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एमएचए के निर्देश के अनुरूप वेतन का भुगतान नहीं करने वाले नियोक्ता के ख़िलाफ़ एफआईआर करने की मांग वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

Sharafat Khan
19 May 2020 2:50 AM GMT
एमएचए के निर्देश के अनुरूप वेतन का भुगतान नहीं करने वाले नियोक्ता के ख़िलाफ़ एफआईआर करने की मांग वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
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दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक कार रेंटल कंपनी के निजी कर्मचारी की याचिका पर नोटिस जारी किया। इस याचिका में कहा गया है कि अगर कोई नियोक्ता केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) के दिशानिर्देश के अनुरूप अपने कर्मचारियों को लॉकडाउन के अवधि के दौरान का वेतन नहीं देता है तो उसके ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की जाए।

एमएचए की 29 मार्च की अधिसूचना के बावजूद वेतन नहीं दिए जाने से पीड़ित 10 कर्मचारियों ने इसको लागू करवाने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से यह आग्रह भी किया कि वह नियोक्ता को पीड़ित कर्मचारियों को वेतन देने का निर्देश देने को एमएचए को कहे।

याचिकाकर्ता पिछले कुछ वर्षों से इस कंपनी के कर्मचारी हैं और उनका पीएफ भी कटता है। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि वित्त मंत्रालय की योजनाओं का लाभ उठाने के लिए कर्मचारियों ने अपने पीएफ फंड से पैसे निकलने की इच्छा भी जताई, लेकिन वेतन नहीं देने के साथ-साथ, उनके नियोक्ता ने उन्हें अपने पीएफ के बारे में कोई सूचना देने से भी इंकार कर दिया।

यह याचिका एडवोकेट अमित कुमार शर्मा और सत्यम सिंह ने दायर की है और इसमें कहा गया गया है कि पीड़ित कर्मचारियों ने वसंत कुंज थाने में इस बारे में 16 अप्रैल को एक एफआईआर भी दर्ज कराई। इसके बाद 22 अप्रैल को उन्होंने कंपनी के निदेशक को नोटिस भिजवाकर इस मुद्दे की ओर ध्यान आकृष्ट किया।

याचिका में कहा गया है कि

"इसके बाद से प्रतिवादी नंबर 3 और 4 (कंपनी के निदेशक) ने वेतन देने से मना कर दिया और इन लोगों ने धोखाधड़ी से कर्मचारियों के वेतन से पीएफ की राशि काट ली और अब जब उन्हें ज़रूरत है, वे इसमें से कोई राशि निकालने की अनुमति देने से मना कर रहे हैं और इस तरह महामारी में अपनी ज़िंदगी बचाने के उनके मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है।"

याचिककर्ताओं ने प्रतिवादी नंबर 3 और 4 के ख़िलाफ़ एसएचओ के पास शिकायत की थी पर इसका कोई असर नहीं हुआ।

दिल्ली पुलिस ने याचिकाकर्ताओं के आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने कहा कि पुलिस की निष्क्रियता और नियोक्ता के रवैए से उनके संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उनके मौलिक अधिकारों और उनकी गरिमा का हनन हुआ है।

"प्रतिवादी नम्बर 2 (दिल्ली पुलिस) अपने कर्तव्यों और उत्तरदायित्वों से हाथ नहीं धो सकती और क़ानून के तहत उन्हें प्रतिवादी नंबर 1 (एमएचए) के निर्देशों को लागू कराने और याचिकाकर्ताओं की शिकायत पर कार्रवाई करना चाहिए।"

याचिकाकर्ताओं की शिकायत पर ग़ौर करने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट की एकल पीठ के जज न्यायमूर्ति नवीन चावला ने एमएचए, दिल्ली पुलिस और दो कार रेंटल कंपनी के दो निदेशकों को नोटिस जारी किया। इस मामले की अगली सुनवाई 29 मई को होगी।

एमएचए के निर्देशों का पालन नहीं किए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी कई याचिकाएं दायर की गई हैं और शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने दो मामलों पर अपने अंतरिम आदेश में कहा कि नियोक्ताओं के ख़िलाफ़ वेतन का भुगतान नहीं होने के कारण कोई कार्रवाई नहीं की जाए।

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