दिल्ली दंगे: BJP नेता कपिल मिश्रा के खिलाफ FIR की मांग वाली याचिका खारिज
Shahadat
13 March 2026 6:05 PM IST

दिल्ली कोर्ट ने BJP नेता और दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश देने से इनकार किया। उन पर 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में कथित तौर पर शामिल होने का आरोप है।
एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने मोहम्मद इलियास नाम के एक व्यक्ति द्वारा दायर मामले में यह आदेश पारित किया।
जज ने इलियास की FIR दर्ज करने की याचिका खारिज की।
कोर्ट ने कहा,
"उपरोक्त निष्कर्षों को ध्यान में रखते हुए BNSS की धारा 175(3) के तहत दायर याचिका के आधार पर BJP विधायक कपिल मिश्रा और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग को खारिज किया जाता है।"
कोर्ट ने आगे कहा,
"इस याचिका को अब एक शिकायत के तौर पर माना जाएगा। वहीं शिकायतकर्ता को BNSS की धारा 223(1) के साथ पढ़ी जाने वाली धारा 210(1)(a) के तहत अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने की पूरी आज़ादी है।"
अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 मार्च को होगी, जिसमें शिकायतकर्ता से पूछताछ की जाएगी।
पिछले साल, दिल्ली पुलिस ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि दंगों के मामले में मिश्रा को फंसाने की एक सोची-समझी साज़िश रची गई।
दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि BJP नेता को इस मामले में जान-बूझकर फंसाया जा रहा है और 2020 के दंगों में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।
इसके अलावा, अभियोजन पक्ष ने 'दिल्ली प्रोटेस्ट सपोर्ट ग्रुप' (DPSG) समेत कई WhatsApp ग्रुप्स की चैट्स का हवाला देते हुए कहा कि कथित साज़िश रचने वाले सोशल मीडिया पर मिश्रा के खिलाफ एक गलत नैरेटिव (कहानी) गढ़ने की कोशिश कर रहे थे, और #ArrestKapilMishra हैशटैग का इस्तेमाल करके एक ज़ोरदार अभियान चला रहे थे।
पुलिस ने यह भी बताया कि दंगों को भड़काने में मिश्रा की कथित भूमिका की पूरी जांच की जा चुकी है और जांच में उनके खिलाफ कोई भी आपत्तिजनक या दोषी ठहराने वाला सबूत नहीं मिला है।
अक्टूबर, 2024 में दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया था कि ये दंगे एक सोची-समझी साज़िश का नतीजा थे। इस साज़िश का मकसद मस्जिदों या मजारों के आस-पास और मुख्य सड़कों पर मौजूद मुस्लिम-बहुल इलाकों में हिंसा भड़काना और अशांति फैलाना था। इसका मकसद यह था कि जब भीड़ एक तय संख्या तक पहुंच जाए, और सही समय आ जाए तो "विरोध प्रदर्शनों" को "चक्का जाम" में बदल दिया जाए।
पुलिस ने यह भी बताया कि उस समय WhatsApp पर ऐसे मैसेज फैलाए जा रहे थे, जिनमें यह अफवाह उड़ाई जा रही थी कि कपिल मिश्रा की अगुवाई वाली भीड़ ने ही हिंसा की शुरुआत की थी।
शिकायतकर्ता मोहम्मद इलियास ने मिश्रा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की। मिश्रा उस समय दयालपुर पुलिस स्टेशन के SHO थे। इसके अलावा, इलियास ने पांच अन्य लोगों के खिलाफ भी FIR की मांग की, जिनमें BJP विधायक मोहन सिंह बिष्ट और BJP के पूर्व विधायक जगदीश प्रधान और सतपाल संसद शामिल थे।
इलियास ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि 23 फरवरी, 2020 को उन्होंने मिश्रा और उनके साथियों को सड़क रोकते हुए और सड़क किनारे ठेले लगाने वालों के ठेलों को तोड़ते हुए देखा। उन्होंने आगे दावा किया कि उस समय के डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (उत्तर-पूर्व) और अन्य पुलिसकर्मी मिश्रा के साथ खड़े थे और प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दे रहे थे कि वे उस जगह को खाली कर दें, वरना उन्हें इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

