मनीषा पांडे के खिलाफ पोस्ट मामले में अभिजीत अय्यर मित्रा को राहत, FIR आदेश पर रोक

Shahadat

4 May 2026 2:53 PM IST

  • मनीषा पांडे के खिलाफ पोस्ट मामले में अभिजीत अय्यर मित्रा को राहत, FIR आदेश पर रोक

    दिल्ली कोर्ट ने सोमवार को टिप्पणीकार अभिजीत अय्यर मित्रा के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश पर रोक लगाई। यह आदेश डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म न्यूज़लॉन्ड्री की संपादकीय निदेशक मनीषा पांडे की शिकायत पर दिया गया, जिसमें उन्होंने मित्रा पर सोशल मीडिया पर उनके और अन्य महिला कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज करने का आरोप लगाया।

    साकेत कोर्ट के एडिशनल सेशन जज पुरुषोत्तम पाठक ने 23 अप्रैल को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी द्वारा पारित आदेश पर रोक लगाई।

    यह आदेश मित्रा की उस याचिका पर पारित किया गया, जिसमें उन्होंने मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती दी थी।

    विवादित आदेश के ज़रिए, कोर्ट ने पांडे के पक्ष में फैसला सुनाया था, जिन्होंने मित्रा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी।

    कोर्ट ने कहा था कि मित्रा के ट्वीट "यौन-रंग वाले बयान" की श्रेणी में आते हैं। "प्रथम दृष्टया" उनका मकसद शिकायतकर्ता की गरिमा का अपमान करना था, जिनका नाम एक ट्वीट में लिया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि मित्रा के ट्वीट की सामग्री से BNS की धारा 75(3) (यौन-रंग वाले बयान) और 79 (महिलाओं की गरिमा का अपमान) के तहत संज्ञेय अपराधों का होना पता चलता है।

    कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि पुलिस जांच ज़रूरी है, क्योंकि यह अपराध साइबरस्पेस में "X" प्लेटफ़ॉर्म पर किया गया।

    पिछले साल 13 अगस्त को जज ने मालवीय नगर पुलिस स्टेशन के SHO को इस मामले में "एक्शन टेकन रिपोर्ट" (ATR) दाखिल करने का निर्देश दिया। उनसे पूछा गया था कि क्या शिकायतकर्ता द्वारा पुलिस स्टेशन में कोई शिकायत की गई थी या प्राप्त हुई। यदि हां, तो उस शिकायत पर क्या कार्रवाई की गई।

    इसके बाद नवंबर में SHO को ATR दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया गया।

    रिपोर्ट 18 फरवरी को कोर्ट में दाखिल की गई। उसके बाद इस मामले की सुनवाई महिला पत्रकारों के BNSS की धारा 175(3) के तहत दायर आवेदन पर हुई।

    बता दें, महिला पत्रकारों ने मानहानि के आरोप में दिल्ली हाईकोर्ट में मित्रा के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। उन्होंने मित्रा से सार्वजनिक माफी और हर्जाने व मुआवजे के तौर पर 2 करोड़ रुपये की मांग की। हाईकोर्ट के सामने पत्रकारों ने दलील दी कि X पर अय्यर की कथित तौर पर मानहानिकारक पोस्ट अपमानजनक, बेबुनियाद और गलत इरादे से की गईं। ये पोस्ट किसी और मकसद से जान-बूझकर और सोच-समझकर की गईं, जिनका मकसद महिला कर्मचारियों की गरिमा और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना था।

    उनके मुताबिक, अय्यर ने X प्लेटफ़ॉर्म पर अपनी पोस्ट की सिरीज़ के ज़रिए महिला कर्मचारियों को "झूठे और दुर्भावनापूर्ण" तरीके से कथित तौर पर अपमानजनक शब्दों और गालियों से नवाज़ा था; उन्होंने उन्हें 'वेश्या' और उनके काम करने की जगह को 'कोठा' कहा था।

    इससे पहले हाईकोर्ट ने अय्यर को उनके ट्वीट्स के लिए फटकार लगाई, जिसके बाद मित्रा ने वे विवादित पोस्ट हटा ली थीं।

    बाद में मित्रा ने हाईकोर्ट में अर्ज़ी देकर मानहानि के इस मुक़दमे को खारिज करने की मांग की। यह मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है।

    Next Story