हाईकोर्ट का जामिया को निर्देश- सभी महिला फैकल्टी सदस्यों के लिए खास तौर पर टॉयलेट की सुविधा सुनिश्चित किया जाए

Shahadat

8 Sept 2026 3:11 PM IST

  • हाईकोर्ट का जामिया को निर्देश- सभी महिला फैकल्टी सदस्यों के लिए खास तौर पर टॉयलेट की सुविधा सुनिश्चित किया जाए

    दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) में महिला फैकल्टी सदस्यों के लिए खास तौर पर तय की गई टॉयलेट सुविधा का इस्तेमाल सभी महिला फैकल्टी सदस्य करेंगी, और किसी भी व्यक्ति को उस पर ताला-चाबी लगाने की इजाज़त नहीं होगी।

    जस्टिस मिनी पुष्करणा ने यूनिवर्सिटी के इस बयान को रिकॉर्ड पर लिया कि दूसरी मंज़िल पर मौजूद टॉयलेट को खास तौर पर महिला फैकल्टी सदस्यों और दिव्यांग (PWD) महिलाओं के लिए तय किया जाएगा।

    कोर्ट JMI में सीनियर प्रोफेसर के तौर पर काम कर रही प्रोफेसर सुजाता ऐश्वर्या की याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

    यूनिवर्सिटी के वकील ने कोर्ट को एक दस्तावेज़ सौंपा जिसमें बताया गया कि यह फ़ैसला लिया गया कि हर बिल्डिंग की पहली मंज़िल पर महिला स्टाफ़ के लिए एक टॉयलेट खास तौर पर तय किया जाएगा।

    ऐश्वर्या के वकील ने कहा कि हालांकि एक बिल्डिंग की दूसरी मंज़िल पर मौजूद टॉयलेट को महिला फैकल्टी सदस्यों और दिव्यांग महिलाओं के लिए तय किया गया है, लेकिन उसे पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए उपलब्ध करा दिया गया।

    कोर्ट ने JMI के इस बयान को रिकॉर्ड पर लिया कि संबंधित टॉयलेट सिर्फ़ महिलाओं के लिए ही होना चाहिए। कोर्ट ने यह बयान भी रिकॉर्ड किया कि यह सुविधा एक हफ़्ते के अंदर उपलब्ध करा दी जाएगी।

    यूनिवर्सिटी ने यह भी भरोसा दिलाया कि वे दिव्यांग पुरुषों के लिए अलग इंतज़ाम करेंगे।

    कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा,

    "यह बताने की ज़रूरत नहीं है कि महिला फैकल्टी सदस्यों के लिए तय किए गए खास टॉयलेट का इस्तेमाल सभी महिला फैकल्टी सदस्य करेंगी, और किसी भी व्यक्ति को उस टॉयलेट पर ताला-चाबी लगाने की इजाज़त नहीं होगी।"

    ऐश्वर्या का मामला यह था कि 'सेंटर फ़ॉर वेस्ट एशियन स्टडीज़' में एक रेस्टरूम सुविधा थी, जिसका वह इस्तेमाल करती थीं, और उस तक पहुंच को ताला लगाकर और कुछ कर्मचारियों को ही चाबी देकर कंट्रोल किया जाता था।

    उन्होंने कहा कि जब इस सुविधा को प्रतिबंधित सुविधा के तौर पर नहीं माना गया और इसे आम इस्तेमाल के लिए खोल दिया गया, तो साफ़-सफ़ाई की हालत खराब हो गई, जिससे उनके लिए सम्मान और आराम के साथ उस सुविधा का इस्तेमाल करना मुश्किल हो गया।

    Title: PROF SUJATA ASHWARYA v. JAMIA MILLIA ISLAMIA & ORS

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