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दिल्ली हाईकोर्ट ने दंगों के पीड़ितों की दुकान जलाने और लूट से हुए नुकसान के लिए 5 लाख रुपये मुआवजे की मांग करने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया

LiveLaw News Network
7 April 2021 5:32 AM GMT
दिल्ली हाईकोर्ट ने दंगों के पीड़ितों की दुकान जलाने और लूट से हुए नुकसान के लिए 5 लाख रुपये मुआवजे की मांग करने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया
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दिल्ली हाईकोर्ट दिल्ली दंगों, 2020 के पीड़ितों द्वारा दायर उत्तर-पूर्वी दिल्ली के शिव विहार में उनकी किराए की दुकान को लूटने, जलाने और नष्ट करने से हुए नुकसान के लिए 5 लाख रूपये की मुआवजे की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह ने सईद अहमद खान की याचिका पर उपायुक्त (डीसी) और उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) से जवाब मांगा और अन्य समान मामलों के एक संग्रह के साथ 26 अप्रैल को आगे की सुनवाई के लिए मामले को निर्धारित किया।

याचिका में AAP के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार द्वारा तैयार दिल्ली दंगा पीड़ितों की मदद के लिए दिल्ली सरकार की सहायता योजना का हवाला दिया गया, जिसके अनुसार, याचिकाकर्ता ने स्थायी मुआवजे के रूप में 5 लाख रुपये और अंतरिम मुआवजे के रूप में 50,000 रूपये के लिए अर्हता प्राप्त करने का दावा किया। याचिकाकर्ता ने कहा कि दंगा पीड़ितों के परिवारों को वर्तमान समय में उनके पैरों पर फिर से खड़ा करने के लिए मुआवजा आवश्यक है।

"समग्र मुआवजे" के लिए प्रार्थना करते हुए दलील में कहा गया है कि अब तक यह सूचित है कि पीड़ितों के पुनर्वास के लिए प्रयास करने के बजाय, जवाबदेह अधिकारियों ने अधिक दुःख और संकट खड़ा किया है। याचिका में कहा गया कि मुआवजा आवश्यक है इसके माध्यम से, "सरकार अपनी गलतियों को सुधारने की कोशिश करती है और हिंसा के पीड़ितों को उनकी पिछली स्थिति में वापस लाने के लिए एक ईमानदार प्रयास करती है, जैसा कि वे हिंसा से पहले थे।"

इस योजना के लिए असिंचित वाणिज्यिक इकाइयों के लिए 5 लाख रूपये निर्धारित हैं।

वाद के अनुसार, कथित तौर पर खान को पिछले साल 25 फरवरी को अपने दोस्त अरविंद के एक फोन कॉल से अपनी दुकान को हुए नुकसान की खबर मिली थी। इसी दोस्त ने खान को शिव विहार में आने से सावधान किया गया था, क्योंकि यह क्षेत्र अस्थिर था और मुस्लिम समुदाय के लिए खतरनाक था।"

याचिकाकर्ता ने दिल्ली सरकार को दिल्ली दंगा पीड़ितों के लिए वर्तमान सरकारी सहायता योजना को संशोधित करने और दंगा के दौरान आवासीय और व्यावसायिक स्थानों की लूट, चोरी और बर्बरता को ध्यान में रखते हुए अदालत से निर्देश देने की मांग की है।

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