दिल्ली PG हादसा: कोर्ट ने बिल्डिंग मालिक के बेटे और अन्य को दो दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा

Shahadat

10 Sept 2026 9:34 AM IST

  • दिल्ली PG हादसा: कोर्ट ने बिल्डिंग मालिक के बेटे और अन्य को दो दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा

    सत्य निकेतन PG हादसे के मामले में दिल्ली कोर्ट ने बुधवार को बिल्डिंग मालिक के बेटे महेश गुप्ता और दो अन्य लोगों को दो दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया।

    यह आदेश पटियाला हाउस कोर्ट के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास कौतुक भारद्वाज ने दिया।

    पुलिस कस्टडी में भेजे गए अन्य दो लोगों में PG ऑपरेटर सुधांशु और बिल्डिंग कॉन्ट्रैक्टर सानोज शामिल हैं।

    दिल्ली पुलिस ने तीनों आरोपियों की तीन दिन की पुलिस कस्टडी की मांग की थी।

    गौरतलब है कि 7 सितंबर को बिल्डिंग मालिक हरिराम गुप्ता और उनकी पत्नी उर्मिला को इस मामले में ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजा गया। महेश को दो दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया, जिसकी अवधि आज खत्म हो गई।

    शहर के सत्य निकेतन इलाके में 6 सितंबर को पांच मंजिला PG या हॉस्टल की बिल्डिंग ढह गई थी। इस हादसे में कई छात्रों की मौत और घायल होने की खबर है।

    बाद में बिल्डिंग के मालिक हरिराम को दिल्ली पुलिस ने राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार किया। इस मामले में उनके बेटे महेश और पत्नी उर्मिला को भी गिरफ्तार किया गया।

    दिल्ली पुलिस के अनुसार, बिजली का कनेक्शन हरिराम के नाम पर है। आरोप है कि महेश मैनेजमेंट का काम संभाल रहे थे और कागजों पर प्रॉपर्टी हरिराम की पत्नी उर्मिला के नाम पर है।

    दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास लड़कों के लिए बने इस PG (पेइंग गेस्ट) की बिल्डिंग दोपहर करीब 1.30 बजे ढह गई, जब इसके बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बेसमेंट में पानी भरा हुआ था, जिससे स्ट्रक्चर कमजोर हो सकता था।

    दिल्ली पुलिस ने साउथ कैंपस पुलिस स्टेशन में तीनों के खिलाफ मामला दर्ज किया। उन पर गैर-इरादतन हत्या, बिल्डिंग के रखरखाव में लापरवाही और दूसरों की सुरक्षा को खतरे में डालने जैसे आरोप लगाए गए।

    इसी मामले से जुड़ी एक और घटनाक्रम में दिल्ली हाईकोर्ट ने अधिकारियों से कहा है कि वे हादसे से प्रभावित छात्रों की जान बचाने के लिए अपनी कोशिशें दोगुनी करें।

    कोर्ट ने MCD को निर्देश दिया कि वह इस मामले को अपने सबसे ऊंचे एग्जीक्यूटिव लेवल पर उठाए और जांच करवाए कि क्या ढही हुई बिल्डिंग वैध अनुमति के साथ बनाई गई या नहीं। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अगर यह पाया जाता है कि निर्माण कार्य वैध अनुमति के बिना किया गया तो MCD इस चूक के लिए दोषी अधिकारी या कर्मचारियों की ज़िम्मेदारी तय करेगी।

    इस घटना के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के सभी कॉलेजों में हॉस्टल की सुविधाएँ उपलब्ध कराने की मांग करते हुए हाई कोर्ट में एक PIL भी दायर की गई।

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