यौन उत्पीड़न का मामला: बृजभूषण सिंह को बरी करने के खिलाफ महिला पहलवानों की याचिका पर सोमवार को होगी सुनवाई
Shahadat
26 Sept 2026 12:14 PM IST

दिल्ली कोर्ट ने शनिवार को चार महिला पहलवानों की उस अपील पर सुनवाई सोमवार तक के लिए स्थगित की, जिसमें यौन उत्पीड़न के मामले में बीजेपी नेता और रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) के पूर्व प्रमुख बृजभूषण सिंह को बरी किए जाने को चुनौती दी गई।
पहलवानों ने अपनी अपील में इस मामले में सह-आरोपी विनोद तोमर को बरी किए जाने को भी चुनौती दी।
राउज़ एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज दिग विनय सिंह, जिन्हें इस मामले की सुनवाई करनी थी, न्यायिक प्रशिक्षण के कारण छुट्टी पर थे।
इसलिए अब इस मामले की सुनवाई सोमवार को होगी।
पहलवानों ने 3 अगस्त को एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी। उनका तर्क है कि यह आदेश कानून के हिसाब से सही नहीं है और रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों की गलत और चुनिंदा समझ पर आधारित है।
अपील में कहा गया कि यह आदेश अटकलों और अनुमानों पर आधारित है। इसमें कानून के स्थापित और बाध्यकारी सिद्धांतों को लागू नहीं किया गया। साथ ही इसका तर्क यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ की शिकार महिलाओं के "अपेक्षित" व्यवहार के बारे में "पुरानी और रूढ़िवादी धारणाओं" पर टिका है, न कि पीड़ितों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष और सबूत-आधारित मूल्यांकन पर।
इस आदेश में ACJM ने पीड़ितों की लंबी चुप्पी, आरोपी के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने और गवाही में विरोधाभासों का हवाला दिया था। इन बातों से अभियोजन पक्ष के मामले पर उचित संदेह पैदा हुआ।
अदालत ने पाया कि रिकॉर्ड में ऐसी कई तस्वीरें थीं जिनसे पता चलता है कि सिंह को पीड़ितों द्वारा पारिवारिक कार्यक्रमों और शादी समारोहों में भी आमंत्रित किया गया।
अदालत ने यह भी कहा कि यह बात समझ में आती है कि सिंह उस समय WFI के अध्यक्ष थे। अगर महिला पहलवान उनके खिलाफ शिकायत करतीं तो वे उनका करियर बर्बाद कर सकते थे; लेकिन यह बात बिल्कुल समझ में नहीं आती कि उन्होंने सालों तक उनके साथ अच्छे संबंध क्यों बनाए रखे।
ACJM ने सिंह को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 354, 354A और 506 (भाग-I) के तहत लगे आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ आरोपों को बिना किसी शक के साबित करने में नाकाम रहा।
कोर्ट ने WFI के पूर्व सचिव विनोद तोमर को भी IPC की धारा 506 (भाग-I) के तहत लगे आरोप से बरी कर दिया।
दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता, 1860 (IPC) की धाराओं 354 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना), 354A (यौन उत्पीड़न), 354D (पीछा करना) और 506(1) (आपराधिक धमकी) के तहत चार्जशीट दाखिल की थी। तोमर के खिलाफ IPC की धारा 109 (उकसाना) भी लगाई गई।
हालांकि, एक नाबालिग पहलवान की ओर से सिंह के खिलाफ दर्ज POCSO मामले में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल की गई।
महिला पहलवानों ने सिंह पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यौन उत्पीड़न की कथित घटनाएं 2016 से 2019 के बीच WFI ऑफिस, सिंह के सरकारी आवास और विदेश में हुईं।

