सर्जरी का वैकल्पिक होना हिरासत में इलाज से मना करने का आधार नहीं: दिल्ली कोर्ट ने ताहिर हुसैन की सर्जरी 15 दिन में कराने का आदेश दिया
Shahadat
20 March 2026 6:50 PM IST

दिल्ली कोर्ट ने शुक्रवार को राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह यह सुनिश्चित करे कि दिल्ली दंगों के आरोपी ताहिर हुसैन की इनगुइनल हर्निया की सर्जरी 15 दिनों के भीतर हो जाए, और उसे अस्पताल के साथ-साथ जेल में भी सर्जरी के बाद की उचित देखभाल (Post-Operative Care) मुहैया कराई जाए।
कड़कड़डूमा कोर्ट के एडिशनल सेशन जज परवीन सिंह ने हुसैन द्वारा दायर अंतरिम जमानत याचिका का निपटारा किया। यह याचिका उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान दर्ज FIR 65/2020 के संबंध में दायर की गई थी।
मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, जैसा कि आदेश में दर्ज है, हुसैन के पेट की अगली दीवार (Anterior Abdominal Wall) के नाभि के ऊपरी हिस्से (Supra-Umbilical Region) में 2.3 सेमी का एक छेद या दोष पाया गया, जिससे होकर पेट की चर्बी (Fat) बाहर की ओर निकलती हुई दिखाई दे रही है (हर्निएट हो रही है)।
शुक्रवार को पारित आदेश में जज ने यह टिप्पणी की कि हुसैन को अस्पताल ले जाने में हुई देरी जेल अधिकारियों की रिपोर्ट से साफ तौर पर झलकती है।
कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि किसी व्यक्ति को सर्जरी की सलाह दी गई और वह सर्जरी वैकल्पिक (Elective) प्रकृति की है, उसे उस विकल्प का चुनाव करने के उसके अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
यह देखते हुए कि अब तक सर्जरी के लिए कोई तारीख तय नहीं की गई, कोर्ट ने कहा:
“यह स्पष्ट है कि राज्य ही आरोपी को अपनी हिरासत में रखे हुए है; यदि ऐसा न होता तो आरोपी अपनी पसंद के डॉक्टर से अपना इलाज करवाने के लिए स्वतंत्र होता, जो कि उसकी कैद (Incarceration) को देखते हुए अभी संभव नहीं है। इसलिए राज्य का यह कर्तव्य है कि वह आवश्यकतानुसार मेडिकल ट्रीटमेंट प्रदान करे, और उसे यह कार्य अत्यंत तत्परता के साथ करना होगा।”
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि हुसैन को त्वरित उपचार के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता, भले ही उसकी सर्जरी वैकल्पिक प्रकृति की ही क्यों न हो।
इस पर, दिल्ली पुलिस के विशेष लोक अभियोजक (SPP) ने कहा कि राज्य यह सुनिश्चित करेगा कि सर्जरी 15 दिनों के भीतर संपन्न हो जाए। साथ ही राज्य ही उसे सर्जरी के बाद की समस्त आवश्यक देखभाल प्रदान करेगा।
तदनुसार, जज ने आदेश दिया:
“आवेदक की सर्जरी, जैसा कि आवश्यक है, आज से 15 दिनों के भीतर संपन्न की जाएगी; बशर्ते कि कोई मेडिकल जटिलता (Medical Complication) सर्जरी में विलंब का कारण न बने। आवेदक को डॉक्टर की सिफारिशों के अनुरूप, अस्पताल और जेल—दोनों ही स्थानों पर—सर्जरी के बाद की समस्त आवश्यक देखभाल प्रदान की जाएगी।”
हाल ही में, एक अन्य जज ने दिल्ली दंगों की 'बड़ी साज़िश' से जुड़े मामले में हुसैन द्वारा दायर नियमित ज़मानत याचिका खारिज की थी। जज ने कहा कि 2024 में भी उन्हें यह राहत नहीं दी गई, और उस समय यह पाया गया था कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया (Prima-Facie) सही प्रतीत होते हैं।

