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द‌िल्‍ली हाईकोर्ट ने द‌िल्‍ली सरकार को राशन की दुकानों की निगरानी का दिया निर्देश, यह सुनिश्‍चित करने को कहा कि सभी लाभार्थ‌ियों को राशन मिलता रहे

LiveLaw News Network
27 April 2020 10:26 AM GMT
द‌िल्‍ली हाईकोर्ट ने द‌िल्‍ली सरकार को राशन की दुकानों की निगरानी का दिया निर्देश, यह सुनिश्‍चित करने को कहा कि सभी लाभार्थ‌ियों को राशन मिलता रहे
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दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि सभी सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) खुले रहें और पीडीएस योजना के अनुसार लाभार्थियों को कुशलतापूर्वक राशन वितरित होता रहे।

जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल की एकल पीठ ने भी दिल्ली सरकार से कहा है कि वह सब डिवीजनल मजिस्ट्रेटों के माध्यम से प्रत्येक राशन की दुकान के कामकाज की निगरानी करें, और प्रत्येक दिन के बाद राशन के वितरण पर डेटा अपलोड करें। मामले की तात्कालिकता पर ध्यान देते हुए कोर्ट ने कहा: 'इस समय यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाए कि कोई भी भूखा न रहे।'

यह आदेश दिल्ली रोजी-रोटी अभियान की ओर से दायर जनहित याचिका पर दिया गया है, जिसमें जनता की चिंताओं को दूर करने के संबंध में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप शिकायत निवारण समिति की स्थापना करने की मांग की गई थी।

याचिका में दावा किया गया था कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के कार्यान्वयन में व्यापक स्तर पर उल्लंघन हुए हैं, जिनमें काम के घंटों के दौरान राशन की दुकानें बंद रहना, खाद्यान्न और अन्य प्रमुख संसाधनों तक पहुंच से इनकार करना और आवश्यक शिकायत निवारण और जवाबदेही तंत्र के कार्यान्वयन में कमी आदि शामिल हैं।

याचिकाकर्ता के अनुसार, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम का कार्यान्वयन न होना, संविधान के अनुच्छेद 21 में उल्‍ल‌िख‌ित कर्तव्यों के उल्लंघन के बराबर है, क्योंकि यह बड़ी संख्या में ऐसे लोगों के लिए संकट का कारण बना है, जो मौजूदा महामारी के दौर में असहाय हो चुके हैं।

इसलिए, याचिका में यह मांग की गई थी कि यह सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली सरकार को निर्देश जारी किए जाएं कि संकट के इस दौर में लोगों को खाद्यान्न और अन्य संसाधनों तक पहुंच से वंचित न किया जाए। यह उन सैकड़ों लोगों के कठ‌िनाइयों को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है, जो मौजूदा तालाबंदी के कारण भूख और बेरोजगारी की ओर धकेल दिए गए हैं।

यह सुनिश्चित करने के लिए, याचिकाकर्ता ने कोर्ट से कहा कि वह दिल्ली सरकार को जवाबदेही और शिकायत निवारण प्रणाली (राज्य खाद्य आयोग, सामाजिक ऑडिट सहित) जैसा कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की धारा 14, 15,16 और 28 के तहत परिकल्पित है, की स्थापना और संचालन का निर्देश दे, ताकि यह सुनिश्चित हो कि कोई भी भोजन की कमी के कारण भूखा न रहे और किसी तकनीकी आधार पर वंचित न रहे।

आज की कार्यवाही में, दिल्ली सरकार ने अदालत को सूचित किया कि 13 अप्रैल को, उसने शिकायत निवारण तंत्र के मुद्दे पर एक एडवाइजरी जारी की है। एडवाइजरी के अनुसार, मदद करने वालों के नंबर और ईमेल आईडी स्थापित किए गए हैं, जहां पीड़ित व्यक्ति अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

अदालत द्वारा पूछताछ किए जाने के बाद, दिल्ली सरकार ने अदालत को सूचित किया कि जिला मजिस्ट्रेटों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे यह सुनिश्चित करें कि उचित मूल्य की दुकानें खुली रहें और लाभार्थियों को राशन वितरित किया जाए।

राज्य सरकार ने बताया कि प्रत्येक दिन के अंत में स्टॉक में मौजूद राशन का विवरण भरने के लिए उचित मूल्य की दुकानों को गूगल फॉर्म दिए गए हैं।

दिल्ली सरकार ने बताया कि प्रत्येक आवासीय क्षेत्र के 200 मीटर के दायरे में हंगर रिलीफ सेंटर स्थापित किए गए हैं, जो हर दिन लगभग 10 लाख लोगों को खाना ख‌िला रहे हैं। इसके अलावा, मध्याह्न भोजन योजना का लाभ केवल छात्रों को ही नहीं बल्कि उनके माता-पिता को भी दिया जा रहा है।

याचिकाकर्ता की ओर से पेशा वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारिख ने कहा कि दिल्ली को चार क्षेत्रों में विभाजित करने और प्रत्येक क्षेत्र के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने की आवश्यकता है जो जनता की शिकायतों को दूर कर सके।

उन्होंने अदालत को बताया कि दिल्ली में राशन की 37% दुकानें काम के घंटों के दौरान बंद पाई गईं हैं, साथ ही राशन की दुकानों के कामकाज और शिकायतों को सार्वजनिक करने के लिए डाटा बनाने की जरूरत है।

इन दलीलों को रिकॉर्ड पर लेने के बाद कोर्ट ने यूनियन के साथ-साथ दिल्ली सरकार को 3 दिन के भीतर जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किया।

कोर्ट ने दिल्ली सरकार को प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दोनों में हेल्पलाइन नंबरों को प्रचारित करने का निर्देश जारी किया है। साथ ही सरकार को शिकायत अधिकारी और शिकायत निवारण प्रक्रिया का विवरण भी अपलोड करने को कहा गया है ताकि पीड़ित व्यक्ति उस तक पहुंच सकें।

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