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दिल्ली हाईकोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबंधित नियमों की अधिसूचना जारी की

LiveLaw News Network
28 Oct 2021 5:15 AM GMT
दिल्ली हाईकोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबंधित नियमों की अधिसूचना जारी की
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दिल्ली हाईकोर्ट ने अदालतों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के उपयोग से संबंधित प्रक्रिया को समेकित, एकीकृत और सुव्यवस्थित करने वाले दिल्ली हाईकोर्ट नियम, 2021 से संबंधित अधिसूचना जारी की।

हाईकोर्ट ने यह अधिसूचना 26 अक्टूबर को आधिकारिक राजपत्र के माध्यम से जारी की।

नियमों में पांच अध्याय और दो अनुसूचियां हैं। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग वाले चैप्टर में वीसी की परिभाषाओं, सामान्य सिद्धांतों और प्रक्रिया के बारे में बताया गया है। साथ ही अनुसूचियों में आचार संहिता और वीडियो कॉन्फ्रेंस के लिए अनुरोध प्रपत्र निर्धारित किया गया।

नियमों के अनुसार, कार्यवाही का कोई भी पक्ष या गवाह अनुरोध प्रपत्र के माध्यम से अनुरोध करके वर्चुअल सुनवाई के लिए अनुरोध कर सकता है।

नियमों में कहा गया,

"इस तरह के अनुरोध की प्राप्ति पर और सभी संबंधित व्यक्तियों को सुनने पर न्यायालय यह सुनिश्चित करने के बाद एक उचित आदेश पारित करेगा कि निष्पक्ष सुनवाई में बाधा डालने या कार्यवाही में देरी करने के लिए तो आवेदन दायर नहीं किया गया है।"

नियम यह भी कहते हैं कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग शुरू होने से पहले सभी पक्षकारों की उपस्थिति दर्ज की जाएगी।

नियमों में कहा गया,

"यह सुनिश्चित करने के लिए कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग निर्बाध रूप से आयोजित की जाए, कनेक्टिविटी में आने वाली कठिनाइयों को कोर्ट के आधिकारिक ईमेल पते और कोर्ट प्वाइंट समन्वयक के मोबाइल नंबर पर जल्द से जल्द अदालत के ध्यान में लाया जाना चाहिए। इसे वर्चुअल सुनवाई शुरू होने से पहले प्रतिभागी को अदालत के सामने प्रस्तुत करना चाहिए।"

इसके अलावा, लाइव स्ट्रीमिंग की शुरुआत की ओर इशारा करते हुए नियम 16 ​कार्यवाही देखने के लिए उत्सुक उन व्यक्तियों को अनुमति देने का प्रावधान करता है जो मामले के पक्षकार नहीं हैं।

उक्त नियम में कहा गया कि ओपन कोर्ट की कार्यवाही की आवश्यकता का पालन करने के लिए आम नागरिक को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की जाने वाली अदालत की सुनवाई को देखने की अनुमति दी जाएगी। इसके सिवा कि लिखित में दर्ज की गई कार्यवाही को कैमरे में दर्ज करने के लिए आदेश दिया गया हो।

इस संबंध में नियम कहते हैं,

"ओपन कोर्ट की कार्यवाही की आवश्यकता का पालन करने के लिए आम नागरिकों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित अदालत की सुनवाई देखने की अनुमति दी जाएगी। इसके सिवा कि कैमरे में आयोजित की जाने वाली लिखित रूप में दर्ज की गई कार्यवाही के आदेश को छोड़ दिया जाए। न्यायालय कार्यवाही तक पहुंचने के लिए लिंक (उपलब्ध बैंडविड्थ के अनुरूप) उपलब्ध कराने का प्रयास करेगा।"

नियम में कहा गया,

"न्यायालय कार्यवाही तक पहुँचने के लिए पर्याप्त लिंक (उपलब्ध बैंडविड्थ के अनुरूप) उपलब्ध कराने का प्रयास करेगा। वहीं बाद में इस संबंध में किसी भी शिकायत पर विचार नहीं किया जाएगा।"

निर्बाध वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रिया प्रदान करने वाले नियम 10 में कहा गया कि अधिवक्ता या आवश्यक व्यक्ति न्यायालय द्वारा जारी आदेश में निर्दिष्ट तिथि और समय पर एक निर्दिष्ट रिमोट पॉइंट से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा न्यायालय को संबोधित करेंगे।

नियम में कहा गया,

"दूरस्थ बिंदु पर समन्वयक की उपस्थिति आवश्यक नहीं होगी, जहां अदालत के समक्ष एक वकील या पक्ष द्वारा व्यक्तिगत रूप से तर्क दिया जाना है।"

ऐसी सुनवाई में पालन की जाने वाली आचार संहिता के संबंध में अनुसूची एक में कहा गया कि सभी प्रतिभागी कार्यवाही की गरिमा के अनुरूप पोशाक पहनेंगे।

अधिवक्ताओं को अधिवक्ता अधिनियम, 1961 के तहत निर्धारित पेशेवर पोशाक में उचित रूप से तैयार होकर आने की जरूरत है। वहीं पुलिस अधिकारियों को संबंधित क़ानून या आदेशों के तहत पुलिस अधिकारियों के लिए निर्धारित वर्दी में उपस्थित होने का निर्देश दिया जाता है।

नियम कहते हैं,

"न्यायिक अधिकारियों और अदालत के कर्मचारियों के लिए पोशाक हाईकोर्ट द्वारा उस संबंध में निर्धारित प्रासंगिक नियमों में निर्दिष्ट होगी। ड्रेस कोड के बारे में पीठासीन न्यायाधीश या अधिकारी का निर्णय अंतिम होगा।"

इसके अलावा, नियम में कहा गया,

"प्रत्येक प्रतिभागी शिष्टाचार और प्रोटोकॉल का पालन करेगा जैसे कि किसी फिजिकल कोर्ट में पालन किए जाते हैं। न्यायाधीशों को "मैडम/सर" या "योर ऑनर" के रूप में संबोधित किया जाएगा। अधिकारियों को उनके पदनाम जैसे "बेंच अधिकारी/कोर्ट मास्टर" द्वारा संबोधित किया जाएगा। अधिवक्ताओं को "अधिवक्ता/वरिष्ठ अधिवक्ता" के रूप में संबोधित किया जाएगा।

नियम पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



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