अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका हुए रिहा, एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दिया आदेश

  • अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका हुए रिहा, एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दिया आदेश

    CJP की लीगल मामलों की हेड रत्ना सिंह ने बताया कि दिल्ली की एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने CJP नेताओं अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रंका को रिहा करने का आदेश दिया।

    इन तीनों CJP नेताओं को प्रिवेंटिव अरेस्ट (एहतियाती गिरफ्तारी) में लिया गया और दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन के तहत आने वाले साउथ वेस्ट डिस्ट्रिक्ट के स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की कोर्ट में पेश किया गया था।

    चीफ़ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए दिल्ली पहुंचने पर दिल्ली पुलिस ने कल (शनिवार) ही उनकी फ्लाइट से उतरते ही उन्हें हिरासत में ले लिया था।

    तीनों CJP नेताओं पर भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 (शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा) और धारा 170 (संज्ञेय अपराध करने से रोकने के लिए गिरफ्तारी) के तहत आरोप लगाए गए।

    BNSS की धारा 126 एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को यह अधिकार देती है कि वह ऐसे व्यक्ति से कारण बताने और शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड (1 साल तक के लिए) भरने को कह सके, जिसके शांति भंग करने या सार्वजनिक व्यवस्था में खलल डालने की आशंका हो। यह एक एहतियाती उपाय है।

    BNSS की धारा 170 पुलिस अधिकारी को बिना वारंट के किसी भी ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार करने की इजाजत देती है, जो संज्ञेय अपराध करने की योजना बना रहा हो, अगर उसे किसी और तरीके से रोका न जा सके। हिरासत की अवधि 24 घंटे तक सीमित होती है, जब तक कि किसी अन्य कानून के तहत और हिरासत की मंजूरी न दी गई हो।

    दिल्ली पुलिस के अनुसार, शनिवार को राजधानी भर में लगभग 2,500 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

    ये वे लोग थे जिन्हें विरोध प्रदर्शन वाले दिन से पहले रात भर राष्ट्रीय राजधानी में एहतियाती कार्रवाई के तहत पकड़ा गया था।

    बता दें, सुप्रीम कोर्ट आज (रविवार) एक विशेष सुनवाई करेगा। यह सुनवाई दिल्ली पुलिस द्वारा नेताओं, पूर्व मुख्यमंत्रियों, छात्रों, युवाओं, पत्रकारों, वकीलों और अन्य लोगों को बिना सोचे-समझे हिरासत में लेने के खिलाफ दायर याचिका पर होगी, जो कानून के शासन और लोकतांत्रिक असहमति के खिलाफ है।

    शीर्ष अदालत उस अवमानना ​​याचिका पर भी सुनवाई करेगी, जिसमें सार्वजनिक परिवहन, रेल और मेट्रो सेवाओं को पूरी तरह से बंद करने को चुनौती दी गई। यह कदम राष्ट्रीय राजधानी में इकट्ठा होने वाले प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए उठाया गया।

    बता दें, शनिवार को दिल्ली कोर्ट ने CJP की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह की वह याचिका खारिज की थी, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिए जाने के मामले में पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने और उन्हें तुरंत रिहा करने की मांग की थी।

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