महुआ मोइत्रा के ख़िलाफ़ FIR की मांग: गंगा इफ्तार पार्टी गिरफ़्तारियों पर किया था ट्वीट, कोर्ट ने जारी किया नोटिस
Shahadat
16 April 2026 10:02 AM IST

दिल्ली कोर्ट ने बुधवार को TMC नेता महुआ मोइत्रा के ख़िलाफ़ FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया। यह याचिका मोइत्रा के उस ट्वीट के संदर्भ में दायर की गई, जिसमें उन्होंने वाराणसी में गंगा नदी में एक नाव पर इफ्तार पार्टी आयोजित करने, मांसाहारी भोजन करने और हड्डियों व खाने का जूठा नदी में फेंकने के आरोप में हाल ही में गिरफ़्तार किए गए 14 मुस्लिम पुरुषों की गिरफ़्तारी का विरोध किया था।
साकेत कोर्ट के एडिशनल सेशन जज सोनू अग्निहोत्री ने फाइनल ईयर के लॉ स्टूडेंट द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया। इस याचिका में मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें स्टूडेंट की शिकायत ख़ारिज कर दी गई थी।
कोर्ट ने मोइत्रा से जवाब मांगा और मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 मई की तारीख़ तय की।
शिकायतकर्ता राम प्रवेश दुबे ने 'भारतीय न्याय संहिता' (BNS) के तहत FIR दर्ज करने की मांग की। BNS की वे धाराएं, जिनके तहत शिकायत की गई, शत्रुता को बढ़ावा देने, धार्मिक भावनाओं को आहत करने और सार्वजनिक उपद्रव फैलाने से संबंधित हैं।
यह विवाद 19 मार्च को X (Twitter) पर मोइत्रा द्वारा किए गए एक पोस्ट से शुरू हुआ, जो वाराणसी में हुई गिरफ़्तारियों की पृष्ठभूमि में किया गया।
इस पोस्ट में मोइत्रा ने यह सवाल उठाया कि क्या किसी हिंदू शव को शाकाहारी या मांसाहारी की श्रेणी में रखा जा सकता है? उन्होंने आगे कहा था कि जब तक इस सवाल का जवाब नहीं मिल जाता, तब तक गंगा नदी में चिकन खाने के लिए किसी को भी गिरफ़्तार नहीं किया जा सकता।
दुबे ने आरोप लगाया कि यह बयान हिंदू धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला था और इसका उद्देश्य सांप्रदायिक वैमनस्य भड़काना था।
हालांकि, दुबे गुजरात के गांधीनगर स्थित 'नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी' से विधि की पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन उनका दावा है कि जब यह घटना (Cause of Action) हुई, तब वे दिल्ली में इंटर्नशिप कर रहे थे और एक 'पेइंग गेस्ट' (PG) आवास में रह रहे थे।
उन्होंने 30 मार्च को JMFC द्वारा पारित उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें मोइत्रा के ख़िलाफ़ FIR दर्ज करने का आदेश देने से इनकार किया गया। JMFC ने अपने आदेश में कहा कि शिकायत के साथ पुलिस को दी गई कोई शिकायत संलग्न नहीं थी, और न ही ऐसा कोई साक्ष्य मौजूद था, जिससे यह साबित हो सके कि धार्मिक मान्यताओं का अपमान करने या सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने का कोई इरादा था।
शिकायत ख़ारिज किए जाने को चुनौती देते हुए पुनरीक्षण याचिका (Revision Petition) में यह तर्क दिया गया कि मजिस्ट्रेट ने शिकायत को शुरुआती चरण में ही ख़ारिज करके "कानून की स्पष्ट त्रुटियां" कीं।
याचिका में यह तर्क भी दिया गया कि 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (BNSS) के तहत मजिस्ट्रेट किसी शिकायत का सीधे संज्ञान ले सकता है। इसके लिए पहले पुलिस के पास जाना अनिवार्य नहीं है। याचिका में कहा गया कि 656,200 व्यूज़ और 2,100 रीट्वीट के साथ इस बयान की पहुंच, अपने आप में एक अहम सबूत है, जो यह साबित करता है कि इससे 'सार्वजनिक शांति भंग होने की संभावना' है और 'डर या दहशत फैलने की संभावना' है।
इस मामले में गिरफ़्तार किए गए 14 आरोपी थे: आज़ाद अली, आमिर कैफ़ी, दानिश सैफ़ी, मोहम्मद अहमद, निहाल आफ़रीदी, महफ़ूज़ आलम, मोहम्मद अनस, मोहम्मद अव्वल, मोहम्मद तहसीन, मोहम्मद अहमद उर्फ़ राजा, मोहम्मद नूर इस्माइल, मोहम्मद तौसीफ़ अहमद, मोहम्मद फ़ैज़ान और मोहम्मद समीर।
वाराणसी की एक सेशंस कोर्ट ने इन सभी की ज़मानत अर्ज़ी खारिज की। आरोप है कि यह इफ़्तार पार्टी 15 मार्च को हुई, जिसके दौरान कथित तौर पर इन 14 आरोपियों ने नाव की सवारी करते हुए चिकन बिरयानी खाई और बचा हुआ खाना नदी में फेंक दिया।
भारतीय जनता युवा मोर्चा के ज़िला अध्यक्ष रजत जायसवाल की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए वाराणसी पुलिस ने इन्हें 17 मार्च को गिरफ़्तार किया था।

