1)(ए) और (सी)/298/505 (1) (बी)(सी)/505(2), गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 39 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66 (एफ) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

कोर्ट ने 6 अक्टूबर को आरोपी को 20,000 रुपए का निजी बॉन्ड भरने या इतनी ही राशि का दो जमानतदार पेश करने की शर्त करने और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कामरूप, अमिनगांव की संतुष्टि के साथ जमानत देने का निर्देश दिया।

इसके अलावा आरोपी द्वारा पूर्व लिखित अनुमति के बिना मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कामरूप, अमिनगांव के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र को नहीं छोड़ने का निर्देश दिया गया है।

यह ध्यान दिया जा सकता है कि असम आंदोलन [जिसे असम आंदोलन (1979-1985) भी कहा जाता है] एक लोकप्रिय विद्रोह/आंदोलन था जिसका उद्देश्य भारतीय क्षेत्र से अवैध अप्रवासियों (बांग्लादेश से संबंधित) को बाहर निकालना था। इस आंदोलन का नेतृत्व ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) और 'ऑल असम गण संग्राम परिषद' (AAGSP) ने किया था।

महत्वपूर्ण रूप से, आंदोलन 1985 में असम समझौते पर हस्ताक्षर के साथ समाप्त हुआ था।

केस का शीर्षक - अबू बक्कर सिद्दीकी बनाम असम राज्य

आदेश की कॉपी यहां पढ़ें:




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