चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कपिल सिब्बल के गंभीर सवाल, बोले- 'इलेक्ट्रोरल रोल सिस्टम को किया जा रहा केंद्रीकृत'

  • चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कपिल सिब्बल के गंभीर सवाल, बोले- इलेक्ट्रोरल रोल सिस्टम को किया जा रहा केंद्रीकृत

    सीनियर एडवोकेट और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सिब्बल ने The Indian Express की एक खोजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि चुनाव आयोग के भीतर लिए गए कई महत्वपूर्ण फैसलों में आयोग के अन्य दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया।

    सिब्बल ने कहा कि यह मामला सिर्फ चुनाव आयोग के आंतरिक मतभेदों का नहीं, बल्कि देश की चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है।

    'तीन सदस्यीय आयोग में बहुमत से होने चाहिए फैसले'

    सिब्बल ने कहा कि चुनाव आयोग में Chief Election Commissioner (CEC) और दो Election Commissioners होते हैं और महत्वपूर्ण निर्णय आयोग की सामूहिक प्रक्रिया के तहत लिए जाने चाहिए।

    उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा CEC ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में करीब 40 IT portals और applications को दिल्ली में केंद्रीकृत करने जैसे महत्वपूर्ण फैसले किए गए, जबकि अन्य दोनों Election Commissioners—विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू—ने इन फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं।

    सिब्बल के मुताबिक, इन आपत्तियों के बावजूद व्यवस्था को केंद्रीकृत किया गया।

    EROs की शक्तियां कम करने का आरोप

    सिब्बल ने Electoral Registration Officers यानी EROs की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाया।

    उन्होंने कहा कि EROs आम तौर पर स्थानीय स्तर पर नियुक्त अधिकारी होते हैं और मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने तथा सुधार करने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    सिब्बल का आरोप है कि इन अधिकारियों की electoral database तक पहुंच को सीमित कर दिया गया और सिस्टम को दिल्ली से नियंत्रित किए जाने की दिशा में ले जाया गया।

    उन्होंने दावा किया कि इससे मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया में स्थानीय स्तर के अधिकारियों की भूमिका कमजोर हुई है।

    Form 6 में बदलाव पर भी सवाल

    नए मतदाताओं के registration के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में किए गए बदलावों को लेकर भी सिब्बल ने सवाल उठाए।

    उन्होंने आरोप लगाया कि Form 6 में माता-पिता और दादा-दादी से जुड़े विवरण जैसी अतिरिक्त जानकारी मांगी गई, जबकि इसके लिए संसद के स्तर पर नियमों में आवश्यक संशोधन नहीं किया गया।

    सिब्बल ने यह भी दावा किया कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की स्थिति में थे, उनसे ऐसे declarations या affidavits की मांग की गई, जिनमें उन्हें यह बताना था कि उन्होंने पहले कभी मतदान नहीं किया है।

    'दो चुनाव आयुक्त लगातार आपत्तियां दर्ज करते रहे'

    सिब्बल ने कहा कि Election Commissioners विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने अप्रैल 2025 से अगस्त 2026 के बीच कई मौकों पर चुनाव आयोग के भीतर लिए जा रहे फैसलों को लेकर आपत्तियां दर्ज कीं।

    उनके मुताबिक, इन आपत्तियों में Special Intensive Revision (SIR), administrative work allocation और electoral database से जुड़े फैसलों को लेकर सवाल उठाए गए थे।

    सिब्बल ने कहा कि यदि दो Election Commissioners किसी महत्वपूर्ण फैसले पर लिखित रूप से आपत्ति दर्ज करते हैं, तो इन आपत्तियों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और निर्णय प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।

    West Bengal में voter deletions को लेकर दावा

    सिब्बल ने West Bengal में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया।

    उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए और SIR की प्रक्रिया के कारण कई genuine voters प्रभावित हुए।

    हालांकि, इन दावों के संबंध में वास्तविक संख्या, प्रत्येक deletion की वैधता और जिम्मेदारी तय करने के लिए संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड तथा न्यायिक/प्रशासनिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

    ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सिब्बल ने CEC ज्ञानेश कुमार को तत्काल निलंबित करने की मांग की।

    उन्होंने मौजूदा voter list में किए जा रहे बदलावों को रोकने, पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने और कथित तौर पर आदेश देने वाले अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग भी की।

    सिब्बल ने यह भी कहा कि यदि जांच में यह साबित होता है कि चुनावी प्रक्रिया गंभीर रूप से प्रभावित हुई है, तो संबंधित चुनावों को दोबारा कराने पर भी विचार किया जाना चाहिए।

    'लोकतांत्रिक प्रक्रिया की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण विरोध करें'

    सिब्बल ने राजनीतिक दलों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया की रक्षा के लिए आवश्यक होने पर शांतिपूर्ण विरोध करने की अपील की।

    उन्होंने कहा कि Electoral Roll किसी भी लोकतांत्रिक चुनाव की बुनियादी जरूरत है और मतदाता सूची में पारदर्शिता तथा विश्वसनीयता बनाए रखना जरूरी है।

    हालांकि, सिब्बल द्वारा उठाए गए ये आरोप और मांगें उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। इनके संबंध में अंतिम निष्कर्ष संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड, चुनाव आयोग के जवाब और यदि कोई जांच/न्यायिक प्रक्रिया होती है, उसके निष्कर्षों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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