दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस हिंसा का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, पुलिस कमिश्नर के खिलाफ अवमानना याचिका
Praveen Mishra
11 Oct 2026 8:46 AM IST

दिल्ली में 10 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा कथित रूप से अत्यधिक बल प्रयोग किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की गई है। याचिका में दिल्ली पुलिस कमिश्नर आईपीएस अनुराग कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए आरोप लगाया गया है कि पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों के साथ हिंसा की और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों का उल्लंघन किया।
एडवोकेट अमन प्रसाद द्वारा दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने कई निहत्थे नागरिकों को हिरासत में लिया और उनके साथ मारपीट की। याचिका में महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित बदसलूकी और पुलिसकर्मियों द्वारा बिना स्पष्ट नेमप्लेट या पहचान चिह्न के ड्यूटी करने का मुद्दा भी उठाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों के उल्लंघन का आरोप
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी बनाम भारत संघ मामले में पारित पूर्व आदेशों और 9 अक्टूबर को एम.ए. बेबी बनाम भारत संघ मामले में दिए गए आदेश का हवाला दिया है।
शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी मामले में दिल्ली में छात्र प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस ज्यादती के आरोपों पर विचार किया गया था। वहीं, एम.ए. बेबी मामले में विरोध प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक परिवहन पर लगाए गए प्रतिबंधों से संबंधित निर्देश दिए गए थे।
याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने और असहमति व्यक्त करने के नागरिकों के अधिकारों पर जोर दिया है। साथ ही, पुलिस कार्रवाई में आनुपातिकता बनाए रखने और संभावित कानून-व्यवस्था की समस्या के आधार पर मौलिक अधिकारों पर व्यापक प्रतिबंध लगाने से बचने की आवश्यकता बताई है।
जंतर-मंतर, INA और दिल्ली हाट के पास हिंसा का आरोप
याचिका के अनुसार, जंतर-मंतर, INA और दिल्ली हाट के आसपास प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर शारीरिक हिंसा का सामना करना पड़ा।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि INA के पास एक प्रदर्शनकारी को पुलिसकर्मियों ने उठाकर जमीन पर पटक दिया और उसकी पिटाई की। इसके अलावा, सीनियर एडवोकेट शदान फरासत को सफदरजंग एयरपोर्ट फ्लाईओवर के पास पुलिसकर्मियों द्वारा सड़क पर घसीटे जाने का आरोप भी लगाया गया है।
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि INA के पास एक महिला के कपड़े खींचे जाने की कथित घटना में हस्तक्षेप करने वाले एक युवा अधिवक्ता की पिटाई की गई। आरोप है कि अधिवक्ता के सिर में चोट आई और उन्हें हिरासत में लेने के बाद छतरपुर एन्क्लेव के एक अस्पताल ले जाया गया।
महिला प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों के साथ कथित बदसलूकी
याचिका में आरोप लगाया गया है कि महिला प्रदर्शनकारियों के साथ पुरुष पुलिसकर्मियों ने बदसलूकी की। इसमें कुछ वीडियो का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें कथित तौर पर एक महिला को हिरासत में लेने वाली बस के अंदर बालों से घसीटते हुए और एक महिला पत्रकार को सड़क पर घसीटकर बस की ओर ले जाते हुए दिखाए जाने का दावा है।
इसके अलावा, Scroll के पत्रकार आयुष तिवारी को एचकेएस सुरजीत भवन के बाहर हिरासत में लिए जाने का आरोप लगाया गया है। याचिका के अनुसार, पत्रकार प्रदर्शन की रिपोर्टिंग कर रहे थे और उन्होंने अपना प्रेस पास भी दिखाया था।
पुलिसकर्मियों की पहचान का मुद्दा भी उठाया
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन स्थलों पर तैनात कई पुलिसकर्मियों ने स्पष्ट नेमप्लेट या पहचान चिह्न नहीं पहने थे। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी भीड़ नियंत्रण के दौरान कार्रवाई करने वाले पुलिस अधिकारियों की पहचान सुनिश्चित करने के मुद्दे पर ध्यान दे चुका है।
याचिका में इस संबंध में जवाबदेही तय करने की मांग की गई है, ताकि कथित बल प्रयोग में शामिल अधिकारियों और उनके वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच हो सके।
57 में से 45 मेट्रो स्टेशन बंद करने का भी आरोप
याचिका में दावा किया गया है कि प्रदर्शन के दौरान 57 में से 45 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए थे। इसके अलावा, सड़कें अवरुद्ध करने, लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने और मध्य दिल्ली के कुछ हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद करने के आरोप भी लगाए गए हैं।
याचिकाकर्ता का कहना है कि ये कदम सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश के विपरीत थे। उस आदेश में सार्वजनिक परिवहन पर प्रतिबंधों को आनुपातिक रखने और संभावित भीड़ को नियंत्रित करने के नाम पर आवश्यक सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाने की बात कही गई थी।
पुलिस ज्यादती की जांच के लिए गठित समिति का भी हवाला
याचिका में शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी मामले में सुप्रीम कोर्ट के 28 जुलाई और 18 अगस्त के आदेशों का भी उल्लेख किया गया है। इन आदेशों के संदर्भ में याचिकाकर्ता ने बताया कि कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों पर विचार किया था और पुलिस ज्यादती की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की थी।
इस जांच के दायरे में महिला प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार, बल प्रयोग और पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही जैसे मुद्दे शामिल थे।
दिल्ली पुलिस कमिश्नर के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की मांग
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि दिल्ली पुलिस कमिश्नर के खिलाफ पूर्व आदेशों की कथित जानबूझकर अवहेलना के लिए अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए। इसके साथ ही, कथित उल्लंघनों के लिए जवाबदेही तय करने और उचित निर्देश जारी करने की मांग की गई है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, याचिका का उल्लेख रविवार को जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की खंडपीठ के समक्ष किए जाने की संभावना है। यह पीठ दिल्ली में मेट्रो स्टेशन बंद करने और ट्रेनें रद्द करने से संबंधित एक अन्य अवमानना याचिका तथा सीनियर एडवोकेट मेनेका गुरुस्वामी द्वारा राजनीतिक नेताओं की कथित हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर भी सुनवाई कर रही है।

