जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा के खिलाफ पोस्ट मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा कदम, अरविंद केजरीवाल समेत AAP नेताओं को आपराधिक अवमानना नोटिस

Praveen Mishra

19 May 2026 12:35 PM IST

  • जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा के खिलाफ पोस्ट मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा कदम, अरविंद केजरीवाल समेत AAP नेताओं को आपराधिक अवमानना नोटिस

    दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक एवं पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित पार्टी के कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) कार्यवाही में नोटिस जारी किया।

    यह कार्यवाही जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा के विरुद्ध सोशल मीडिया पर कथित रूप से चलाए गए “अपमानजनक और लक्षित अभियान” को लेकर शुरू की गई है।

    जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुदेजा की खंडपीठ ने सभी कथित अवमाननाकारियों को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

    अदालत ने साथ ही रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की प्रतियां सुरक्षित रखी जाएं, जिनके आधार पर अवमानना कार्यवाही प्रारंभ की गई। अदालत ने कहा कि एकल न्यायाधीश द्वारा दिए गए आदेश में सोशल मीडिया पोस्ट और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड पर भरोसा किया गया है, इसलिए इन सामग्रियों को संरक्षित कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।

    यह मामला दिल्ली आबकारी नीति (Excise Policy) मामले से जुड़ा है, जिसमें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा सभी आरोपियों को डिस्चार्ज किए जाने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। इस मामले की सुनवाई जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा कर रही थीं। हालांकि, बाद में उन्होंने यह मामला किसी अन्य पीठ को स्थानांतरित कर दिया।

    जस्टिस शर्मा ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, विनय मिश्रा, दुर्गेश पाठक और सौरभ भारद्वाज के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू की थी। अदालत ने यह संज्ञान उन सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो के आधार पर लिया था, जो न्यायाधीश के स्वयं को मामले से अलग (recuse) न करने के निर्णय के बाद साझा किए गए थे।

    दरअसल, अरविंद केजरीवाल और अन्य आरोपियों ने जस्टिस शर्मा के समक्ष निष्पक्ष सुनवाई को लेकर आशंका जताते हुए उनसे मामले की सुनवाई से अलग होने की मांग की थी। जस्टिस शर्मा ने इन आवेदनों को खारिज कर दिया और स्वयं मामले की सुनवाई जारी रखने का निर्णय लिया। इसके बाद केजरीवाल और सिसोदिया ने अदालत को पत्र लिखकर कहा कि वे न्यायमूर्ति शर्मा की अदालत की कार्यवाही का बहिष्कार करेंगे और न तो व्यक्तिगत रूप से और न ही वकील के माध्यम से पेश होंगे।

    उल्लेखनीय है कि 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में सभी 23 आरोपियों, जिनमें अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और के. कविता शामिल थे, को डिस्चार्ज कर दिया था। ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश में CBI की जांच की भी कड़ी आलोचना की थी।

    यह मामला राजनीतिक रूप से भी काफी चर्चित रहा, क्योंकि 2024 लोकसभा चुनावों के दौरान केजरीवाल की गिरफ्तारी हुई थी और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 156 दिनों की हिरासत के बाद उन्हें जमानत प्रदान की थी, जबकि मनीष सिसोदिया ने इस मामले में लगभग 530 दिन जेल में बिताए थे।

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