NGT का एमपी सरकार को निर्देश: भोपाल में वन भूमि की सीमा तय करें, 3 महीने में अवैध कब्ज़े हटाएं
Shahadat
22 Aug 2026 10:10 AM IST

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सेंट्रल ज़ोन बेंच ने भोपाल में सड़कों के बीच के हिस्से (सेंट्रल वर्ज) पर हुए कब्ज़ों को व्यवस्थित तरीके से हटाने का निर्देश दिया। इसके लिए तार की बाड़ लगाने, पेड़-पौधे लगाने और जियो-टैगिंग जैसे उपाय करने को कहा गया। साथ ही ग्रीन बेल्ट वाले इलाके में कंक्रीट का निर्माण करने पर भी रोक लगाई गई।
ट्रिब्यूनल ने भोपाल के कलेक्टर और डिविज़नल फॉरेस्ट ऑफिसर को संयुक्त सर्वे करने और ज़िले में दर्ज पूरी वन भूमि की सीमा तय करने का निर्देश दिया। यह काम मुख्य रूप से GIS (जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम)/GPS और सैटेलाइट इमेजिंग के ज़रिए किया जाना चाहिए। इसके बाद संयुक्त रिपोर्ट सौंपी जानी चाहिए। जहां भी अवैध कब्ज़ा मिले और कोई कानूनी अड़चन न हो, वहां अधिकारियों को कानून के अनुसार तीन महीने के भीतर कब्ज़ा हटाने का निर्देश दिया गया।
ज्यूडिशियल मेंबर जस्टिस शिव कुमार सिंह और एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार चतुर्वेदी की बेंच ने कई निर्देश जारी किए। उन्होंने गौर किया कि 'इंडियन स्टेट फॉरेस्ट रिपोर्ट (ISFR) 2023' के अनुसार, भोपाल में ज़िले के कुल क्षेत्रफल का 12% से भी कम हिस्सा वन क्षेत्र के अंतर्गत आता है। साथ ही 2021 से 2023 के बीच अकेले भोपाल ज़िले में वन क्षेत्र में लगभग 0.54 वर्ग किलोमीटर की कमी आई। ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि ISFR का यह राष्ट्रीय डेटा दिखाता है कि वन विभाग ने वन क्षेत्र में हुई बढ़ोतरी की गणना "गलत तरीके से" की थी।
इसके साथ ही याचिका का निपटारा किया गया।
Case title: Dr. Subhash C. Pandey v/s Bhopal Municipal Corporation & Others


